- क्या गंगा दिखायेगा अपना विकराल रूप या तटबंधों में बंध जाएगी उनकी भी सीमा
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: पूर्वोत्तर का प्रवेशद्वार सिलीगुड़ी। यह तो धर्म नगरी है इसलिए समय समय पर यहां कथा पुराणों में वर्णित घटनाएं जीवंत हो उठती है। जी हाँ यह सच है। पिछले दिनों राम तेरी गंगा मैली हो गई थी तो अब भस्मासुर की कथा चरितार्थ होती दिख रही है। इस कथा में स्पष्ट है कि भगवान शंकर को प्रसन्न कर भस्मासुर ने वरदान मांगा कि मैं जिसके सिर पर हाथ रख दूँ वह भस्म हो जाए। भोले दानी ने कहा ऐसा ही होगा। वरदान मिलते ही भस्मासुर ने भगवान शंकर पर ही मिले वरदान को आजमाना चाहा। शंकर भगवान भागने लगे। तब भगवान विष्णु में मोहिनी को भेजा। मोहिनी ने ऐसा नृत्य किया कि स्वयं भस्मासुर अपने ही सिर पर हाथ रखा और वह भस्म हो गया। कुछ ऐसा ही हुआ है इस शहर में। सिलीगुड़ी के चर्चित चाय व्यापारी के सम्मान से खिलवाड़ करती आवाजें उठने लगी। उसके बाद समाज में सामाजिक दानदाता,कर्णधार बताकर उसने समर्थन की मांग सोशल मीडिया में उठी। मामला नेपाल के एक इन दिनों सबसे चर्चित होटल मेची तक पहुंची। मामल क्या है इसका खुलासा आजतक भी ही पाया। बाद में समाज के एक कथित ठेकेदार ने गंगा को मैली ना होने देने की सौगंध खाकर ताना बाना बुनना शुरू किया। जिस गंगा को मैली होने की बात कही जा रही थी उन्होंने कहा कि गंगा पवित्र था, है और आगे भी रहेगा। इसी बीच एक भवन में इस पूरे मामले को लेकर सभा आयोजित की गई। लेकिन वह सफल नहीं हो पाया। अब वही गंगा को मैली नहीं होने देने वाले ने 10 करोड़ की मांग की। सिर्फ मांग ही नहीं डराया और धमकाया भी। अब मामला उत्तरायण आउट पोस्ट होता हुआ माटीगाड़ा थाना पहुंच गया है।
शिकायतकर्ता ने WhatsApp वॉइस मैसेज, ऑडियो-वीडियो क्लिप और CCTV फुटेज जैसे डिजिटल साक्ष्यों का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, इनसे जुड़े डेटा वाली पेनड्राइव भी जब्त किए जाने की बात सामने आई है। इसका केस नम्बर 756/26 है। अब पुलिस सीसीटीवी, वाट्सअप कॉल रिकॉर्ड सहित अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। मामला सामने आया तो करोड़ो की माँग करने वाले अब सोशल मीडिया में यह लिख रहे है कि वह इन रुपए की मांग जरूर किए थे। जिसमें वह गंगा को मैली होने से बचाने में जो खर्च करते उसे वह लेते और बचे रुपए को शहर के सभी सामाजिक संस्थाओं में दान करवा देते। इसी बात को लेकर अब कई सवाल उठने लगे है। आखिर वह कौन सी बात थी जिसके लिए 10 करोड़ का दान देने की तैयारी चल रही थी। आखिर क्यों उन्हें बचाने वाले ही 10 करोड़ की मांग करने लगे? क्या यह किसी को बदनाम कर उसे फिर बचाने के नाम पर मोटी रकम वसूलना तो नहीं है? अब मामला पुलिस के जांच पर टिका है। देखना है कि मिठाई खाकर वह शुगर पीड़ित होते है या शुगर फ्री मिठाई से मामला रफा दफ़ा हो जाता है। चलो एक बात तो यह साबित हुआ कि गंगा शांत रहती है तो उसमें सभी गोता लगाते है लेकिन जब वह बिकराल रूप लेती है तो सब कुछ बर्बाद कर देती है। चाहे उसके अपने कहने वाले ही क्यों ना हो।
दुनियाभर के घुमक्कड़ पत्रकारों का एक मंच है,आप विश्व की तमाम घटनाओं को कवरेज करने वाले खबरनवीसों के अनुभव को पढ़ सकेंगे
https://www.roamingjournalist.com/