- योजनाओं की प्रगति, लक्ष्य और लंबित कार्य,मंत्रियों को अलग-अलग समूहों में बांटकर विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श
अशोक झा/ नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह केंद्रीय मंत्रियों के साथ दो दिवसीय विशेष 'चिंतन बैठक' करेंगे। यह बैठक 23 और 24 सितंबर को होगी। सरकार के कामकाज, नीतियों के क्रियान्वयन और भविष्य की प्राथमिकताओं को लेकर होने वाली इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार बैठक से पहले प्रधानमंत्री ने मंत्रियों के छह से ज्यादा समूह बनाए गए हैं। प्रत्येक समूह में आठ मंत्री होंगे। ये समूह आत्म-सुधार, संवाद और गवर्नेंस जैसे विषयों पर तैयारी करेंगे। बैठक में इन समूहों की ओर से विषयवार प्रस्तुति और चर्चा की संभावना है। इस कवायद को सरकार के तीसरे कार्यकाल के मध्य में मंत्रालयों के कामकाज की व्यापक समीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
इस बैठक की टाइमिंग को देखते हुए सियासी गलियारों में मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलों ने भी अचानक जोर पकड़ लिया है। हालांकि, सरकार की तरफ से अभी तक कैबिनेट फेरबदल को लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बैठक में सभी केंद्रीय मंत्रियों के साथ सरकार के अब तक के कामकाज की कड़ी समीक्षा की जाएगी। खास तौर पर नीतियों को जमीन पर उतारने की रफ्तार, सरकारी योजनाओं की प्रगति, मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल और आम जनता तक सरकारी सेवाओं की आसान पहुंच जैसे गंभीर मुद्दों पर खुलकर चर्चा होने की पूरी संभावना है।
दो दिन चलेगी महा-बैठक, समूहों में बंटेगी मंत्रियों की टीम
सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी के मुताबिक, यह चिंतन बैठक किसी सामान्य कैबिनेट बैठक से बिल्कुल अलग अंदाज में होगी। इसमें मंत्रियों को अलग-अलग समूहों में बांटकर विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श कराया जाएगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई ऐसे खास समूह बनाए गए हैं, जिनमें मंत्री सुशासन, बेहतर संवाद, प्रशासनिक सुधार और सरकार के कामकाज को और अधिक प्रभावी बनाने जैसे अहम मुद्दों पर मंथन करेंगे।इस बैठक के दौरान कुछ प्रमुख मंत्रालयों की तरफ से अपने कामकाज, सफलताओं और भविष्य की योजनाओं को लेकर विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी दिए जाने की संभावना है। सरकार की मौजूदा योजनाओं की वर्तमान स्थिति, अब तक हासिल किए गए परिणामों और आने वाले महीनों के लिए प्राथमिकताओं पर गहन चर्चा हो सकती है।राजधानी दिल्ली में होने जा रही इस हाई-प्रोफाइल बैठक को सरकार के अब तक के सबसे बड़े प्रशासनिक मंथन के रूप में देखा जा रहा है। बैठक की टाइमिंग और इसकी गंभीरता को देखते हुए सियासी पंडितों ने यह कयास लगाने शुरू कर दिए हैं कि क्या इस विस्तृत समीक्षा के तुरंत बाद मोदी मंत्रिमंडल में कोई बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।
दो दिनों तक चलेगा गहन मंथन और रिपोर्ट कार्ड की तैयारी
यह विशेष ‘चिंतन बैठक’ किसी सामान्य कैबिनेट मीटिंग जैसी बिल्कुल नहीं होगी, बल्कि इसका ढांचा पूरी तरह से अलग और कार्य-उन्मुख रखा गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस दो दिवसीय सत्र के दौरान सभी केंद्रीय मंत्रियों को अलग-अलग विशेष समूहों में विभाजित किया जाएगा। इन समूहों को सुशासन, बेहतर जनसंवाद, प्रशासनिक सुधार और अंतर-मंत्रालयी तालमेल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। इस दौरान कई प्रमुख मंत्रालय अपनी-अपनी योजनाओं की प्रगति, अब तक की सफलताओं और भविष्य के रोडमैप को लेकर पीएम मोदी के सामने विस्तृत प्रेजेंटेशन भी पेश करेंगे।
इस महा-बैठक का मुख्य फोकस क्या रहेगा?
इस चिंतन बैठक का प्राथमिक और सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य सरकार द्वारा बनाई गई नीतियों को धरातल पर तेजी से लागू करना है। प्रधानमंत्री मोदी खुद इस बात का मुआयना करना चाहते हैं कि जनहित में शुरू की गई योजनाओं का वास्तविक लाभ आम नागरिक तक कितनी गति और पारदर्शिता के साथ पहुंच रहा है। बैठक में समय प्रबंधन, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और जनसेवा की डिलीवरी व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उपायों पर गहराई से चर्चा होगी। इसमें केवल पिछले कामकाज का हिसाब-किताब ही नहीं देखा जाएगा, बल्कि आने वाले महीनों के लिए सरकार की प्राथमिकताओं और ठोस कार्ययोजना का खाका भी पूरी तरह तैयार किया जाएगा। चिंतन बैठक में संभावित प्रमुख मुद्दे: मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षाः योजनाओं की प्रगति, लक्ष्य और लंबित कार्य।गवर्नेंस में सुधारः निर्णय लेने की गति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाना
मंत्रालयों के बीच तालमेलः एक से अधिक मंत्रालयों से जुड़े प्रोजेक्ट्स में बेहतर कोऑर्डिनेशन
जनता से संवादः सरकारी योजनाओं और उपलब्धियों को सरल तरीके से लोगों तक पहुंचानाडिजिटल गवर्नेंसः मंत्रालयों की वेबसाइट, डैशबोर्ड और डिजिटल सेवाओं को अधिक यूजर-फ्रेंडली बनाना।
2021 की सिफारिशों की समीक्षाः किन निर्देशों पर अमल हुआ और किन पर काम बाकी है।अगले चरण का एजेंडाः तीसरे कार्यकाल के शेष समय के लिए सरकार की प्राथमिकताओं और सुधारों की दिशा। पिछले कार्यकाल में हुआ था चिंतन शिविर: 2021 के चिंतन शिविर से जुड़ी सिफारिशों पर भी इस बार फोकस रहेगा। वहीं इससे पहले भी इसी वर्ष जून में भी मंत्रियों के साथ रिव्यू बैठक की गई थी जो चार घंटे चली थी। हाल में राज्यमंत्रियों के साथ भी रिव्यू किया गया था। सचिवों के साथ भी दो राउंड में सरकारी विभागों के कामकाज की समीक्षा की जा चुकी है। अब आगामी बैठक के लिए मंत्रालयों से पिछली बैठक में तय बिंदुओं पर हुई कार्रवाई का विवरण मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। उस समय मंत्रालयों में लाइव डैशबोर्ड, नियमित प्रगति समीक्षा और कर्मचारियों से फीडबैक लेने जैसे निर्देश दिए गए थे।सरकारी काम में जनभागीदारी पर चर्चा: हाल ही प्रधानमंत्री ने मंत्रालयों और विभागों की आधिकारिक वेबसाइटों को अधिक यूजर-फ्रेंडली बनाने पर भी जोर दिया था। ऐसे में इस बार सरकार के कामकाज के साथ जनता तक सरकारी योजनाओं और उपलब्धियों की पहुंच तथा संवाद व्यवस्था भी चर्चा का हिस्सा बन सकती है। प्रधानमंत्री मोदी लगातार नवाचार और कामकाज में जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।संभावित कैबिनेट फेरबदल की अटकलें क्यों : परफॉर्मेंस रिव्यू: मंत्रालयों के कामकाज और योजनाओं की प्रगति की समीक्षा को फेरबदल की अटकलों से जोड़कर देखा जा रहा है। सितंबर की शुरुआत में प्रधानमंत्री की मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा संबंधी बैठकें भी हुई थीं।-कार्यकाल का मध्य चरण: मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का लगभग मध्य समय है। ऐसे में सरकार की अगली प्राथमिकताओं के अनुरूप जिम्मेदारियों में बदलाव की संभावना को लेकर चर्चा है। 2021 में फेरबदल के बाद चिंतन : पिछला राष्ट्रीय स्तर का चिंतन शिविर अक्टूबर 2021 में हुआ था और उससे पहले जुलाई 2021 में बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार हुआ था। मौजूदा चिंतन बैठक को सीधे कैबिनेट फेरबदल की प्रक्रिया मानने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। खाली हैं जगह, मंत्रियों के पास ज्यादा विभाग: कैबिनेट मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान, राज्य मंत्री जार्ज कुरियन, रवनीत सिंह बिट्टू के इस्तीफा देने से जगहें खाली हुई हैं। वहीं कई मंत्रियों के पास एक से ज्यादा विभागों का काम है। अभी केन्द्र में पीएम सहित 69 मंत्री हैं। यह संख्या 81 तक हो सकती है।
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