- कहा,विध्वंसक गतिविधियों के पीछे सक्रिय शक्तियां , उनका अगला और प्रमुख निशाना भारत
- पश्चिम से चली आंधी सभी प्रकार का भद्रता, मांगलय और संस्कार से नफरत करती है और उसे करना चाहती नष्ट
- भारत में सत्ता परिवर्तन नहीं होने का रहा है, इसे विरोधियोको समझना जरूरी
- हिंदू समाज को बिखरने से बचाने में संघ के निरंतर सांस्कृतिक और संगठनात्मक प्रयासों का बड़ा योगदान
अशोक झा/ नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने 20 अक्टूबर को देश और दुनिया में सक्रिय भारत-विरोधी ताकतों के खिलाफ खुला मोर्चा खोला। संघ प्रमुख ने बेहद कड़े शब्दों में आगाह किया कि मौजूदा नेतृत्व में भारत जिस तेजी से वैश्विक मंच पर आगे बढ़ रहा है, वह कुछ विदेशी और "आसुरी ताकतों" को पच नहीं रहा है। संघ प्रमुख ने कहा है कि पिछले दशक में भारत का जो विकास हुआ उसकी वजह से भारत असुरी ताकतों का लक्ष्य बना है। RSS चीफ ने यह बातें नागपुर में संघ के विजयादशमी उत्सव को संबोधित करते हुए कहीं। मोहन भागवत ने कहा कि भारत की लगातार हो रही प्रगति कुछ वैश्विक ताकतों को रास नहीं आ रही है। उन्होंने कहा, "एक पश्चिम से आंधी चली है। जो हर प्रकार की व्यवस्था, हर प्रकार का भद्रता, मांगलय और संस्कार से नफरत करती है और उसे नष्ट करना चाहती है।… फ्रांस में क्या हो रहा है, अल्बानिया में क्या हो रहा है, बांग्लादेश में क्या हुआ, नेपाल में क्या हुआ। ये सब किया कराया उनका है।"
रिजिम चेंज से नहीं बदलती परिस्थितियां- भागवत
मोहन भागवत ने इस दौरान कहा कि रिजिम चेंज से परिस्थितियां ना कभी बदली हैं और ना होंगी। भागवत बोले, "वो कहते हैं रिजिम चेंज से परिस्थितियां बदलेंगी। लेकिन ऐसा नहीं होगा। ना पहले ऐसा हुआ है न अब होगा। अपने स्वार्थ का पोषण करने वाले अपने पिठ्ठू सब जगह प्रभावी रहे हैं। इसके लिए ये कार्यवाहियां सारी दुनिया में चलती है और भारत का बड़ा होना इसमें खलल डालेगा। इसीलिए भारत उसका परम लक्ष्य है और भारत में भी ऐसे प्रयास चल रहे हैं।"यही वजह है कि देश के अंदर सत्ता परिवर्तन कराने के लिए सुनियोजित साजिशें रची जा रही हैं।
नागपुर के रेशिमबाग मैदान में आयोजित पारंपरिक : विजयादशमी उत्सव को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने यूरोप के घटनाक्रमों - खासकर फ्रांस और अल्बानिया में स्कूली सुधारों और युवाओं के विरोध प्रदर्शनों - का हवाला देते हुए कहा कि इसे पश्चिमी हितों के चश्मे से समझना जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि पश्चिम से एक ऐसा वैचारिक तूफान उठा है, जिसका एकमात्र मकसद स्थापित व्यवस्थाओं को चोट पहुंचाना और सांस्कृतिक व सामाजिक मूल्यों को तार-तार करना है।
सरसंघचालक ने आरोप लगाया कि इन विध्वंसक गतिविधियों के पीछे सक्रिय शक्तियां पूरी दुनिया में अपना प्रभाव बढ़ा चुकी हैं और अब उनका अगला और प्रमुख निशाना भारत है। उन्होंने समाज को सतर्क करते हुए कहा कि आधुनिकता और सुधार के नाम पर देश की सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं को खोखला करने की किसी भी चाल को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा.
भागवत ने कहा, "पिछले दो-चार दिनों से आ रही खबरों पर ध्यान दें. दुनिया भर में क्या हो रहा है, उसे देखें: फ्रांस और अल्बानिया में क्या हो रहा है, बांग्लादेश में क्या हुआ, नेपाल में क्या हुआ." उन्होंने आरोप लगाया कि ये घटनाएं उन ताकतों की व्यापक कोशिशों का हिस्सा हैं, जो अपने खुद के हितों को साधना चाहती हैं। उन्होंने कहा, "कहा जाता है कि सत्ता बदलने से हालात बदल जाएंगे, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ। भागवत ने आरोप लगाया कि भारत में भी ऐसी ही कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन उन्होंने तर्क दिया कि हाल के दशकों में देश की मजबूत नीतियों और नेतृत्व ने इसे आगे बढ़ने और लोगों को एकजुट करने में मदद की है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से नई पीढ़ी में देश और उसके भविष्य के प्रति जिम्मेदारी की भावना और मजबूत हुई है, जिससे समाज को उन ताकतों का मुकाबला करने में मदद मिली है जो भारत को कमजोर करना चाहती हैं।
मोहन भागवत ने भारत, हिंदू समाज और संघ को तोड़ने की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ आसुरी ताकतें इसके लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करती हैं और उनकी प्रकृति के कुछ लोग इसमें मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि क्षुद्र सत्ता स्वार्थ और विवेकहीनता के कारण कुछ महत्वाकांक्षी नेता भी इसमें शामिल हो जाते हैं। भागवत के मुताबिक, भारत सहित पूरी दुनिया में भद्रता, मांगल्य, सांस्कृतिक और मानवीय संस्कारों को नष्ट करने की आसुरी प्रतिज्ञा के साथ पश्चिम से एक आंधी चली है, जिससे दुनिया के तथाकथित प्रगतिशील देश भी त्रस्त और असहाय हैं। मोहन भागवत ने कहा कि संघ ने सदियों के संघर्ष के बीच सनातन और हिंदू धर्म को जीवंत और अडिग बनाए रखने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। आरएसएस प्रमुख ने ऐतिहासिक संदर्भों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत पर हुए इस्लामी हमलों और विपरीत परिस्थितियों के दौर में हिंदू समाज को बिखरने से बचाने में संघ के निरंतर सांस्कृतिक और संगठनात्मक प्रयासों का बड़ा योगदान रहा है। मोहन भागवत ने कहा कि संघ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि विपरीत दौर में भी हिंदू संस्कृति, पहचान और आस्था की रक्षा करने वाला एक मजबूत सुरक्षा कवच बनकर उभरा है।
स्वयंसेवकों ने राष्ट्र-प्रथम की भावना से किया है कार्य: पीएम मोदी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों ने राष्ट्र-प्रथम की भावना से समाज के उत्थान के लिए किया कार्य है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पोस्ट में लिखा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना दिवस के विशेष अवसर पर सभी स्वयंसेवकों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। मैं उन सभी विभूतियों को भी नमन करता हूं, जिन्होंने अपने अथक परिश्रम और सेवाभाव से संघ को सींचा और संवारा है।पीएम मोदी ने एक्स पोस्ट के जरिए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सेवा, राष्ट्र निर्माण और सामाजिक प्रतिबद्धता का गौरवशाली शताब्दी वर्ष पूर्ण किया है। अनगिनत स्वयंसेवकों ने अपने समर्पण, कर्तव्य-निष्ठा और राष्ट्र-प्रथम की भावना से सदैव समाज के उत्थान के लिए कार्य किया है. उन्होंने विश्वास जताया कि यह भावना आने वाले समय में भी देश को और सशक्त व सुदृढ़ करेगी।
प्रशांत भूषण की 'सत्ता परिवर्तन' वाली टिप्पणी
मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञान कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शनों को लेकर वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण की टिप्पणियों पर राजनीतिक विवाद छिड़ा हुआ है। इन प्रदर्शनों में प्रदर्शनकारी ज्ञान कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इसी बीच भागवत की टिप्पणी सामने आई है।
15 अक्टूबर को, भूषण ने इस आंदोलन को "सत्ता परिवर्तन की लड़ाई" बताया और इस्तीफे की मांग को एक लोकतांत्रिक अधिकार करार दिया. 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके और अन्य कार्यकर्ताओं के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, भूषण ने कहा कि नागरिकों को सरकार बदलने की मांग करने का अधिकार है।भूषण ने कहा, "हां, हम सभी सत्ता परिवर्तन चाहते हैं।इसमें गलत क्या है?" उन्होंने तर्क दिया कि इस आंदोलन का उद्देश्य चुनावी लोकतंत्र की रक्षा करना है।
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