- भौगोलिक स्थिति के कारण लगातार भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ के खतरे
नेपाल बोर्डर से अशोक झा: तिब्बत में ग्लेशियर फटने की वजह से भोटे कोशी नदी में अचानक पानी का लेवल बढ़ गया जिसने आसपास बसे इलाकों में सड़कें, पुल, मकान और बिजली परियोजनाओं को तहस-नहस कर दिया। नेपाल का रसुवा जिला अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण लगातार भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ के खतरे में रहता है। यहां के पहाड़ों की ढलान 30 डिग्री से अधिक है, जिससे पानी बहुत तेज रफ्तार से संकरी घाटियों में नीचे गिरता है। इलाके की भूगर्भीय बनावट काफी कमजोर है, जो बारिश या भूकंप के दौरान तुरंत खिसक जाती है। बाढ़ की वजह से मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, आशंका जताई जा रही है कि इस त्रासदी की चपेट में कई लोग आए हैं।अलग-अलग इलाकों से बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबर है।राहत और बचाव अभियान जारी है और प्रशासन को आशंका है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। भारत के बिहार और पूर्वी यूपी में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। बंगाल सरकार ने भी हेल्प नंबर जारी किया ह।पीएम मोदी ने खुद नेपाल के प्रधानमंत्री से फोन पर बात की और हालात का जायज़ा लिया।बाढ़ का सबसे ज्यादा असर नेपाल के रासुवा जिले में देखने को मिला है।तिब्बत की सीमा से लगे टिमुरे और स्याफ्रुबेंसी इलाके में पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।कई वाहन, सामान और इमारतें पानी में बह गईं. नदी पर बना एक हाल में तैयार पुल भी बाढ़ की चपेट में आ गया. रासुवा के अलावा नुवाकोट और धादिंग जिलों में भी बाढ़ का असर पहुंचा है।बाढ़ से सड़क, पुल, घर और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के भी लापता होने की सूचना है, जिनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने नेपाल में बाढ़ से प्रभावित राज्य के निवासियों और उनके परिवारों की सहायता के लिए हेल्पलाइन शुरू की है। राज्य सरकार की ओर से बताया गया है कि पश्चिम बंगाल पुलिस मुख्यालय, भवानी भवन में यह हेल्पलाइन संचालित की जा रही है। राज्य सरकार के अनुसार, नेपाल में मौजूद किसी पश्चिम बंगाल निवासी के लापता होने, बाढ़ में फंसने या उनके संबंध में किसी प्रकार की सहायता की आवश्यकता होने पर परिजन हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।सरकार ने इसके लिए (033) 24793311 और 9147890181 नंबर जारी किए हैं। प्रभावित लोगों के परिवारों से अपील की गई है कि वे किसी भी जरूरी सूचना या सहायता के लिए इन नंबरों पर संपर्क करें।
नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ के पीछे हिमखंड और चट्टानों के खिसकने की घटना को संभावित कारण बताया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, 4.4 तीव्रता के भूकंप के बाद बड़े पैमाने पर भूस्खलन और हिमखंड के टूटने से नदी का रास्ता बाधित हुआ और अचानक पानी, मलबे और चट्टानों का तेज बहाव नीचे की ओर आया।
बाढ़ की भयावहता को देखते हुए नेपाल के कई जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। भारत में भी नेपाल से सटे इलाकों को सतर्क किया गया है। भारतीय अधिकारियों की ओर से संभावित जलस्तर बढ़ने और नदियों में उफान की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।पश्चिम बंगाल सरकार की यह हेल्पलाइन खास तौर पर उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके परिजन नेपाल में यात्रा, तीर्थयात्रा, रोजगार या अन्य कारणों से मौजूद हैं और इस प्राकृतिक आपदा के बाद उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि नेपाल के बाढ़ में पश्चिम बंगाल के कितने लोग फंसे हुए हैं। 2015 के भूकंप के बाद नेपाल में यह सबसे भयानक आपदा है, जिसमें क़रीब 9,000 लोगों की जान चली गई थी।
नेपाल-चीन बॉर्डर पर कई निचले ज़िले प्रभावित हुए हैं।अधिकारियों का कहना है कि जान-माल का बहुत नुकसान हुआ है, लेकिन अभी तक कोई साफ़ अनुमान नहीं लगाया गया है।
भोटेकोशी नदी के किनारे रसुवा और नुवाकोट ज़िलों में कई बस्तियाँ सबसे ज़्यादा प्रभावित हुई हैं।यहाँ आबादी कम है, लेकिन उनकी सड़कें नेपाल-चीन व्यापार के लिए एक बड़ी लाइफलाइन का काम करती हैं। इलाके में हाइड्रोपावर, हाईवे और पुलों सहित ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर नष्ट हो गया है।लोकल रहने वाले अजय श्रेष्ठ ने कहा कि "पानी का बहाव इतना तेज़ था कि ऐसा लगा जैसे कोई डैम अचानक टूट गया हो। बाढ़ ने चिलिमे हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट समेत कई हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को नुकसान पहुँचाया है।" नदी के बहाव को देखते हुए, नुवाकोट और धाडिंग ज़िलों के निचले इलाकों में भी बाढ़ का खतरा है। बाढ़ और लैंडस्लाइड की वजह से तिमुरे में फंसे लोगों को बचाने के लिए भेजा गया एल्टीट्यूड एयर का एक हेलीकॉप्टर बिना उतरे ही काठमांडू लौट आया है। पायलट ने कहा, "पानी के तेज़ बहाव में तिमुरे का लोकल हेलीपैड पूरी तरह बह गया, जिससे लैंड करने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं बची। बाढ़ और मलबे की वजह से तिमुरे का पूरा गांव आसमान से लगभग दिखाई नहीं दे रहा था।ICIMOD में क्लाइमेट और एनवायर्नमेंटल रिस्क के प्रमुख कियांगगोंग झांग ने कहा कि पिछले साल की बाढ़ में तबाह हुआ रसुवा का वही इलाका एक बार फिर खतरे की चपेट में आया है। उन्होंने कहा कि लेंडे खोला में बर्फ का हिमस्खलन बाढ़ की संभावित वजह हो सकता है, लेकिन फिलहाल इसे निश्चित कारण नहीं माना जा सकता।तेजी से बढ़ा जलस्तर: ICIMOD ने बाढ़ की असाधारण गति पर भी चिंता जताई है। संस्था के अनुसार, महज 30 मिनट के भीतर त्रिशूली नदी के गलछी क्षेत्र में जलस्तर करीब 9 मीटर और मालेखु में करीब 7 मीटर बढ़ गया। दोनों स्थान धाडिंग जिले में हैं और काठमांडू से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं।।दूसरी बाढ़ की भी चेतावनी जारी: वैज्ञानिक यह भी जांच रहे हैं कि कहीं मलबे ने नदी के किसी संकरे हिस्से को कुछ समय के लिए अवरुद्ध तो नहीं कर दिया था जिस वजह से बाढ़ की स्थिति बन गई। यदि इसके पीछे जमा पानी अचानक बाहर निकलता है, तो इससे दोबारा तेज बाढ़ आने का खतरा पैदा हो सकता है। इसी संभावित खतरे को देखते हुए नेपाल-चीन सीमा के ऊपरी हिस्से में बनी रुकावट पर भी नजर रखी जा रही है। नेपाल के लिए चिंता वाली बात यह भी है कि अधिकारियों ने दूसरी बाढ़ की आशंका को लेकर चेतावनी दी है और जिलोंग पोर्ट को खाली कराने के आदेश दिए गए हैं।
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