- मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ करेंगे बैठक, राइटर्स बिल्डिंग का रेनोवेशन और उत्तरी कोलकाता में कुमारतुली घाट का रीडेवलपमेंट शामिल
- न्यू टाउन में 2000 बेड वाला अस्पताल बनाना भी होगा इसमें शामिल
- कटमनी मुक्त बंगाल बनाने का संकल्प है भाजपा सरकार का लक्ष्य
- बंगाल में उधोग का जाल बिछाकर युवाओं को रोजगार देना चाहती है सरकार
अशोक झा/ कोलकाता: अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी आज कोलकाता स्थित राज्य सचिवालय में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ बैठक करेंगे। अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी बुधवार रात कोलकाता पहुंच गए है। गुरुवार को उनकी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ बैठक प्रस्तावित है। राज्य सरकार के निवेश आकर्षित करने के प्रयासों के बीच होने वाली इस मुलाकात में बंगाल में संभावित निवेश और विभिन्न परियोजनाओं पर चर्चा होने की संभावना है। शुभेंदु अधिकारी ने गौतम अडानी से पश्चिम बंगाल में निवेश का आग्रह किया था।
पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद अडानी ग्रुप की दमदार एंट्री होने वाली है। यह ग्रुप आज यानि 24 सितंबर को बंगाल में तीन बड़े प्रोजेक्ट शुरू कर सकता है। ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी भी इस मौके पर मौजूद रह सकते हैं। इनमें राइटर्स बिल्डिंग का रेनोवेशन और उत्तरी कोलकाता में कुमारतुली घाट का रीडेवलपमेंट शामिल है। तीसरे प्रोजेक्ट के तौर पर न्यू टाउन में 2000 बेड वाला अस्पताल बनाना शामिल है।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के द्वारा अनुरोध के बाद अडानी ग्रुप ने इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। अडानी ग्रुप के एक अधिकारी ने कहा, "तीनों प्रोजेक्ट 24 सितंबर को शुरू किए जा सकते हैं। हालांकि गौतम अडानी शामिल होंगे या नहीं यह अभी तय नहीं है, लेकिन उन्हें यहां बुलाने की कोशिशें चल रही हैं। रिपोर्ट में एक सूत्र के हवाले से कहा, "अस्पताल के 2000 बेड में से 1000 बेड आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए रिजर्व रहेंगे। बाकी 1000 बेड का इस्तेमाल कमर्शियल तौर पर किया जाएगा।"सीएसआर के तहत अडानी ग्रुप कर रहा यह काम:कुमारतुली घाट प्रोजेक्ट के बारे में राज्य सरकार के एक अधिकारी ने कहा, "अडानी ग्रुप अपनी कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत इस प्रोजेक्ट में हिस्सा ले रहा है। इसकी लागत लगभग 100 करोड़ है।" इसमें कुमारतुली घाट और चंपटाला घाट के बीच 300 मीटर के दायरे में मौजूद हेरिटेज इमारतों, मंदिरों और धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार शामिल है। इस परियोजना से नदी के किनारे की सुरक्षा मजबूत होगी, पैदल चलने वालों के रास्ते बेहतर होंगे, नदी तक पहुंच आसान होगी, सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए जगह बनेगी, खाने-पीने के स्टॉल और पब्लिक टॉयलेट बनेंगे।
अडानी ग्रुप ने बिल्डिंग का मुआयना करने के लिए पहले ही एक टीम भेज दी है। इस बात पर भी रिसर्च शुरू कर दी गई है कि बिल्डिंग को उसके मूल ब्रिटिश-कालीन स्वरूप में कैसे वापस लाया जा सकता है। इस प्रोजेक्ट के लिए अनुमानित 100 करोड़ की जरूरत होगी। राज्य सरकार से मंजूरी मिलते ही ग्रुप प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए तैयार है।गहरे समुद्र वाले बंदरगाह में दिलचस्पी: सूत्रों ने बताया कि अडानी ग्रुप ने पूर्वी मिदनापुर के दादानपात्राबार में गहरे समुद्र वाले बंदरगाह के लिए टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लेने में भी दिलचस्पी दिखाई है। एक सूत्र ने कहा, “पिछली सरकार ने इसे ताजपुर में बनाने का प्रस्ताव दिया था और हमें इसे विकसित करने की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका क्योंकि इसके लिए बहुत सारे लोगों को विस्थापित करना पड़ता। अब नई सरकार ने इस प्रोजेक्ट को ऐसी जगह पर शिफ्ट कर दिया है जहां किसी को भी विस्थापित करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसीलिए हम इसमें दिलचस्पी ले रहे हैं।”इसके अलावा अदाणी समूह ने मंगलवार को दुर्गा पूजा से जुड़े कलाकारों और आयोजकों से नामांकन आमंत्रित करने के लिए एक वेबसाइट शुरू की। इस पहल के तहत आठ दुर्गा पूजा समितियों को 25-25 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। इसके पहले मुख्यमंत्री उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर जाकर उनसे मिल चुके है। अधिकारी ने कहा कि उनकी इस सौहार्दपूर्ण बातचीत में पश्चिम बंगाल में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन की अपार संभावनाओं पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार दूरदर्शी निवेश का स्वागत करने के लिए तैयार है जो युवाओं को सशक्त बनाए और सतत आर्थिक विकास को गति दे। उन्होंने अंबानी परिवार द्वारा किए गए शानदार स्वागत और आतिथ्य के लिए आभार व्यक्त किया।
राज्य में सरकार बदलने के बाद से ही भाजपा नीत प्रशासन बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश जुटाने और व्यापार के अनुकूल माहौल तैयार करने में जुटा है। मुख्यमंत्री अधिकारी ने बार-बार दोहराया है कि औद्योगिकीकरण को गति देना और रोजगार के अवसर पैदा करना सरकार की मुख्य प्राथमिकताओं में शामिल है। हाल ही में उन्होंने कहा था कि राज्य में कथित “गुंडा टैक्स” खत्म हो चुका है और जो उद्योगपति पहले बंगाल से दूर रहे थे, वे अब राज्य में नए सिरे से रुचि दिखा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने 33 औद्योगिक परियोजनाओं को जमीन सौंपे जाने के एक कार्यक्रम में कहा कि राज्य सचिवालय में 24 घंटे काम करने वाली हेल्पलाइन पर मिली शिकायतों के आधार पर सरकार कार्रवाई करेगी और औद्योगिक इकाइयों को सुचारू रूप से काम करने में मदद करेगी। उन्होंने कहा, ''अगर कार्यालय, कारखाने या कारोबारी स्थान पर कोई आपको परेशान करता है या उत्पीड़न करता है तो हमारे टोल-फ्री नंबर 155335 पर फोन कर हमें उसकी सूचना दें।'' उन्होंने कहा, "हम आपको कारोबार और उद्योग के अनुकूल माहौल उपलब्ध कराएंगे। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि आपको परेशान न किया जाए।" अधिकारी ने कहा कि 100 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करने वाले निवेशकों को भवन योजना, दाखिल-खारिज, भूमि उपयोग परिवर्तन और व्यापार लाइसेंस जैसी मंजूरियों के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार एकल-खिड़की व्यवस्था के तहत जरूरी मंजूरियां दिलाने में मदद करेगी। अधिकारी ने कहा कि नौ मई को उनके मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद राज्य में 'सिंडिकेट' प्रथा और कारोबारियों से जबरन वसूली खत्म हो गई है। मुख्यमंत्री ने पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर 'मुफ्तखोरी की संस्कृति' को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोगों को नकद सहायता देकर निर्भर बनाए रखना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण के विपरीत है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने लोकप्रियता हासिल करने के लिए लोगों को प्रति माह 500 रुपये देने की नीति अपनाई थी जो कि 'बहुत खराब प्रथा' है। अधिकारी की यह टिप्पणी 'लक्ष्मीर भंडार' योजना से संबंधित मानी जा रही है, जिसके तहत शुरुआत में महिलाओं को 500 रुपये मासिक दिए जाते थे। यह राशि बाद में बढ़ाकर 1,500 रुपये की गई। मौजूदा भाजपा सरकार ने योजना का नाम बदलकर अन्नपूर्णा योजना किया और राशि बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दी।
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