- दो अक्टूबर को मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव छोड़ेंगे इसे जंगल में, वन मंत्री समेत अन्य मंत्री भी होंगे शामिल
- वन्य पर्यावरण संरक्षण का दिया जाएगा संदेश,बंगाल भाजपा इस ओर कर रही काम
अशोक झा/ कोलकाता: बाघिन को बिहार के वाल्मीकि बाघ अभयारण्य से बक्सा में बाघों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया है।इसे उत्तर बंगाल के अलीपुरद्वार जिले स्थित बक्सा बाघ अभयारण्य लाई गई और उसे दो अक्टूबर को जंगल में छोड़ा जाएगा। पश्चिम बंगाल के वन मंत्री मनोज उरांव ने यह जानकारी दी। फिलहाल बक्सा में कोई स्थायी बाघ आबादी नहीं है, हालांकि कैमरे में एक बाघ दिखा था। विशेषज्ञों का मानना है कि वह भूटान या असम के मानस राष्ट्रीय उद्यान से भटककर यहां आया था। वयस्क बाघिन को विमान से हासीमारा वायुसेना अड्डे तक लाया गया, जहां से उसे 'ग्रीन कॉरिडोर' (यातायात बाधा रहित निर्धारित विशेष मार्ग) के जरिए सड़क मार्ग से बाघ अभयारण्य के भीतर निर्धारित बाड़े तक पहुंचाया गया। उरांव ने दिन में बक्सा बाघ अभयारण्य का दौरा कर बाघिन को जंगल में छोड़े जाने की तैयारियों की समीक्षा की और वन विभाग, पुलिस एवं अन्य एजेंसियों के अधिकारियों के साथ बैठक की।बिहार के 'वाल्मीकि बाघ अभ्यारण्य' से तीन वर्षीय बाघिन को बुधवार सुबह उत्तरी बंगाल के हासिमारा वायुसेना स्टेशन ले जाया गया। यह राज्य के 'बक्सा बाघ अभ्यारण्य' में बाघों की आबादी को बहाल करने के महत्वाकांक्षी प्रयास का हिस्सा है।
बाघिन को विशेष पिंजरे में लाया गया: एक सप्ताह तक चले खोज अभियान के बाद पकड़ी गई बाघिन को गोरखपुर हवाई अड्डे से विशेष रूप से डिजाइन किए गए पिंजरे में पूर्ण चिकित्सा सहायता के साथ लाया गया। भारतीय वायु सेना के एक हेलीकॉप्टर ने बाघिन को हासिमारा पहुंचाया। जहां वह सुबह लगभग 4:45 बजे उतरी। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि लगभग 70 बाघ बचाव कर्मियों की एक टीम खराब मौसम के बावजूद कई दिनों से वाल्मीकि बाघ अभ्यारण्य में बाघिन की तलाश कर रही थी। मंगलवार को सूर्यास्त से पहले उसे अंततः स्लीपर डार्ट्स से बेहोश कर दिया गया। स्वास्थ्य जांच के बाद बक्सा ले जाया गया। बाघिन को पकड़ने के बाद, बिहार के चंपारण जिले में स्थित वाल्मीकि बाघ अभ्यारण्य से लगभग 125 किलोमीटर दूर गोरखपुर हवाई अड्डे तक सड़क मार्ग से ले जाने से पहले उसकी स्वास्थ्य जांच की गई। हवाई मार्ग से ले जाने के बाद, हासिमारा में दो वन्यजीव पशु चिकित्सकों और बाघ विशेषज्ञों ने एक घंटे से अधिक समय तक उसके शारीरिक मापदंडों की जांच की। इसके बाद बाघिन को सड़क मार्ग से हासिमारा से लगभग 37 किलोमीटर दूर स्थित बक्सा बाघ अभ्यारण्य ले जाया गया। सुचारू स्थानांतरण सुनिश्चित करने के लिए मार्ग में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए गए थे। 2 अक्टूबर को प्राकृतिक बाड़े में छोड़ी जाएगी बाघिन: यह बाघिन शाम लगभग 6:45 बजे राजार भातखावा गेट से बुक्सा में दाखिल हुई और उसे 25 माइल्स स्थित वन विभाग की विशेष सुविधा में ले जाया गया। उसे 2.2 हेक्टेयर के प्राकृतिक बाड़े में स्थानांतरित करने से पहले अस्थायी रूप से वहीं रखा जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि बाघिन को 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर प्राकृतिक बाड़े में छोड़ा जाएगा। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के इस कार्यक्रम में शामिल होने की उम्मीद है। यह स्थानांतरण बक्सा में बाघों की आबादी को पुनर्जीवित करने की एक व्यापक पहल का हिस्सा है। अभ्यारण्य इस पुनर्प्रवेश कार्यक्रम की तैयारी कर रहा है, और वन अधिकारियों ने बाघिन के अनुकूलन और छोड़े जाने के बाद उसकी निगरानी के लिए व्यवस्था की है। बाघिन के स्थानांतरण में वन, वन्यजीव और रक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय शामिल था।
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