-मित्र देश के लिए भारत का एक ही स्वर मदद, मदद और सिर्फ मदद
नेपाल बोर्डर से अशोक झा: तिब्बत की ओर से अचानक आई भीषण बाढ़ ने नेपाल के रसुवा जिले के टिमुरे बाजार क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। लेन्दे खोला (भोटेकोशी) में आई बाढ़ से रसुवा सीमा नाके पर बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है।सैकड़ों लोगों की मौत हो गई है तो हजारों लापता।इसमें 500से अधिक भारतीय है।पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में किस नदी ने मचाई है तबाही: नेपाल में तबाही मचाने वाली नदी भोटेकोशी नदी है। इस नदी में आई भीषण बाढ़ की वजह से नेपाल में भयंकर तबाही मची है। अचानक आई इस बाढ़ की वजह से कई मकान, दुकान और ऑफिस बाढ़ के पानी में बह गए हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में जान-माल का नुकसान हुआ है। नेपाल में क्यों आई है बाढ़: नेपाल में आई बाढ़ के कारण पर गौर करें, तो तिब्बत के हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर फट गया है और हिमस्खलन के कारण ल्हेंदे नदी का पानी रुक गया था, जिसका बांध अचानक टूटा और बिना बारिश के ही भोटेकोशी नदी में भीषण बाढ़ आ गई।भारत से क्या है कनेक्शन: अब हम भोटेकोशी नदी के भारत के कनेक्शन के बारे में जान लेते हैं। यह नदी नेपाल में बहते हुए आगे चलकर सुनकोशी नदी में मिलती है। सुनकोशी अन्य सहायक नदियों जैसे- अरुण व तामुर आदि के साथ मिलकर सप्तकोशी नदी यानि कोसी नदी का निर्माण करती है, जो कि आगे चलकर भारत के बिहार राज्य में प्रवेश कर गंगा नदी में मिलती है। बिहार राज्य में हाई अलर्ट: कोसी नदी को बिहार का शोक कहा जाता है। क्योंकि, यह नदी हर साल अपना रास्ता बदलकर बिहार में बाढ़ का कारण बनती है। इसे देखते हुए बिहार राज्य को हाई अलर्ट पर रखा गया है।।अधिकारियों के अनुसार, टिमुरे सहित आसपास के दो बाजार बाढ़ से पूरी तरह तहस-नहस हो गए हैं। विनाशकारी बाढ़ में 46 लोगों की मौत हो गई है। इस तबाही के मंजर में 1000 लोगों के बहने की भी आशंका है। हालांकि, अभी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। पीएम बालेंद्र शाह ने बुलाई आपात बैठक
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने नेपाल में अचानक आई बाढ़ से हुए भारी तबाही के बीच राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन की आपात बैठक बुलाई है। उनके सलाहकार असीम शाह ने बताया कि प्रधानमंत्री शाह सीधे ही प्रभावित क्षेत्रों के प्रमुख जिलाधिकारियों से संपर्क में हैं और हर पल की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।बाजार और कस्टम कार्यालय क्षेत्र को पहुंचाया नुकसान:
रसुवा के सहायक प्रमुख जिला अधिकारी ध्रुव प्रसाद अधिकारी के अनुसार, बाढ़ ने बाजार और कस्टम कार्यालय क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने बताया कि रसुवा भन्सार क्षेत्र में बड़ी संख्या में वाहन और अन्य सामान मौजूद थे, जो बाढ़ में बह गए। पिछले साल की बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुए स्थान पर हाल ही में बनाया गया नया पुल भी इस बाढ़ में बह गया है।
बुधवार सुबह करीब 9 बजे आई बाढ़: जिला पुलिस कार्यालय रसुवा के अनुसार, बुधवार सुबह करीब 9 बजे अचानक आई भीषण बाढ़ से टिमुरे बाजार की बस्ती प्रभावित हुई। रसुवा के प्रमुख जिला अधिकारी नरेन्द्र परियार ने कहा कि अचानक आई बाढ़ से निचले तटीय क्षेत्र में जलविद्युत परियोजनाओं के बह जाने और बस्तियों में बाढ़ का पानी घुसने की भी खबर मिली है।नेपाल में तबाही का मंजर,सैकड़ों मौतें और भारी तबाही
तिब्बत के ऊपरी इलाकों से आए अचानक पानी के तेज बहाव ने नेपाल में त्रिशूली और भोटेकोशी नदियों के जलस्तर को खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंचा दिया। इस भीषण आपदा में 55 से अधिक लोगों की दुखद मौत हो चुकी है, जबकि 400 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। आपदा की विभीषिका को देखते हुए नेपाल सरकार ने भारत और चीन से तुरंत मानवीय सहायता की मांग की है। नेपाल के प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन और सेना बड़े पैमाने पर बचाव कार्य में जुटी है।
भारत में राहत सामग्री और NDRF हाई अलर्ट पर: नेपाल में आई आपदा पर भारत ने तुरंत संज्ञान लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात कर शोक व्यक्त किया और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। भारत की ओर से नेपाल में लगभग 30 टन राहत सामग्री भेजी जा रही है। भारतीय वायुसेना ने अपने C-17, C-130J और C-295 जैसे परिवहन विमानों को स्टैंडबाय पर रखा है ताकि बिना किसी देरी के राहत सामग्री नेपाल पहुंचाई जा सके। आपदा की गंभीरता को देखते हुए भारत ने NDRF की कई टुकड़ियों को हाई अलर्ट पर रखा है। उत्तर प्रदेश और बिहार में क्यों बढ़ी टेंशन?: नेपाल की अधिकांश नदियां आगे चलकर भारत के मैदानी इलाकों में प्रवेश करती हैं। तिब्बत और नेपाल से आ रहा यह अतिरिक्त जलप्रवाह अब भारतीय सीमाओं की ओर बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश और बिहार के बड़े हिस्से नेपाल से आने वाली नदियों के जलभराव क्षेत्र में आते हैं। यदि नेपाल में पानी का दबाव इसी तरह बना रहा या ऊपरी हिस्सों में मलबा टूटने से पानी का तेज बहाव आया, तो भारत के सीमावर्ती जिलों में भीषण बाढ़ आ सकती है।15 पनबिजली परियोजनाएं प्रभावित, निचले इलाकों में खतरा
नेपाल के इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के मुताबिक, शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि बाढ़ से 15 पनबिजली परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। इनमें 10 परियोजनाएं चालू हैं, जबकि पांच निर्माणाधीन हैं।
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि बाढ़ का पानी निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। भोटेकोशी नदी आगे त्रिशूली नदी में मिलती है और नुवाकोट तथा मध्य नेपाल के अन्य जिलों की ओर बढ़ती है।
तिब्बत में ग्लेशियल झील फटने की आशंका
हाइड्रोलॉजी विशेषज्ञों ने संभावना जताई है कि नेपाल में आई यह अचानक बाढ़ भारी बारिश की वजह से नहीं, बल्कि तिब्बत में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) के कारण आई हो सकती है। हालांकि, बाढ़ के अचानक बढ़ने की सही वजह अभी स्पष्ट नहीं है।
हाइड्रोलॉजी और मौसम विज्ञान विभाग तथा स्थानीय अधिकारी चीनी अधिकारियों के साथ मिलकर पानी के अचानक बढ़ने के कारण का पता लगाने में जुटे हैं। इसके लिए सैटेलाइट से मिली जानकारी का भी अध्ययन किया जा रहा है।
5 जिलों में हाई-अलर्ट, लोगों को सुरक्षित जगह जाने की सलाह
रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा और चितवन जिलों में नदी किनारे बसे उन इलाकों के लिए हाई-अलर्ट जारी किया गया है, जहां बाढ़ का खतरा है।
निचले इलाकों और नदी के किनारे रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। अधिकारियों ने लोगों से पृथ्वी हाईवे और नदी किनारे वाले अन्य रास्तों पर अनावश्यक यात्रा से बचने को कहा है। बचाव और आपातकालीन दलों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला स्तर के आपदा प्रबंधन अधिकारी प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्यों के बीच समन्वय कर रहे हैं। साथ ही, आपातकालीन संसाधनों को भी जुटाया जा रहा है।
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