- रेड-ईयर्ड स्लाइडर मूल रूप से उत्तरी अमेरिका का कछुआ,दुनिया की सबसे ज्यादा फैलने वाली बाहरी (इनवेसिव) प्रजातियों में शामिल
अशोक झा/ कोलकाता:
707 जिंदा कछुए! इंसानों में मरती इंसानियत का एक और सबूत सामने आया है। जब कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय (NSCBI) एयरपोर्ट पर कस्टम अधिकारियों ने वन्यजीव तस्करी के एक बड़े मामले का खुलासा किया है। 22 जुलाई 2026 को AIU ने एयरपोर्ट पर एक यात्री के चेक-इन बैग की जांच की। जांच के दौरान बैग से 707 जिंदा रेड -ईयर्ड स्लाइडर कछुए मिले। कस्टम्स ने सभी कछुओं को जब्त कर लिया। मामले में आगे की जांच जारी है।
क्या है रेड-ईयर्ड स्लाइडर?: रेड-ईयर्ड स्लाइडर मूल रूप से उत्तरी अमेरिका का कछुआ है। इसे दुनिया की सबसे ज्यादा फैलने वाली बाहरी (इनवेसिव) प्रजातियों में माना जाता है। कई लोग इसे पालतू जानवर के रूप में रखते हैं, लेकिन बाद में छोड़ देने पर यह स्थानीय जलाशयों में फैल जाता है। इससे देशी कछुओं और दूसरे जलीय जीवों के भोजन और रहने की जगह पर असर पड़ता है। CITES एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसका उद्देश्य वन्यजीवों और पौधों के अवैध अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर रोक लगाना है। कस्टम्स के अनुसार इस मामले में कस्टम्स एक्ट, वन्यजीव संरक्षण कानून और CITES के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है। अब अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि इन कछुओं को कहां से लाया गया था और इन्हें कहां पहुंचाया जाना था। भारत समेत दुनियाभर में कछुओं की तस्करी की जाती है, जिसके बाद इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जाता है. जहां इन कछुओं का बेचने पर लाखों रुपये मिलते हैं. इनमें कुछ कछुए ऐसे भी होते हैं, जिनकी बाजार में डिमांड और रेट दोनों ही ज्यादा है. इनमें स्टार कछुआ प्रमुख है, स्टार कछुए की पीठ पर पीले और काले रंग के चकत्ते की तरह खूबरसूरत आकृति बनी है. दरअसल ये दिखने में एक पिरामिड की तरह लगती है। कछुओं को रखना कानून जुर्म
बता दें कि वन्य जीवसंरक्षण अधिनियम 1972 में भारतीय जीव जंतु की तस्करी और उन्हें रखना अपराध है। बता दें कि कहीं पर भी वन्य जीव की तस्करी खरीद फरोख्त की जाने की सूचना मिलने पर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की धारा 9 ( 44 )के तहत अपराध दर्ज किया जाता है। इसमें सजा का भी प्रावधान है। इसी तरह अंतरराष्ट्रीय साईटिस कन्वेंशन ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ऑफ इन डेंजर स्पीशीज ऑफ फ्लोरा एंड फोना के तहत भी किसी जीव-जंतु की खरीद-फरोख्त पर रोक है। विदेशी जीव-जंतु के यहां आने से स्थानीय जीव-जंतु पर खतरा हो सकता है.कछुआ को पकड़ने पर सात साल की सजा हो सकती है। क्यों होती है कछुओं की तस्करी: अब सवाल ये है कि आखिर दुनियाभर में कछुओं की तस्करी क्यों होती है. बता दें कि कछुओं की तस्करी के पीछे उनसे बनने वाली दवाईयां और धार्मिक कारण के लिए घर में रखना भी एक वजह है. इनमें कुछ प्रजाति के कछुओं की डिमांड ज्यादा होती है। जैसे दक्षिण पूर्वी एशिया समेत कई जगहों पर लोग यह मानते हैं कि स्टार कछुए भाग्य के संकेत होते हैं। लोगों का मानना है कि इन्हें पालने से भाग्य बदल जाता है. ये भी एक कारण है कि लोगों द्वारा इन्हें घरों में पालने की मांग बढ़ती जा रही है। दवाई बनाने के लिए कछुए का इस्तेमाल: स्टार कछुओं से यौनशक्ति बढ़ाने वाली दवाओं का निर्माण भी किया जाता है। जिसके कारण इनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी मांग होती है। दवाई में इस्तेमाल होने के कारण दुनियाभर में कछुए की तस्करी होती है।
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