बिहार के अररिया से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ऐसा सियासी और सुरक्षा संदेश दिया, जिसकी गूंज सीमांचल से लेकर दिल्ली तक सुनाई दे रही है।बॉर्डर आउट पोस्ट 'लेटी' और 'इंदरवा' के उद्घाटन के साथ-साथ सशस्त्र सीमा बल के कई प्रोजेक्ट्स का ई-लोकार्पण और ई-शिलान्यास करते हुए शाह ने साफ कहा कि देश की सीमाएं अब और मजबूत होंगी।उन्होंने याद दिलाया कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान यह फैसला लिया गया था कि पड़ोसी देशों से लगी सीमाओं की सुरक्षा एक ही सशस्त्र बल संभालेगा। उसी के बाद से सशस्त्र सीमा बल (SSB) नेपाल और भूटान सीमा की जिम्मेदारी निभा रहा है। शाह ने SSB के कामकाज की तारीफ करते हुए इसे देश की सुरक्षा का अहम स्तंभ बताया।
अमित शाह गुरुवार को बिहार के नेपाल सीमा से सटे लेटी पहुंचे, जहां उन्होंने सशस्त्र सीमा बल की 52वीं बटालियन के बॉर्डर आउट पोस्ट (BOP) भवन का उद्घाटन किया।।इस दौरान उन्होंने सीमा सुरक्षा से जुड़ी कई परियोजनाओं का लोकार्पण और समीक्षा भी की. गृह मंत्री अमित शाह ने सीमा सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताते हुए कहा कि घुसपैठियों को हटाना सिर्फ चुनावी वादा नहीं, बल्कि नरेंद्र मोदी सरकार का दृढ़ संकल्प है. उन्होंने कहा कि सीमांचल क्षेत्र से घुसपैठियों को चिन्हित कर देश से बाहर भेजने का अभियान जल्द शुरू किया जाएगा।
खुली सीमा सबसे बड़ी चुनौती: गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जिस देश की सीमाएं फेंसिंग से सुरक्षित हैं, वहां निगरानी अपेक्षाकृत आसान होती है, लेकिन खुली सीमा की सुरक्षा अधिक जटिल और चुनौतीपूर्ण होती है. उन्होंने नेपाल के साथ खुली सीमा का जिक्र करते हुए कहा कि इसके लिए बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था, मजबूत सूचना तंत्र और स्थानीय लोगों से बेहतर संवाद बेहद जरूरी है. उन्होंने एसएसबी अधिकारियों को निर्देश दिया कि सीमा सुरक्षा, अवैध तस्करी और नारकोटिक्स नियंत्रण के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जाए, ताकि जवानों को प्रशिक्षण स्तर से ही बेहतर रणनीति मिले.
170 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण
गृह मंत्री ने कहा कि सीमा पर तैनात जवान देश की सुरक्षा के साथ-साथ संस्कृति के भी प्रहरी हैं. जवानों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगभग 170 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न भवनों और ढांचागत परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया है. उन्होंने विश्वास जताया कि इससे जवानों की तैनाती से जुड़ी कठिनाइयां कम होंगी. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने 2014 के बाद सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के लिए सुविधाओं के विस्तार की संवेदनशील कार्य योजना बनाई है, जिसका यह हिस्सा है।
भारत-नेपाल सीमा सड़क परियोजना का जिक्र: अमित शाह ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा सड़क योजना के तहत 554 किलोमीटर लंबी बॉर्डर रोड स्वीकृत की गई है, जिसमें से अधिकांश खंडों पर काम पूरा हो चुका है. इससे सीमा निगरानी क्षमता बढ़ेगी, नागरिकों की सुविधा में सुधार होगा और विकास कार्यों को सीमा तक पहुंचाने में आसानी होगी.
घुसपैठियों पर सख्त कार्रवाई का ऐलान
गृह मंत्री ने कहा कि घुसपैठ सिर्फ मतदाता सूची का मुद्दा नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, रोजगार और संसाधनों से भी जुड़ा बड़ा सवाल है. उन्होंने कहा कि सीमा से 10 किलोमीटर के भीतर सभी अवैध अतिक्रमण हटाए जाएंगे और घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर भेजा जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि जनसंख्या के अस्वाभाविक बदलाव किसी भी देश की संस्कृति, इतिहास और भूगोल के लिए खतरा होते हैं. इस पर नजर रखने के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की जाएगी.
सीमावर्ती गांवों से संवाद पर जोर: अमित शाह ने एसएसबी जवानों से सीमावर्ती गांवों के लोगों से बेहतर संपर्क बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय सूचना तंत्र मजबूत होगा तो सुरक्षा भी मजबूत होगी. साथ ही पड़ोसी देशों के सुरक्षा बलों के साथ समन्वय भी जरूरी है.
वीर सावरकर को श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के दौरान गृह मंत्री ने स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके राष्ट्रवादी विचारों को याद किया.
जवानों के कल्याण पर सरकार का फोकस
अमित शाह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सीमा पर तैनात जवानों और उनके परिवारों को बेहतर सुविधाएं देना है. इसके लिए आवास, स्वास्थ्य, छात्रवृत्ति और अन्य कल्याणकारी योजनाएं लगातार लागू की जा रही हैं. गृह मंत्री ने अंत में कहा कि सरकार सीमा सुरक्षा को मजबूत करने, घुसपैठ रोकने और सीमांचल क्षेत्र के विकास के लिए लगातार काम कर रही है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि देश को घुसपैठ से मुक्त करने का अभियान चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. भारत माता की जय और वंदे मातरम् के उद्घोष के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। ( अररिया से अशोक झा की रिपोर्ट)
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