संस्कृति पर्व के 52 वें विशेषांक का प्रकाशन अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी के साथ संस्कृति पर्व मासिक पत्रिका अपने प्रकाशन के 8 वर्ष पूरे कर रही है। इस बार का यह अंक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि काशी में आयोजित होने जा रही संस्कृति संसद 2026 पर इस अंक को केंद्रित किया जा रहा है। *अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, गंगा महासभा और अखिल भारतीय संत समिति एवं श्रीकाशी विद्वत्परिषद* द्वारा आयोजित होने वाली यह छठवीं संस्कृति संसद है। *भारत संस्कृति न्यास* के उपक्रम के रूप में सनातन संस्कृति, अध्यात्म, दर्शन और वर्तमान चुनौतियों को संदर्भित इस संस्कृति संसद पर केंद्रित *संस्कृति पर्व* के इस विशेष अंक का लोकार्पण भी नवबर के प्रथम सप्ताह में रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर, काशी में ही होना सुनिश्चित है।
संस्कृति पर्व के इस विशेषांक में निम्नलिखित विषय समायोजित किए जा रहे हैं:
1. संस्कृति संसद की अब तक की यात्रा और इसके परिणाम
2. सनातन संस्कृति के समक्ष उपस्थित वर्तमान चुनौतियां
3. विश्व में शांति और मानवता की रक्षा केवल सनातन से ही संभव
4. भारत में सनातन की पुनर्स्थापना, प्रयास और परिणाम
5. सनातन संस्कृति को समाज संचालन के लिए शिक्षा से जोड़ना जरूरी
6. सामाजिक विभेद, जातीय संघर्ष और विभाजनकारी षड्यंत्रों से बचने के लिए उपाय
7. नए भारत के नवनिर्माण के लिए नई पीढ़ी को कैसे तैयार किया जाए
8. प्राचीन और अर्वाचीन में वर्तमान का सामयिक विश्लेषण
9. संस्कृति संसद से विश्व के लिए संदेश
10. संस्कृति, संस्कार और समाज का आधुनिक संदर्भ
इन प्रमुख विषयों के अतिरिक्त विषय भी विद्वत जन 15 अक्टूबर तक प्रस्तुत कर सकते हैं। पत्रिका 20 अक्टूबर को प्रिंट में जाएगी।
आलेख भेजने के लिए पत्रिका की मेल इस प्रकार है:
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आचार्य संजय तिवारी
संपादक
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