- पाकिस्तानी ISI जासूस को कोलकाता के कारपेंटर ने की थी मदद
- बांग्लादेश और नेपाल इन दिनों बना प्लानिंग का सबसे बड़ा अड्डा
अशोक झा/ कोलकाता: पश्चिम बंगाल STF ने भारत-बांग्लादेश बॉर्डर से संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकी को गिरफ्तार किया। उसके पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) से संबंध हैं। एसटीएफ ने रऊफ के इंडियन कनेक्शन मोहम्मद इजाज को भी कोलकाता के टोपसिया से गिरफ्तार किया गया था। इजाज ने ही रऊफ को भारतीय आईडी कार्ड हासिल करने में मदद की थी। कोलकाता के कारपेंटर ने बनवाए फर्जी दस्तावेज: रऊफ ने बताया कि कोलकाता के टॉपसिया इलाके में रहने वाले एक कारपेंटर ने उसके लिए फर्जी भारतीय दस्तावेज बनवाए। इनमें वोटर कार्ड और आधार कार्ड शामिल हैं। रऊफ और कारपेंटर नेपाल में मिले थे।।नेपाल बॉर्डर के जरिए भारत में घुसपैठ क्यों आसान है: भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा (ओपन बॉर्डर) की व्यवस्था ब्रिटिश शासन की विरासत है, जिसे 1950 की 'भारत-नेपाल शांति और मैत्री संधि' के माध्यम से औपचारिक रूप दिया गया था। इस संधि का उद्देश्य दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करना था। संधि के प्रावधानों के तहत, दोनों देशों के नागरिकों को एक-दूसरे के क्षेत्र में बिना वीजा या पासपोर्ट के आने-जाने, रहने, संपत्ति खरीदने और काम करने की स्वतंत्रता दी गई है। आतंकी जासूसी और आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा है। STF सूत्रों के अनुसार आतंकी की पहचान राना रऊफ के रूप में हुई है। भारत में वहाब आलम के नाम से रह रहा था। बांग्लादेश भागने की कोशिश में था। उसे 24 परगना जिले के बनगांव से गिरफ्तार किया गया। 2012 में नेपाल के रास्ते भारत आया था: रऊफ 2012 से ही पश्चिम बंगाल में फर्जी पहचान से रह रहा था। STF सूत्रों के अनुसार, रऊफ मूल रूप से पाकिस्तान के फैसलाबाद का रहने वाला है। वह 2012 में नेपाल के रास्ते भारत आया था। इसके बाद से पश्चिम बंगाल में रहने लगा। शुरुआती जांच में उसके वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी पाकिस्तान भेजने की बात सामने आई है। STF ने मंगलवार रात टोपसिया से एक व्यक्ति को गिरफ्तार है, उसका रऊफ से सीधा संपर्क था और उसने कई तरह से उसकी मदद की थी; हालांकि, उन्होंने उसकी पहचान का खुलासा नहीं किया। वही दूसरी ओर राजस्थान में सुभाष चंदर पुत्र गोविंद राम कैंप की दीवार फांदकर अंदर जाने की कोशिश कर रहा था। ड्यूटी पर तैनात जवानों ने उसे तुरंत पकड़ लिया। इसके बाद उसका रायसिंहनगर सीएचसी में मेडिकल कराया गया और आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया गया। BSF की रिपोर्ट के आधार पर रायसिंहनगर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।आरोपी के मोबाइल फोन और कॉल डिटेल्स की प्रारंभिक जांच में उसके पाकिस्तान के कंट्री कोड +92 वाले कई मोबाइल नंबरों के संपर्क में होने की जानकारी सामने आई है। जांच में इन नंबरों पर कई बार कॉल और मैसेज किए जाने के रिकॉर्ड मिले हैं। इन संपर्कों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां मामले को गंभीरता से ले रही हैं। आर्मी इंटेलिजेंस से जुड़े सूत्रों के अनुसार, आशंका जताई जा रही है कि आरोपी BSF कैंप में प्रवेश कर सैन्य गतिविधियों से जुड़ी जानकारी या तस्वीरें हासिल कर उन्हें पाकिस्तान भेजने की कोशिश कर सकता था। हालांकि, जवानों की सतर्कता के कारण वह कैंप के अंदर दाखिल होने में सफल नहीं हो सका।
स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही हाई अलर्ट पर हैं। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे श्रीगंगानगर जिले में संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। कैंप में घुसने की कोशिश और पाकिस्तानी नंबरों से संपर्क की जानकारी सामने आने के बाद सभी संबंधित एजेंसियां मामले की गहराई से जांच कर रही हैं।
बंगाल में पिछले दो दशक से पांव जमाने में लगा है राष्ट्रद्रोही:
पिछले दो दशकों से पश्चिम बंगाल में जिहादी और कट्टरवादी ताकतों की वृद्धि हुई है। हर बीतते दिन के साथ ये ताकतें मजबूत होती जा रही हैं। दक्षिण पूर्व एशिया को लेकर हाल में जो एक रिपोर्ट प्रकाशित किया गया है वह बहुत ही चिंताजनक है। बांग्लादेश सरकार ने भी भारत के गृहमंत्री को जो रिपोर्ट भेजी है उससे साफ जाहिर होता है कि बांग्लादेश और म्यांमार के आतंकी मॉड्यूल के लिए पश्चिम बंगाल स्वर्ग के समान है। दरअसल म्यांमार और बांग्लादेश में इन जिहादी-कट्टरवादी ताकतों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है, लेकिन पश्चिम बंगाल में इन्हें संरक्षण दिया जा रहा है। आज यह शुभेंदु अधिकारी सरकार के लिए चुनौती बन रही है।
सीमावर्ती जिलों में घुसपैठ का बड़ा नेटवर्क: पश्चिम बंगाल की सीमा बांग्लादेश से करीब 2200 किलोमीटर तक जुड़ी हुई है। यह जिहादी आतंकियों के लिए सेफ रूट बन गया है। जिहादी संगठन अल इस्लामी यानी हूजी और जमात उल मुजाहिदीन यानी जेएमबी ने यहां गहरे तक पैठ बना लिया है। पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों की अधिक आबादी इन्हें छिपने में सहायक होती है और सरकार की तरफ से इन ताकतों को संरक्षण दिया जा रहा है। रिपोर्ट कहती है कि कोलकाता के रास्ते ये आतंकी देश के कोने-कोने तक पहुंच चुके हैं।
त्रिपुरा, असम में भी बढ़ता जा रहा है जिहादी खतरा
खुफिया सूत्रों के अनुसार हूजी और जेएमबी के 2010 आतंकी भारत में हैं। माना जा रहा है कि सिर्फ बंगाल बॉर्डर के जरिये ही कम से कम 720 आतंकियों ने देश में प्रवेश किया है। हालांकि ममता के शासनकाल में बंगाल सरकार तथ्यों को छिपाना चाहती है, बावजूद राज्य सरकार की रिपोर्ट के अनुसार 2014 में 800 और 2015 में 659 आतंकियों ने बंगाल की सीमा में प्रवेश किया है। ये सिर्फ बंगाल में ही नहीं बल्कि असम और त्रिपुरा में भी संरक्षण पा रहे हैं। एनआइए ने 2014 में पश्चिम बंगाल के बर्दवान जिले में जेएमबी के ऑपरेटिव्स का खुलासा किया था और वहां से आरडीएक्स, घड़ियां और सिम कार्ड सहित कई विस्फोट सामग्रियां पकड़ी थीं।
ममता सरकार पर आतंकियों के आधार कार्ड बनवाने के आरोप: 11 अगस्त को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से गिरफ्तार संदिग्ध बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्लाह अल मामून ने यूपी एटीएस की पूछताछ में अहम खुलासा करते हुए बताया था कि कैसे भारत में आतंकियों की खेप सीमा पार से पहुंचती है और चंद रुपयों में इनका पहचान पत्र भी बन जाती है। कोलकाता पुलिस ने मार्च में एक और संदिग्ध इदरिश अलिवास को गिरफ्तार किया था जो शहर के बड़ा बाजार इलाके से पकड़ाया था, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि ममता सरकार इसे राजनीति के चश्मे से देखती रही। राज्य सरकार पूरी तरह से देश की सुरक्षा की अनदेखी कर रही है। सवाल यह है कि बांग्लादेश की यह रिपोर्ट ममता की आंख खोलेगी? वह देश हित में कुछ कदम उठाएंगी?
ममता राज में 8000 गांवों में एक भी हिंदू नहीं
ममता राज में इन जिहादी ताकतों को संरक्षण देने के कारण सामाजिक सद्भाव बिगड़ गए हैं। स्थिति यह है कि जहां भी मुस्लिम जनसंख्या औसत से थोड़ा भी अधिक होता है जिहादी-कटरपंथी ताकतें हिंदुओं के साथ अत्याचार करने लगते हैं। ममता सरकार की नीति के कारण राज्य में अलार्मिंग परिस्थिति उत्पन्न हो गई थी जो आज भी है। प. बंगाल के 38,000 गांवों में 8000 गांव अब इस स्थिति में हैं कि वहां एक भी हिन्दू नहीं रहता, या यूं कहना चाहिए कि उन्हें वहां से भगा दिया गया है। बंगाल के तीन जिले जहां पर मुस्लिमों की जनसंख्या बहुमत में हैं, वे जिले हैं मुर्शिदाबाद जहां 47 लाख मुस्लिम और 23 लाख हिन्दू, मालदा 20 लाख मुस्लिम और 19 लाख हिन्दू, और उत्तरी दिनाजपुर 15 लाख मुस्लिम और 14 लाख हिन्दू। दरअसल बांग्लादेश से आए घुसपैठिए प. बंगाल के सीमावर्ती जिलों के मुसलमानों से हाथ मिलाकर गांवों से हिन्दुओं को भगा रहे हैं और हिन्दू डर के मारे अपना घर-बार छोड़कर शहरों में आकर बस रहे हैं। एसआईआर के बाद लाखों लोग पलायन किए है अभी और की तथ्यों के आधार पर तलाश जारी है।
#ISI #Nepal #Pakistan
दुनियाभर के घुमक्कड़ पत्रकारों का एक मंच है,आप विश्व की तमाम घटनाओं को कवरेज करने वाले खबरनवीसों के अनुभव को पढ़ सकेंगे
https://www.roamingjournalist.com/