- आरोप पत्र में खोले सभी के काले चिट्ठे, लोगों के बीच खौफ पैदा करते थे सभी
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली में महिलाओं पर अत्याचार और जमीनों पर अवैध कब्जे के मुख्य आरोपी शेख शाहजहां की मुश्किलें अब और बढ़ गयी हैं।कोलकाता की विशेष पीएमएलए (PMLA) अदालत ने शेख शाहजहां, उसके भाई शेख आलमगीर और उसके 2 बेहद खास सहयोगियों के खिलाफ धन शोधन (मनी लाउंडरिंग) केस में आरोप तय कर दिये हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को इस बड़े कानूनी एक्शन की आधिकारिक जानकारी साझा की.
जेल में बंद हैं सभी 4 आरोपी: केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी (ED) के आधिकारिक बयान के अनुसार, कोलकाता की विशेष अदालत ने 15 जून को ही इन सभी आरोपितों के खिलाफ पीएमएलए की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय करने का ऐतिहासिक आदेश दिया था. जिन लोगों के खिलाफ कोर्ट ने कानूनी शिकंजा कसा है, उनमें शेख शाहजहां, शेख आलमगीर, शिव प्रसाद हाजरा उर्फ शिबू हाजरा और दीदार बक्श मोल्ला शामिल हैं. ये सभी न्यायिक हिरासत के तहत जेल में बंद हैं।
4 आरोपी और उन पर लगे आरोप:
शेख शाहजहां : संदेशखाली का पूर्व टीएमसी क्षत्रप और मुख्य साजिशकर्ता।
शेख आलमगीर : शेख शाहजहां का भाई और आपराधिक गतिविधियों का साझीदार।
शिव प्रसाद हाजरा उर्फ शिबू हाजरा : शाहजहां का बेहद खास और संदेशखाली में आतंक का दूसरा नाम।
दीदार बक्श मोल्ला : शाहजहां के सिंडिकेट और वित्तीय हेरफेर को संभालने वाला करीबी सहयोगी।
मई 2024 में ईडी ने दाखिल की थी चार्जशीट:
ईडी ने 27 मई 2024 को इन चारों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की कड़ी धाराओं के तहत पहली मुख्य चार्जशीट (आरोपपत्र) दाखिल की थी।इसके बाद, कोर्ट ने 3 जून 2024 को इस पर संज्ञान लिया। अब कोर्ट ने औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिया है। अब इन सभी के खिलाफ मुकदमा (Trial) तेजी से आगे बढ़ेगा, जिससे इनकी जमानत मिलने की उम्मीदें लगभग खत्म हो गयी हैं।
धमकी, मर्डर और जमीन कब्जाने की काली कमाई का हुआ भंडाफोड़
शेख शाहजहां और उसके गुर्गों के खिलाफ ईडी का यह मनी लाउंडरिंग केस पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज की गयी कई प्राथमिकियों (FIR) के आधार पर शुरू हुआ था. जांचकर्ताओं के मुताबिक, शाहजहां ने संदेशखाली और आसपास के इलाकों में गरीब आदिवासियों की जमीनों पर कब्जा करके, लोगों को जान से मारने की धमकी देकर, हत्या के प्रयास और बड़े पैमाने पर रंगदारी वसूल कर करोड़ों रुपए का काला साम्राज्य खड़ा किया था. इस काली कमाई को वैध बनाने के लिए पैसे को अलग-अलग व्यापार और शेल कंपनियों में रूट किया गया था।
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