- बांग्लादेश से नई पहचान के साथ फिर भारत आने का था प्लान
- आईएसआई ने एजेंट पवेल से करवाई मदद,भारतीय पहचान पत्र पाने के लिए सह-आरोपी के पिता का नाम किया इस्तेमाल
अशोक झा/ कोलकाता: भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर पश्चिम बंगाल एसटीएफ के हत्थे चढ़े आईएसआई जासूस राणा रऊफ उर्फ वहाब आलम को लेकर कई बड़े खुलासे सामने आए हैं।पश्चिम बंगाल के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने एक संदिग्ध पाकिस्तानी नागरिक और उसके सहयोगी को गिरफ्तार किया है। उनके पास से भारतीय सेना की पूर्वी कमान के मुख्यालय फोर्ट विलियम का नक्शा और तस्वीरें मिली हैं। रऊफ को भारत में पांव जमाने में मदद करने वाले मोहम्मद एजाज को भी एसटीएफ ने उठाया है।शुरुआती जांच में पता चला है कि राणा रऊफ को भारतीय पहचान पत्र बनवाने में मोहम्मद इजाज ने ही उसकी मदद की थी. एजाज को कोलकाता के टोपसिया से गिरफ्तार किया गया है।एसटीएफ के अधिकारी ने बताया कि जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि फोर्ट विलियम का नक्शा एवं तस्वीरें आरोपियों के पास कैसे पहुंचीं और क्या ये किसी तरह की सूचना जुटाने की गतिविधि का हिस्सा थीं। चैट और फोन नबर्स किए डिलीट:एजेंसी आरोपियों की डिजिटल गतिविधियों की भी जांच कर रही है। उनके पास से बरामद मोबाइल फोन में कथित तौर पर पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश से जुड़े सोशल मीडिया चैट और फोन नंबर मिले हैं। अधिकारी ने कहा कि जांचकर्ताओं को ऐसे संकेत भी मिले हैं कि कुछ चैट और फोन नंबर हटा दिए गए थे। हटाए गए चैट और नंबरों की सावधानीपूर्वक जांच की जा रही है। पुलिस ने कहा कि हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आरोपियों के संपर्क किन लोगों से थे, उनके बीच किस तरह की बातचीत हुई और क्या कोई सूचना साझा की गई थी।बांग्लादेश से नई पहचान के साथ फिर भारत आने का था प्लान:पाकिस्तानी नागरिक वहाब आलम कुछ समय के लिए बांग्लादेश भागने की फिराक में था। वह बांग्लादेश में कुछ समय बिताकर नई पहचान और नए काम के साथ वापस पश्चिम बंगाल लौटना चाहता था। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की पूछताछ में वहाब आलम ने कई अहम खुलासे किए हैं। सूत्रों के अनुसार उसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने भेजा था। उसका काम देश के पूर्वी हिस्से में भारतीय सेना, नौसेना और रेलवे की जानकारी जुटाना था।
आईएसआई ने एंजेंट पवेल से करवाई मदद:
पूछताछ में वहाब आलम ने बताया कि पाकिस्तान में बैठे उसके आकाओं ने उसे सलाह दी थी कि वह कुछ समय के लिए बांग्लादेश चला जाए। एसटीएफ ने आलम के नेटबुक की जांच के दौरान बांग्लादेश में मौजूद एक आईएसआई एजेंट पवेल की जानकारी भी हासिल की है। वहाब आलम को बांग्लादेश भागने के बाद इसी पवेल से मिलना था। सूत्रों ने बताया कि पवेल अभी बांग्लादेश के जेसोर में सक्रिय है। उसे वहाब आलम आलम के लिए बांग्लादेश में कुछ समय के लिए सुरक्षित ठिकाना तय करना था। इसके बाद उसे पश्चिम बंगाल में मिलने वाले नए काम की जानकारी देनी थी और फिर कुछ समय बाद उसे वापस राज्य में भेजना था।
पाक आर्मी में जाना चाहता था राणा रऊफ, नेपाल में की शादी: सूत्रों ने बताया है कि राणा रऊफ पाकिस्तान आर्मी में शामिल होना चाहता था। खबर है कि उसने 2004 में सलेक्शन प्रोसेस पास कर लिया था, लेकिन मेडिकल एग्जाम में फेल हो गया था. 2012 में, रऊफ नेपाल गया, जहां उसने शीलू नाम की एक महिला से शादी की. सूत्रों के मुताबिक, इसी समय के आसपास वह पाकिस्तान की इंटेलिजेंस एजेंसी ISI के संपर्क में आया। भारतीय पहचान पत्र पाने के लिए सह-आरोपी के पिता का नाम किया इस्तेमाल:
पाकिस्तानी नागरिक राणा रऊफ को लेकर स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की जांच में पता चला है कि उसने भारतीय पहचान-पत्र हासिल करने के लिए सह-आरोपी मोहम्मद इजाज के पिता के नाम का इस्तेमाल किया था। सूत्रों के मुताबिक, 2012 में गैरकानूनी तरीके से भारत में घुसने के बाद राणा रऊफ न सिर्फ पूर्वी कोलकाता के टोपसिया में इजाज के घर पर लंबे समय तक रहा, बल्कि उसने अपने लिए भारतीय पहचान पत्र बनवाने के लिए इजाज के पिता के दस्तावेजों का भी इस्तेमाल किया।आईएसआई के लिए जासूसी का जिम्मा
जांच में सामने आया है कि राणा रऊफ को पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) ने भारत के पूर्वी सेक्टर में भारतीय सेना, नौसेना और रेलवे के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने का काम सौंपा था. वह सबसे पहले 2012 में नेपाल के रास्ते ही भारत में दाखिल हुआ था, जहां एक मस्जिद में उसकी मुलाकात सह-आरोपी इजाज से हुई थी.
सिम कार्ड का इस्तेमाल और साक्ष्य मिटाने का तरीका
जांच से यह भी पता चला है कि राणा रऊफ ने कई प्रीपेड मोबाइल सिम कार्ड का इस्तेमाल किया, जो उसने अपने इन्हीं फर्जी पहचान दस्तावेजों के जरिए हासिल किए थे. वह इन सिम कार्ड्स का इस्तेमाल पाकिस्तान में मौजूद अपने आईएसआई हैंडलर्स के संपर्क में रहने के लिए करता था. हैंडलर्स से बातचीत के बाद उन सिम कार्ड्स को नष्ट कर दिया जाता था और आगे के काम के लिए नए सिम कार्ड ले लिए जाते थे।
एसआईआर से नाम कटने के बाद भागा: वहाब आलम ने माना कि इस साल की शुरुआत में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले हुए एसआईआर के बाद उसका नाम मतदाता सूची से हट गया था। इसके बाद वह और पाकिस्तान में बैठे उसके आका सतर्क हो गए थे। उसके आकाओं ने उसे सलाह दी कि वह टॉपसिया को छोड़ दे, जहां वह पहले मतदाता के रूप में दर्ज था। इसके बाद भारत-बांग्लादेश से लगने वाले पश्चिम बंगाल के किसी सीमावर्ती जिले में कुछ समय छिपकर रहे और मौका मिलते ही बांग्लादेश भाग जाए।इसी योजना के तहत उसने उत्तर 24 परगना जिले के हाबरा में शरण लेने का फैसला किया। एसटीएफ के जवानों ने उसे यहीं से गिरफ्तार किया। वहाब आलम से पूछताछ के आधार पर एसटीएफ ने टॉपसिया में उसके स्थानीय सहयोगी मोहम्मद इजाज को भी गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि वहाब आलम टॉपसिया में मोहम्मद इजाज के घर किरायेदार के रूप में रहता था। इजाज ने ही आलम के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और आखिर में वोटर कार्ड जैसे नकली भारतीय पहचान पत्र बनवाने में मदद की थी। वहाब आलम 2012 में भारत-नेपाल सीमा के रास्ते भारत में दाखिल हुआ था। इसके बाद से वह राज्य के अलग-अलग इलाकों में अपना ठिकाना बदल-बदलकर रह रहा था।
#ISI
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