- जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और मां दुर्गा के आगमन का वाहन
अशोक झा: पितृपक्ष के समापन के साथ ही सनातन धर्म में मां शक्ति की उपासना का सबसे पावन पर्व 'शारदीय नवरात्रि' शुरू होने जा रहा है। हर वर्ष आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि की शुरुआत होती है। घटस्थापना करने से अनुष्ठान में सभी देवी देवता और तीर्थों का सानिध्य और उनकी कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि कलश के मुख में भगवान विष्णु, गले में भगवान शिव, मूल में ब्रह्माजी का वास माना जाता है। वहीं, कलश के मध्य में मां दुर्गा का वास माना जाता है। इसलिए कलश स्थापना बहुत ही शुभ मुहूर्त देखकर किया जाता है। लेकिन, इस साल शारदीय नवरात्रि के पहले दिन ऐसे योग बन रहे हैं जिसमें घटस्थापना करना शुभ नहीं माना गया है। शास्त्रों में वैधृति योग को त्याग कर घट स्थापना करने का विधान बताया गया है। लेकिन इस साल रात्रि तक यह योग व्याप्त रहेगा। ऐसे में घट स्थापना कब करना शुभ रहेगा आइए जानते हैं क्या कहते हैं पंडित अभय झा। करीब 50 वर्षों में छठी बार ऐसा संयोग बनने की बात कही जा रही है, जब नवरात्र में तिथि क्षय के बिना दस दिनों तक उत्सव मनाया जाएगा. इस वर्ष मां भगवती का आगमन हाथी पर होने की धार्मिक मान्यता भी चर्चा में है. परंपरागत देवी उपासना में हाथी पर आगमन को समृद्धि और अच्छी वर्षा का प्रतीक माना जाता है. हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं हैं, मौसम या भविष्य की घटनाओं की वैज्ञानिक भविष्यवाणी नहीं।
अभिजीत मुहूर्त में होगी घटस्थापना: पंचांग के अनुसार, प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 10 बजकर 6 मिनट से प्रारंभ होकर 11 अक्टूबर की रात 8 बजकर 37 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के आधार पर 11 अक्टूबर को नवरात्र की शुरुआत होगी. घटस्थापना के लिए सुबह 11 बजकर 37 मिनट से दोपहर 12 बजकर 23 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त बताया गया है. इस दौरान श्रद्धालु विधि-विधान से कलश स्थापना कर मां दुर्गा का आह्वान करेंगे।
हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, देश में बढ़ेगी सुख-समृद्धि: धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, नवरात्रि का पहला दिन रविवार होने के कारण इस बार मां दुर्गा का वाहन हाथी (गज) रहेगा। शास्त्रों में जगदम्बा का हाथी पर सवार होकर आगमन अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र के अनुसार, देवी का गज पर आगमन प्रचुर वर्षा, धन-धान्य की वृद्धि, सुख, समृद्धि और वैश्विक शांति का प्रतीक है।
शारदीय नवरात्रि 2026 घटस्थापना पर बने दो दूषित योग:
पंडित अभय झा बताते हैं कि, इस साल चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का दूषित संयोग बन रहा है। शास्त्रों में इस योग में घटस्थापना करना अशुभ माना गया है। शास्त्रानुसार सूर्योदय के बाद 10 घटी (लगभग 4 घण्टे) तक या मध्याह्न काल में अभिजित् मुहूर्त (दिन के अष्टम मुहूर्त्त) के समय कलशस्थापन किया जा सकता है। प्रतिपदा की पहली 16 घड़ियां तथा चित्रा-वैधृति योगों का पूर्वार्द्ध भाग घटस्थापना के लिए निषिद्ध है। नियम है कि यदि नवरात्रि आरंभ होने के साथ ही यह विहित काल यानी सूर्योदय बाद की 10 घटियां और अभिजित् मुहूर्त-प्रतिपदा की प्रथम 16 घटियों अथवा चित्रा वैधृति के पूर्वार्द्ध भाग से पूरी तरह दूषित हो, तो इसकी उपेक्षा करते हुए इस दूषित-काल में ही कलश स्थापन कर लेना चाहिए, क्योंकि शास्त्रनुसार जहां तक संभव हो, इन दोषों से बचना चाहिए। 'प्रतिपदाद्यषोडशनाड़ी-निषेधः चित्रा-वैधृतियोग-निषेधश्च उक्तकालानुतोरोधेन सति संभवे पालनीयो न तु निषेधानुरोधेन पूर्वाह्नः प्रारम्भकालः प्रतिपत्तिथिर्वातिक्रमणीयः ।।' इस वर्ष 11 अक्तूबर, 2026 को शारदीय नवरात्रि आरंभ होंगे। यहां प्रतिपदा की 16 घटी तो 11 अक्टूबर के सूर्योदय के साथ ही यानी 10 अक्तूबर की मध्यरात्रि सुबह में 3 बजकर 44 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। वहीं, जब 11 अक्तूबर को सूर्योदय होगा तब चित्रा और वैधृति योग रहेंगे जिन्हें शास्त्रों में दूषित योग माना गया है। ऐसे में चित्रा नक्षत्र का पूर्वार्धकाल प्रातः 10 बजकर 08 मिनट तक तथा वैधृति-योग का पूर्वार्धकाल सुबह में 9 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। ऐसे में सुबह में 10 बजकर 8 मिनट के बाद घटस्थापना करना अत्यंत शुभ माना जाएगा।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त कब से कब तक: घर पर घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त 11 अक्तूबर 2026 सुबह में 10 बजकर 8 मिनट के बाद का रहेगा।
अभिजीत मुहूर्त पंडाल में घटस्थापना के लिए 11 बजकर 50 मिनट से 12 बजकर 32 मिनट तक
इसके अलावा अगर आप चाहें तो विशेष परिस्थिति में 9 बजकर 25 मिनट के बाद भी घटस्थापना कर सकते हैं।घटस्थापना के लिए रखें इन बातों का खास ख्याल
घटस्थापना के लिए आपको साफ सफाई का विशेष ख्याल रखना बेहद जरुरी है। इस दिन पूजा स्थल की भी साफ सफाई अच्छे से करें। साथ गी गंगाजल का छिड़काव करने के बाद ही पूजा आरंभ करें। घटस्थापना से पहले भगवान गणेश का ध्यान करें। इसके बाद ही जल, अक्षत और पुष्प हाथ में लेकर संकल्प लेने के बाद घटस्थापना करना शुभ माना जाता है।
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