- आने वाले दिनों में पार्टी को बचाना हो जाएगा मुश्किल, भाजपा के वाशिंग मशीन में नहाने को ज्यादातर नेता तैयार
अशोक झा/ कोलकाता: वर्ष 1970 में एक फिल्म आई थी 'गोपी, जिसमें महान गायक मोहम्मद रफी ने प्रसिद्ध गीतकार राजेंद्र कृष्ण का लिखा एक गीत गाया था, 'सुख के सब साथी, दु:ख में न कोई...' ममता बनर्जी पर ये पंक्ति पूरी तरह फिट बैठ रही है।पार्टी एकजुटता का जितना भी दावा करे, हकीकत यह है कि पार्टी में असंतोष उभर चुका है। यहां तक कि बड़े नेताओं को भी लग रहा है कि तृणमूल कांग्रेस का फिलहाल कोई भविष्य नहीं है इसलिए वे बाहर निकलने के रास्ते तलाश रहे हैं। पश्चिम बंगाल में भाजपा के नेता और लोकसभा सांसद सौमित्र खान ने यह कह कर सबको चौंका दिया है कि टीएमसी के 20 सांसद भाजपा के संपर्क में हैं और कभी भी वे भाजपा में शामिल हो सकते हैं.
लोकसभा में टीएमसी के सांसदों की कुल संख्या 29 है। इस हिसाब से यदि 20 ने पाला बदल कर लिया तो दल-बदल कानून का उन पर कोई असर नहीं होगा। कहा यह भी जा रहा है कि राज्यसभा में टीएमसी के सांसदों में से भी कई भाजपा के संपर्क में हैं। इसके अलावा विभिन्न नगर निकायों के 100 से ज्यादा पार्षद पहले ही पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं।भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी में गंभीर खामियां स्वीकार कीं। उन्होंने कहा, "राजनीति में भ्रष्टाचार होता है, लेकिन जब हमने इसे संस्थागत रूप दे दिया, पंचायत स्तर से लेकर उच्चतम स्तर तक तो हर जगह भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार हो गया। हमारे पास कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं बचा था, क्योंकि हमने विपक्ष को पनपने का मौका ही नहीं दिया।
सांसद ने माना कि राजनीतिक कार्यकर्ता पार्टी का कार्यक्रम आगे बढ़ाना चाहते थे, लेकिन भ्रष्टाचार और बिचौलियों ने माहौल खराब कर दिया। उन्होंने सीमावर्ती इलाकों का उदाहरण देते हुए कहा कि बांग्लादेश लौटने के लिए हजारों लोग जमा हो गए थे, जिससे स्थिति की गंभीरता साफ होती है।
सांसद सुखेन्दु शेखर रॉय ने आगे कहा, "सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नई सरकार ने अब तक जो काम किए हैं और जो कदम उठाए हैं, उनसे आम जनता इस समय बहुत खुश है। सरकार सही दिशा में आगे बढ़ रही है। एक सरकार को ठीक इसी तरह काम करना चाहिए। सीएम सुवेंदु अधिकारी बहुत मेहनती हैं। मुझे शायद ही कभी कोई ऐसा नेता मिला हो जो उनके जितना मेहनती हो।" तो सवाल है कि टीएमसी के इन नेताओं का क्या अचानक हृदय परिवर्तन हो गया? या फिर वे खुद को अदृश्य दबाव में महसूस कर रहे हैं। टीएमसी के कार्यकाल की जिस तरह से शुभेंदु अधिकारी ने खोज-खबर लेनी शुरु की है, उससे घबराहट सी फैली हुई है।पश्चिम बंगाल में तो लोग मजाक में कहने भी लगे हैं कि भाजपा की वाशिंग मशीन में धुलने के लिए कतार लगी हुई है।
निचले स्तर पर जिस तरह के हालात बने हैं, उसे लेकर शुभेंदु अधिकारी को कहना पड़ा कि चुनाव से पहले जो भाजपा का कार्यकर्ता था, वही असली कार्यकर्ता है. और इस विश्वास को कायम रखने में ही भाजपा की भलाई है. शुभेंदु अधिकारी को याद ही होगा कि 2011 में जब टीएमसी की जीत हुई थी तो बड़ी संख्या में वामपंथियों ने टीएमसी का झंडा थाम लिया था.
इसलिए बंगाल में भले ही वामपंथियों की सरकार बदल गई थी, निचले स्तर पर हालात वैसे ही बने रहे जैसे पहले थे. इस बार जब भाजपा जीती तो कई इलाकों में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने भगवा हाथ में थाम लिया और गुलाल उड़ाना शुरू कर दिया. इसलिए भाजपा को सतर्क रहना होगा कि टीएमसी के बिखड़ जाने की उम्मीद में उसके भीतर कहीं उन्हीं आत्माओं की पैठ न हो जाए।जिन्होंने पश्चिम बंगाल में कोहराम मचाया हुआ था और जिनके कारण ममता बनर्जी का बंटाढार हुआ।और जहां तक ममता बनर्जी का सवाल है तो वो जुझारू नेता हैं, उन्हें हल्के में लेने की भूल भी नहीं करनी चाहिए. फिलहाल वो दु:ख की स्थिति में है और यह दु:ख उन्होंने खुद अर्जित किया है।
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