ममता बनर्जी की पीएसओ को हटाने पर राजनीतिक बवाल
जून 18, 2026
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अशोक झा/ कोलकाता: बंगाल की राजनीति में पहले टीएमसी की टूटने की खबर सामने आई। फिर अब ममता बनर्जी की सुरक्षा को लेकर एक खबर सामने आई है। जिसने बंगाल की राजनीति में एक और तड़का लगा दिया है। इस मामले को उठाया है टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन ने उन्होंने एक वीडियो भी शेयर किया जिसमें वह दावा कर रहे हैं कि ममता की सुरक्षा को लेकर सरकार बिल्कुल सावधान नहीं है। इसलिए वह खुद अपनी गाड़ी घर के मुख्य गेट के सामने खड़ी कर दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि स्वरूप गोस्वामी और कुसुम कुमार द्विवेदी को भी अचानक हटा दिया गया। तो जानते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी।
ममता बनर्जी की पीएसओ को हटाने पर बवाल
पश्चिम बंगाल की राजनीति में दो सुरक्षाकर्मी स्वरूप गोस्वामी और कुसुम कुमार द्विवेदी जिन्हें उनकी अलग जगह पोस्टिंग कर दी गई है तो ममता बनर्जी नाराज हो गई हैं। खबर है कि ममता बनर्जी ने इन दोनों को हटाने के सरकारी आदेश पर अपनी नाराजगी जताई है और उन्हें ही अपनी सुरक्षा में रखने की जिद ठान ली है।
कौन हैं स्वरूप गोस्वामी और कुसुम कुमार द्विवेदी?
मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, स्वरूप गोस्वामी और कुसुम कुमार द्विवेदी कोई आम सुरक्षाकर्मी नहीं हैं। ये दोनों पिछले 20 सालों से ममता बनर्जी के पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) के तौर पर काम कर रहे हैं। इन दो दशकों में उन्होंने ममता बनर्जी की हर छोटी-बड़ी सुरक्षा जरूरतों को बारीकी से समझा है। टीएमसी सूत्रों का मानना है कि इतने लंबे समय तक साथ रहने के कारण ममता बनर्जी का इन पर भरोसा काफी गहरा है।वे इन्हें केवल सुरक्षाकर्मी नहीं, बल्कि अपने भरोसे का एक मजबूत स्तंभ मानती हैं।
प्रशासनिक नियम बनाम निजी पसंद: दूसरी तरफ राज्य सचिवालय का पक्ष बिल्कुल अलग है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि स्वरूप और कुसुम का हटाया जाना कोई राजनीतिक साजिश नहीं, बल्कि एक सामान्य सरकारी प्रक्रिया है। नियमों के मुताबिक, ड्यूटी रोस्टर के अनुसार पीएसओ और सुरक्षा अधिकारियों का तबादला किया जाता है। प्रशासन का स्पष्ट मानना है कि सरकार किसी भी अधिकारी या सुरक्षाकर्मी की नियुक्ति 'पसंद' या 'नापसंद' के आधार पर नहीं कर सकती. उन्हें सरकार के नियमों का पालन करना ही होगा।
क्या सुलझेगा यह नया विवाद?: अभी स्थिति यह है कि ममता बनर्जी अपनी जिद पर अड़ी हैं, जबकि राज्य सचिवालय अपने प्रशासनिक स्टैंड से पीछे हटने को तैयार नहीं है। प्रशासन का दावा है कि ममता बनर्जी को 'Z+' कैटेगरी की सुरक्षा मिल रही है और उसमें कोई कमी नहीं है। हालांकि, ममता की नाराजगी और पुराने पीएसओ के लिए उनकी बेचैनी ने इस पूरे मुद्दे को सियासी रंग दे दिया है। अब सबको देखना यह होगा कि क्या सरकार ममता बनर्जी की पसंद को प्राथमिकता देती है या फिर प्रशासनिक नियमों का ही सख्ती से पालन होता है।
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