- बंगाल में आज से 10 दिनों का उत्सव की शुरुआत,गूंजने लगे है या देवी सर्वभूतेषु....
अशोक झा/ कोलकाता: महालया अमावस्या आज 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को मनाई जा रही है, जो सनातन धर्म में पितृपक्ष के समापन और देवी पक्ष (शारदीय नवरात्रि) के आरंभ का एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक व सांस्कृतिक पड़ाव है। यह दिन मुख्य रूप से पितरों की विदाई और शक्ति स्वरूपा माँ दुर्गा के पृथ्वी पर आगमन के स्वागत का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष (2026) का पंचांग और दुर्गा पूजा का काउंटडाउन तिथि: पंचांग गणना के अनुसार, अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर की रात 9:35 बजे से शुरू होकर 10 अक्टूबर 2026 की रात 9:19 बजे तक रहेगी, जिसके चलते उदय तिथि के अनुसार 10 अक्टूबर को महालया मनाया जा रहा है। सिलीगुड़ी में महालया (10 अक्टूबर 2026) के पावन अवसर पर पूरे शहर में उत्सव और भक्ति का माहौल देखा जा रहा है। सुबह के समय पारंपरिक अनुष्ठानों से लेकर शाम के भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक, शहर माँ दुर्गा के स्वागत (देवीपक्ष की शुरुआत) के लिए पूरी तरह तैयार है। महानंदा नदी तट पर पवित्र तर्पण और गंगा आरती
महालया की सुबह सिलीगुड़ी के लाल मोहन मल्लिक विसर्जन घाट (निरंजन घाट) पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जहाँ लोगों ने महानंदा नदी में पवित्र डुबकी लगाकर अपने पूर्वजों को तर्पण अर्पित किया।
इसके साथ ही, गंगा-महानंदा चेतना मंच के 4 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में महानंदा नदी को बचाने का संदेश देते हुए नदी के विभिन्न घाटों (जैसे संतोषी घाट और महाराज कॉलोनी घाट) पर भव्य गंगा आरती का विशेष आयोजन किया जा रहा है। बाघाजतीन पार्क में 'उत्तरेर देवीपक्ष' उत्सव :बंगीय हिंदू महामंच द्वारा बाघाजतीन पार्क में "उत्तरेर देवीपक्ष 2026" का बेहद खास और भव्य आयोजन किया गया है। इस कार्यक्रम में निम्नलिखित मुख्य आकर्षण शामिल हैं।
भव्य अल्पना प्रतियोगिता : पार्क के मैदान और रास्तों को खूबसूरत पारंपरिक अल्पना डिज़ाइनों से सजाया गया है।
महिषासुरमर्दिनी लाइव व सांस्कृतिक कॉन्सर्ट: शाम के समय यहाँ लाइव बैंड कॉन्सर्ट और महिषासुरमर्दिनी की संगीतमय प्रस्तुति दी जा रही है। ढाक प्रतियोगिता: दुर्गा पूजा के आगमन की गूंज के साथ पारंपरिक ढाकियों की प्रतियोगिता भी इस आयोजन का मुख्य हिस्सा है। कावाखाली मैदान में विशेष सरकारी सांस्कृतिक कार्यक्रम
पश्चिम बंगाल सरकार के सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग द्वारा 11 और 12 अक्टूबर को कावाखाली मैदान में एक बड़ा मेगा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। भले ही यह महालया के ठीक अगले दिन शुरू हो रहा है, लेकिन इसकी तैयारियाँ आज से ही ज़ोरो पर हैं।
11 अक्टूबर: मशहूर गायक तीर्थ भट्टाचार्य अपनी प्रस्तुति देंगे।
12 अक्टूबर: बॉलीवुड और बंगाली सिंगर अंतरा मित्रा लाइव परफॉर्म करेंगी, साथ ही कई क्षेत्रीय बैंड्स भी शामिल होंगे। महालया रोड रेस और खेल आयोजन
बाघाजतीन एथलेटिक क्लब द्वारा इस वर्ष 42वीं महालया रोड रेस का आयोजन किया गया, जो सिलीगुड़ी की एक पुरानी और प्रतिष्ठित खेल परंपरा है। सुबह-सुबह शहर के युवाओं और धावकों ने बड़े उत्साह के साथ इस रेस में हिस्सा लेकर उत्सव की शुरुआत की।
पितृ आराधना से शक्ति आराधना की ओर संक्रमण:
महालया भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक कड़ी है। आश्विन मास की इस अमावस्या (जिसे सर्वपितृ अमावस्या भी कहते हैं) पर लोग अपने ज्ञात-अज्ञात पितरों का स्मरण कर जल, तिल, कुश और पुष्प से तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करते हैं। इसके साथ ही, पितरों को विदा कर माँ दुर्गा को पुत्री के रूप में पृथ्वी पर आने का आमंत्रण दिया जाता है, जिससे देश भर में विशेषकर बंगाल और पूर्वी भारत में दुर्गा पूजा का उत्सव और माहौल शुरू हो जाता है।
महालया के प्रमुख अनुष्ठान और परंपराएं: तर्पण और दान: सुबह-सुबह श्रद्धालु पवित्र नदियों या जलाशयों के किनारे जाकर पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करते हैं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न-वस्त्र का दान देते हैं।
रेडियो पर 'महिषासुर मर्दिनी' का श्रवण: दशकों पुरानी परंपरा के अनुसार, महालया के दिन तड़के सुबह 4 बजे लोग उठकर आकाशवाणी (रेडियो) पर बीरेंद्र कृष्ण भद्र की गूंजती और शक्तिशाली आवाज में चंडीपाठ और देवी स्तुति पर आधारित कार्यक्रम 'महिषासुर मर्दिनी' सुनते हैं। यह ध्वनि दुर्गा पूजा की भावनात्मक शुरुआत मानी जाती है।
चक्षुदान (मूर्तियों को अंतिम रूप): मूर्तिकारों के लिए महालया का दिन बेहद खास होता है। इसी दिन माँ दुर्गा की प्रतिमाओं की आँखें बनाने (चित्रण करने) की पवित्र परंपरा निभाई जाती है, जिसे 'चक्षुदान' कहा जाता है। इसके बाद माँ की मूर्तियां अपने पूर्ण और जीवंत रूप में आ जाती हैं।
माँ का आगमन और प्रस्थान: इस वर्ष माँ दुर्गा का पृथ्वी पर आगमन हो रहा है और उनकी विदाई बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को नौका (नाव) से होगी, जिसे शास्त्रों में प्रचुर वर्षा और भरपूर फसलों (शस्यश्यामला वसुंधरा) का शुभ संकेत माना जाता है। मुख्य पूजा: महालया के बाद दुर्गा पूजा का मुख्य उत्सव 16 अक्टूबर को महा षष्ठी से शुरू होगा और 21 अक्टूबर को विजयादशमी (सिंदूर खेला और मूर्ति विसर्जन) के साथ संपन्न होगा। पश्चिम बंगाल में भव्य सरकारी आयोजन
पश्चिम बंगाल सरकार इस वर्ष महालया के अवसर पर कोलकाता में हुगली नदी के किनारे पांच अलग-अलग घाटों पर लाउडस्पीकरों के माध्यम से तड़के "महिषासुर मर्दिनी" का भव्य प्रसारण कर रही है। इसके साथ ही, ईडन गार्डन्स से लेकर रेड रोड तक एक बड़े रोड शो और सांस्कृतिक उत्सव का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसमें राज्य के कई मंत्रियों और जानी-मानी हस्तियों के शामिल होने की खबर है।महालया अमावस्या पर क्या करें? जल्दी उठें और स्नान करें: परंपरा के अनुसार, भक्त महालय पर जल्दी उठते हैं और पूजा या अनुष्ठान शुरू करने से पहले स्नान करते हैं। दिन की शुरुआत स्वच्छता के साथ करना आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। जो लोग अपने पूर्वजों के लिए तर्पण कर रहे हैं, उन्हें अपने परिवार की परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार अनुष्ठान करने चाहिए। पूर्वजों को तर्पण अर्पित करें: महालय अमावस्या को दिवंगत पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने का महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। परिवार सुख-समृद्धि के लिए पितृ तर्पण और अन्य अनुष्ठान कर सकते हैं। जो लोग ये अनुष्ठान कर रहे हैं, उन्हें तय रीति-रिवाजों का पालन करना चाहिए और ज़रूरत पड़ने पर किसी पंडित से मार्गदर्शन लेना चाहिए।महिषासुरमर्दिनी सुनें: पारंपरिक महिषासुरमर्दिनी पाठ सुनना महालय के जश्न का एक अहम हिस्सा है, खासकर बंगाल और दुनिया भर में बंगाली समुदायों के बीच। यह भक्तिपूर्ण कार्यक्रम पारंपरिक रूप से सुबह-सुबह सुना जाता है और दुर्गा पूजा के मौसम की आध्यात्मिक शुरुआत का प्रतीक है।
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