बंगाल स्थापना दिवस पर लोगों को करेंगे संबोधित, लोगों में उत्साह
- तारकेश्वर में ही डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में बंगीय हिंदू महासभा की हुई थी तीन दिवसीय बैठक
अशोक झा/कोलकाता: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 20 जून को प्रस्तावित यात्रा से पहले पश्चिम बंगाल के प्रतिष्ठित 18 वीं शताब्दी के तारकेश्वर शिव मंदिर को भगवा रंग से रंगा जा रहा है। इस अवसर पर पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस समारोह भी आयोजित किया जाएगा। मोदी 20 जून को मंदिर के गर्भगृह में पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद वह हुगली जिले के इस ग्रामीण क्षेत्र में जनसभा को संबोधित करेंगे। राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के पिछले महीने सत्ता संभालने के बाद यह उनकी पहली पश्चिम बंगाल यात्रा होगी।
सीएम शुभेंदु ने की थी घोषणा: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दो जून को मंदिर का दौरा करने के दौरान घोषणा की थी कि नई पश्चिम बंगाल सरकार मंदिर के रंग में बदलाव करेगी। उन्होंने भगवा रंग को आध्यात्मिकता का प्रतीक बताया था। पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस शासन के दौरान मंदिर को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पहचान माने जाने वाले नीले और सफेद रंग से रंगा गया था। तारकेश्वर मंदिर प्राधिकरण के प्रमुख दंडीस्वामी सुरेश्वर आश्रम ने प्रधानमंत्री की प्रस्तावित यात्रा पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहाकि मंदिर के विकास, सौंदर्यीकरण और भगवा रंग के साथ नए स्वरूप की पहल भाजपा नीत सरकार का सराहनीय कदम है।
मरम्मत और सफाई का चल रहा काम: मंदिर परिसर में इन दिनों मरम्मत और सफाई का कार्य चल रहा है तथा श्रमिक दीवारों और सीमावर्ती हिस्सों की रंगाई में व्यस्त हैं। दूधपुकुर सरोवर, जहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना से पहले पवित्र स्नान करते हैं, उसकी चारदीवारी को भी सफेद रंग के साथ भगवा आभा दी जा रही है। पुरसुरा के विधायक बिमान घोष ने कहा कि प्रधानमंत्री और राज्य सरकार ने इस तीर्थस्थल के विकास के लिए कई योजनाएं बनाई हैं। इनमें रेल संपर्क में सुधार, एक्सप्रेस ट्रेनों की शुरुआत, अस्पताल अवसंरचना का विकास और क्षेत्र से जुड़ी अन्य परियोजनाएं शामिल हैं।
ऐसा है इतिहास: राजा भरमल्ला द्वारा 1729 में निर्मित इस मंदिर की वास्तुकला मध्य बंगाल की पारंपरिक शैली पर आधारित है, जिसमें ‘आटचाला’ और ‘नाटमंदिर’ जैसी विशेषताएं शामिल हैं। इसे भगवान शिव के 12 प्रमुख धामों अथवा ज्योतिर्लिंग मंदिरों में से एक माना जाता है। ब्रिटिश शासन के अंतिम चरण में, जब विभाजन के कारण अविभाजित बंगाल का भविष्य अनिश्चित था, तब 20 जून 1947 को बंगाल विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके तहत पश्चिम बंगाल को स्वतंत्र भारत का हिस्सा बनाये रखने का निर्णय लिया गया था।इस ऐतिहासिक प्रस्ताव से पहले तारकेश्वर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में बंगीय हिंदू महासभा की तीन दिवसीय बैठक हुई थी, जिसमें यह प्रस्ताव स्वीकार किया गया था। पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार पिछले कुछ वर्षों से पोइला बैशाख (बंगाली नववर्ष के प्रथम दिन) को पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस के रूप में मनाती रही थी।
दुनियाभर के घुमक्कड़ पत्रकारों का एक मंच है,आप विश्व की तमाम घटनाओं को कवरेज करने वाले खबरनवीसों के अनुभव को पढ़ सकेंगे
https://www.roamingjournalist.com/