- उत्तर बंगाल दौरे पर आ रहीं महामहिम,भाजपा सांसद विधायक लगाएंगे इंसाफ का गुहार
- जहां आदिवासी महिला के साथ हुई थी मारपीट वही आ रही राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू
उत्तर बंगाल में आदिवासियों के उत्तर कन्या अभियान के दौरान पुलिसियां कारवाई के खिलाफ अब आदिवासी समाज पूरे रोष में है। सिलीगुड़ी के निकट फूलबाड़ी तीनबत्ती इलाके में गुरुवार को आदिवासी महिला के साथ कथित अत्याचार के विरोध में निकाले गए 'उत्तरकन्या अभियान' के दौरान हालात तनावपूर्ण हो उठा। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प के बाद इलाके में लाठीचार्ज, जलकमान और आंसू गैस के इस्तेमाल किये गये। दर्जनों लोगों को हिरासत में लिया गया। कूचबिहार के सांसद मनोज तिग्गा , विधायक दुर्गा मुर्मू , डाबग्राम-फूलबाड़ी की भाजपा विधायक शिखा चटर्जी ने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन को जबरन रोका गया और लाठीचार्ज कर स्थिति को बिगाड़ा गया। उन्होंने पीड़ित परिवार को मुआवजा, पुनर्वास और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। फिलहाल इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। आदिवासी समाज पर हमला को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के उत्तर बंगाल दौरे पर भाजपा प्रतिनिधि इंसाफ का गुहार लगाएंगे। उल्लेखनीय है कि गत 23 दिसंबर को एक आदिवासी परिवार की पैतृक जमीन पर अवैध कब्जे और हस्तांतरण की कोशिश का विरोध करने पर सात माह की गर्भवती महिला के साथ कथित रूप से मारपीट की गई। आंदोलनकारियों का आरोप है कि गंभीर चोटों के कारण आठ जनवरी को महिला का समय से पहले प्रसव हुआ और जन्म के तीन दिन बाद नवजात की मौत हो गई। घटना के विरोध में विभिन्न आदिवासी संगठनों ने प्रशासनिक मुख्यालय उत्तरकन्या तक मार्च निकालने का आह्वान किया। प्रदर्शनकारी जैसे ही तीनबत्ती मोड़ के पास पहुंचे, पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया। आरोप है कि आगे बढ़ने की कोशिश में बैरिकेड तोड़ने का प्रयास हुआ, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पहले जलकमान का इस्तेमाल किया, फिर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागे। कुछ समय के लिए पूरा इलाका रणक्षेत्र में तब्दील हो गया।भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। घटना स्थल का दौरा कर सांसद राजू विष्ट ने राज्यपाल से परिवार को इंसाफ दिलाने की गुहार लगाई थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आगामी 7 और 8 मार्च को उत्तर बंगाल के अपने पहले आधिकारिक दौरे पर आ रही हैं। वह दार्जिलिंग जिले के फांसीदेवा ब्लॉक के बिधाननगर स्थित संतोषिणी हाई स्कूल मैदान में आयोजित होने वाले ‘अंतर्राष्ट्रीय संथाल परिषद’ के नौवें सम्मेलन का उद्घाटन करेंगी। इसी जगह आदिवासी महिलाके साथ हुआ था नाइंसाफी। राष्ट्रपति के इस दौरे को लेकर पूरे उत्तर बंगाल में प्रशासनिक हलचल तेज है। इस दो दिवसीय सम्मेलन में आदिवासी समाज के संरक्षण, उनकी संस्कृति और भाषाई विकास पर चर्चा होगी। पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए राष्ट्रपति द्वारा एक ‘साल’ का पौधा रोपित करने का विशेष कार्यक्रम भी रखा गया है। इस भव्य आयोजन में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम के भी शामिल होने की उम्मीद है। नक्सलबाड़ी एसडीपीओ और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए आयोजकों के साथ कई बैठकें कर चुके हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले उत्तर बंगाल का आदिवासी वोट बैंक सभी दलों के लिए काफी मायने रखता है। ऐसे में इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री की मौजूदगी काफी अहम होगी। गौरतलब है कि पिछला सम्मेलन असम में आयोजित किया गया था, लेकिन इस बार बंगाल के फांसीदेवा को चुना गया है, जो आदिवासी बहुल क्षेत्र है। ( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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