- एक तीर से कई निशाने,सख्त संदेश किसी पर भी हो सकती है कार्रवाई
अशोक झा/ कोलकाता: बंगाल सरकार ने गुरुवार को भाजपा सांसद नागेंद्र राय, जिन्हें अनंत महाराज के नाम से भी जाना जाता है, को दिया गया बंग विभूषण पुरस्कार वापस ले लिया। यह राज्य का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है और यह कार्रवाई नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर की गई है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पुलिस को सख्त कार्रवाई के निर्देश देने के 24 घंटे के अंदर यह फैसला लिया गया है।
इस फैसले से मुख्यमंत्री ने एक तीर से कई निशाने साधे है। इस कार्रवाई से भाजपा में यह संदेश गया कि जब सांसद पर कार्रवाई हो सकती है तो पार्टी नेताओं पर क्यों नहीं? दूसरी तरह मुख्यमंत्री ने विरोधियों को स्पष्ट कर दिया हाकी जब वह इस मुद्दे पर भाजपा को नहीं छोड़ सकते तो विरोधी की तो बात ही क्या। मुख्यमंत्री ने पुलिस से कहा था कि सोशल मीडिया पर नेताजी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और जरूरत पड़ने पर गिरफ्तारी भी की जाए। उन्होंने कहा था कि कानून सभी पर समान रूप से लागू होगा, चाहे वह सांसद हो, विधायक हो या सरकारी अधिकारी। मुख्यमंत्री का यह निर्देश अनंता महाराज की उस टिप्पणी के कुछ दिन बाद आया था, जिसमें उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को 'युद्ध अपराधी' बताया था. उन्होंने आजाद हिंद फौज की भूमिका और भारत की आजादी की लड़ाई में नेताजी के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए थे। भाजपा सांसद नागेंद्र राय पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से के कूचबिहार से आते हैं और राजबंशी समुदाय के नेता हैं। नागेंद्र राय को फरवरी 2026 में, जब ममता बनर्जी की सरकार सत्ता में थी, बंगा विभूषण से सम्मानित किया गया था।
सरकार ने अपने बयान में क्या कहा?: राज्य सरकार के मुताबिक, बंगा विभूषण राज्य और उसके लोगों के लिए उल्लेखनीय और बेहतरीन योगदान के सम्मान में दिया जाता है। यह सम्मान अपने साथ प्रतिष्ठा और सम्मान भी रखता है।सरकार ने कहा कि कुछ नए तथ्य और परिस्थितियां सामने आई हैं, जिनसे यह सवाल उठा कि नागेंद्र राय को यह सम्मान आगे भी दिया जाना चाहिए या नहीं. सरकार ने कहा कि हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि नागेंद्र राय के पास बंगा विभूषण का बने रहना इस सम्मान की गरिमा, प्रतिष्ठा और मकसद के मुताबिक नहीं है। इसलिए पश्चिम बंगाल सरकार ने 21 फरवरी 2026 को नागेंद्र राय को दिया गया बंगा विभूषण तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया और रद्द कर दिया। हालांकि, सरकार ने अपने बयान में यह साफ नहीं किया कि किस खास टिप्पणी या अपराध के आधार पर यह सम्मान वापस लिया गया है। बंग विभूषण' पश्चिम बंगाल सरकार का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है. इसकी शुरुआत 2011 में हुई थी. अब तक यह सम्मान कला, संस्कृति, सिनेमा, साहित्य, संगीत, खेल और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियों को दिया जा चुका है। अब देखना हिंसकी अनंत महाराज इस कार्रवाई के बाद क्या रुख अख्तियार करते है। भाजपा लोकसभा चुनाव के समय से उनके गतिविधियों पर नजर रख रही थी। क्योंकि चर्चा में था कि निशीथ प्रमाणिक की हार और कर्सियांग के पूर्व भाजपा विधायक बजगई का सांसद राजू विष्ट के खिलाफ खोला गया मोर्चा के पीछे अप्रत्यक्ष रूपसे इनका हाथ है।राजवंशियों के नेता ही नहीं उनके महाराज बन यह लगातार अलग राज्य कामतापुर की मांग करते रहे है। अनंत राय राजबोंगसी समुदाय से आते हैं. खुद को 'ग्रेटर कूच बिहार' का एक स्वघोषित 'महाराज' बताते हैं. लंबे समय से कूच बिहार और उत्तर बंगाल के अन्य जिलों को मिलाकर अलग राज्य बनाने की मांग के लिए लड़ रहे हैं. इस मांग के लिए बनाए गए एक संगठन 'ग्रेटर कूच बिहार पीपल्स एसोसिएशन' (GCPA) के अध्यक्ष हैं।
"मैं राज्य का विभाजन चाहता हूं, या बंगाल का एकीकरण, इसका जवाब तो समय ही देगा. मुझे खुशी है कि उन्होंने मुझे चुना।मैं अपने क्षेत्र के विकास के लिए काम करूंगा."
अनंत राय ने राजवंशी समुदाय के बीच अपनी छवि एक 'गुरु' की तरह बनाई है। कूचबिहार में राजा की तरह महल बनवाया हुआ है।"खुद को राजबोंगसी समुदाय का राजा मानते हैं. करीब दो दशक पहले ग्रेटर कूच बिहार आंदोलन में शामिल हो गए।हिंसक आंदोलनों के कारण कई बार भूमिगत होना पड़ा। लंबे समय तक असम में भी शरण लिया था।साल 2016 में टीएमसी ने अनंत राय पर आरोप लगाया था कि वे "नारायणी सेना" नाम से एक अलग ग्रुप बना रहे हैं। आरोप था कि इस ग्रुप को सीमा सुरक्षा बल (BSF) ट्रेनिंग दे रही है।हालांकि BSF ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। हालांकि राज्य पुलिस ने अनंत राय और उनके समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई करनी शुरू कर दी थी।बराय के खिलाफ कई केस भी दर्ज हुए।फिलहाल वे जमानत पर हैं। 2016 में ही राष्ट्रीय राजनीतिक फलक पर पहली बार उनका नाम सामने आया था
कूच बिहार सीट पर उपचुनाव था। टीएमसी सांसद रेणुका सिंह के निधन के बाद उपचुनाव की घोषणा हुई थी। तब ये चर्चा चली थी कि बीजेपी अनंत राय को टिकट दे सकती है। बीजेपी का एक खेमा उनको सपोर्ट कर रहा था. उसी साल राज्य में विधानसभा चुनाव भी हुए थे. अनंत राय ने साफ-साफ कहा भी कहा कि "उनके लोग" बीजेपी की रैली में शामिल हुए। लोगों से कहा है कि बीजेपी के वादों पर भरोसा करें।हालांकि उन्हें टिकट नहीं मिला। दरअसल, राज्य विधानसभा चुनाव से पहले राजनाथ सिंह ने कहा था कि कूचबिहार के लोग लंबे समय से अपनी पहचान और संस्कृति के लिए लड़ रहे हैं. ग्रेटर कूच बिहार आंदोलन के लिए जो भी संभव होगा, बीजेपी वो करेगी. राजनाथ सिंह ने ये भी कहा था कि उन्होंने 'महाराज' अनंत राय से कहा है कि सरकार आपके साथ हैं। अनंत राय अपने महल में वो रोज लंगर करवाते हैं। पूजा पाठ करवाते हैं। इसके कारण समुदाय के भीतर उनकी पैठ अच्छी बनी है।
"अनंत महाराज मुख्य रूप से असम के रहने वाले हैं। जब उनके खिलाफ कई केस दर्ज हुए थे तो वे भागकर असम चले गए थे। चर्चा चली थी कि वे असम के जंगल में रह रहे हैं।बाद में ये भी खबरें आईं कि वे कई बार हिमंतबिस्वा सरमा से मिले।असम में ही वे अमित शाह से भी मिले थे।जब प्रधानमंत्री बंगाल में रैली करने पहुंचे थे तो वे स्टेज पर भी साथ दिखे थे।चुनावों के बाद उनका बीजेपी के साथ संबंध बेहतर हुआ। ग्रेटर कूच बिहार आंदोलन: कूच बिहार उत्तर बंगाल का हिस्सा है. असम से सटा हुआ जिला है. अलग राज्य की मांग करने वाले कूच बिहार और उत्तर बंगाल के कुछ जिलों के साथ लोअर असम के कुछ हिस्सों को भी जोड़ने की बात करते हैं. 1990 के दशक से इस आंदोलन ने जोर पकड़ा है. ग्रेटर कूच बिहार पीपल्स एसोसिएशन के भी दो गुट हैं।एक गुट को अनंत राय लीड करते हैं। दूसरे गुट के नेता बोंगसी बदन बर्मन हैं। बर्मन का गुट टीएमसी समर्थक माना जाता है।
अलग राज्य की मांग करने वालों दावा है कि कूचबिहार को "अवैध" तरीके से पश्चिम बंगाल का हिस्सा बनाया गया। यह 1949 में महाराजा जगदीपेंद्र नारायण और भारत सरकार के बीच हुई संधि के खिलाफ है।दो साल पहले बात करते हुए बर्मन ने कहा था।"12 सितंबर 1949 को, इस साम्राज्य का भारत के साथ विलय हुआ था। तीन संधियों के जरिये इसे सी-कैटगरी (केंद्र शासित) राज्य का दर्जा मिला था। लेकिन एक जनवरी 1950 को ब्रिटिश कानूनों और पुराने नक्शे के आधार भारत सरकार ने साम्राज्य को बांट दिया। इससे ये इलाका पश्चिम बंगाल और असम का हिस्सा बन गया।इसलिए हम वही पुरानी मांग कर रहे हैं और ग्रेटर कूच बिहार राज्य बनाना चाहते हैं। राजवंशी समुदाय और बीजेपी: पश्चिम बंगाल के नक्शे को जब देखेंगे तो ये वर्टिकल आकार में है. इसलिए राजनीतिक विश्लेषण के लिए इसे मोटे तौर पर उत्तर और दक्षिण बंगाल में बांटा जाता है। उत्तर बंगाल में राजबोंगसी समुदाय की आबादी करीब 30 फीसदी है।राजबोंगसी अनुसूचित जाति (SC) में आते हैं. राज्य की कुल SC आबादी का 18 फीसदी से भी ज्यादा। कूचबिहार के अलावा राजबोंगसी समुदाय की बड़ी आबादी जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, उत्तरी दिनाजपुर और दक्षिणी दिनाजपुर में भी है।इस हिस्से में कुल 8 लोकसभा क्षेत्र हैं।
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