- क्या दुर्गा पूजा पर पश्चिम बंगाल आएगी पद्मा इलिश ?
बांग्लादेश बोर्डर से अशोक झा: बांग्लादेश ने बीते हफ्ते 103 NOC रद्द करके भारत से हिलसा मछली का आयात रोक दिया है। हिलसा बीते हफ्ते तब चर्चा में आ गई, जब बांग्लादेश ने भारत से इस मछली के आयात को रोक दिया। ढाका ने गुजराती हिलसा ना लेने पर फैसला लिया है तो इससे ये सवाल भी पैदा हो गया है कि क्या इस साल पद्मा की हिलसा पश्चिम बंगाल आ पाएगी। दुर्गा पूजा के करीब आने के साथ ही बंगालियों के मन में बांग्लादेश से हिलसा के आने को लेकर संशय बढ़ रहा है। यह इसलिए क्योंकि बांग्लादेश ने अभी तक भारत को त्योहारों के मौसम में अपनी पारंपरिक हिलसा मछली के निर्यात की मंजूरी नहीं दी है। हिलसा बंगाल की संस्कृति में गहरे तक है। हिलसा मछली का बांग्लादेश से गहरा नाता है, खासकर पद्मा-मेघना नदी प्रणाली से मिलने वाली मछली की बहुत अहमियत है।भारत में भी हिलसा मछली पकड़ने का काम होता है, जिसमें गुजरात भी शामिल है। पिछले दो महीनों में भारतीय हिलसा मछली बेनापोल जमीनी बंदरगाह के जरिए बांग्लादेश पहुंच रही थी। हालांकि जल्दी ही इसके स्वाद पर बांग्लादेश में सवाल उठे और बीते हफ्ते इसका आयात रोक दिया गया।बांग्लादेश ने भारत से हिलसा मछली के आयात पर रोक क्यों लगाई?
बांग्लादेश ने 23 सितंबर को भारत से हिलसा मछली के आयात पर रोक लगाई क्योंकि गुजरात के नर्मदा इलाके से आई हिलसा का स्वाद स्थानीय लोगों को पसंद नहीं आया। उन्हें लगा कि यह मछली असली पद्मा हिलसा नहीं है, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ।
बांग्लादेश का हिलसा पर फैसला: यह कोई नया द्विपक्षीय समझौता नहीं था, जिसके तहत भारत और बांग्लादेश ने अपने पारंपरिक हिलसा व्यापार को उलटने का फैसला किया हो। बांग्लादेशी रिपोर्टों से पता चलता है कि स्थानीय व्यापारियों ने घरेलू उपलब्धता को लेकर चिंताओं के बीच बांग्लादेश में हिलसा आयात करने की अनुमति मांगी थी और मत्स्य विभाग ने आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी किए थे। बांग्लादेश के मत्स्य मंत्री मोहम्मद अमीन उर रशीद के हवाले से बांग्लादेशी मीडिया में कहा गया है कि उन्हें शुरू में इस बात की जानकारी नहीं थी कि भारतीय हिलसा आयात की अनुमति दी गई थी। जब मंत्री को मंजूरी के बारे में पता चला, तो उन्होंने सवाल किया कि आयात की अनुमति क्यों दी गई और निर्देश दिया कि आगे भारतीय हिलसा आयात की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
पूजा के समय मिलने वाली हिलसा पर सवाल: इस घटनाक्रम का समय पश्चिम बंगाल के लिए खासतौर से दिलचस्प है। बांग्लादेश लंबे समय से हिलसा के निर्यात पर रोक लगाए हुए है लेकिन दुर्गा पूजा पर वह खास छूट देता रहा है, जिससे कुछ मात्रा में हिलसा भारत भेजी जा सके। यह व्यवस्था एक तरह की सालाना रस्म बन गई है। पूजा नजदीक है तो फिर से यह सवाल है कि क्या ढाका से हिलसा कोलकाता आएगी। बांग्लादेश के वाणिज्य मंत्रालय ने पिछले वर्षों में ऐसी विशेष निर्यात अनुमतियां जारी की थीं। हालांकि 2026 के लिए भारत को हिलसा निर्यात करने की ऐसी कोई अनुमति अभी तक घोषित नहीं की गई है। यह भी सवाल है कि क्या भारतीय हिलसा ' पद्मा इलिश ' की जगह ले सकती है तो बंगालियों का साफतौर पर कहना है कि असल में यह नहीं हो सकता है।
क्यों खास है पद्मा हिलसा
गुजरात की हिलसा और बांग्लादेश की हिलसा भले ही एक ही प्रजाति की हों लेकिन 'पद्मा इलिश' की अपनी एक अलग पहचान और मूल स्थान है। बंगालियों के लिए, खासकर पूजा के समय का आकर्षण सिर्फ थाली में कोई भी हिलसा होना नहीं है। इसीलिए बांग्लादेश की हिलसा के पश्चिम बंगाल पहुंचने की संभावना एक अलग सवाल बनी हुई है। बंगाल में नजर इस पर है कि क्या दुर्गा पूजा के समय पद्मा इलिश आएगी। पूजा नजदीक आ रही है लेकिन बांग्लादेश ने इसका जवाब नहीं दिया है। भारत को हिल्सा मछली क्यों नहीं मिलेगी?: मछली के आयात पर लगी इस अचानक रोक की पुष्टि बंगाल और हावड़ा होलसेल फिश मार्केट के फिश इम्पोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव सैयद अनवर मकसूद ने की। मकसूद ने कहा, "उन्होंने अचानक भारत से आयात बंद कर दिया है।23 सितंबर को एक सर्कुलर के जरिए उनके देश में सभी परमिट रद्द कर दिए गए थे। बांग्लादेश इस साल हिल्सा के आयात की अनुमति नहीं दे रहा है और अब समय भी निकल चुका है। उनके अनुसार, बांग्लादेश सरकार हर साल दुर्गा पूजा से ठीक पहले (15 से 20 सितंबर के बीच) हिल्सा के आयात की अनुमति देने की घोषणा करती है और इसकी मात्रा भी तय करती है। मकसूद ने बताया, "इस साल के लिए अब समय निकल चुका है। बांग्लादेश में मछुआरे हिल्सा पकड़ना बंद कर देंगे, इसलिए हमारे पास आयात करने का समय नहीं बचा है।हिल्सा सीमा के दोनों ओर बंगाली सांस्कृतिक परंपराओं का एक अहम हिस्सा है. मकसूद ने इस स्थिति को "दुर्भाग्यपूर्ण" बताते हुए कहा कि भारत में पद्मा नदी की हिल्सा की बहुत मांग रहती है, लेकिन इस बार यह उपलब्ध नहीं होगी. दिलचस्प बात यह है कि बांग्लादेश में हालिया राजनीतिक उथल-पुथल और कार्यवाहक सरकार के दौरान भी भारत को हिल्सा आयात करने की अनुमति थी.
बांग्लादेश ने पहली बार 2012 में भारत को हिल्सा के निर्यात पर रोक लगाई थी. हालांकि, 2019 से त्योहारी सीज़न के दौरान यह रोक कुछ समय के लिए हटा दी जाती थी. मकसूद ने कहा, "लेकिन अब हमें लग रहा है कि दुर्गा पूजा से पहले आयात का जो छोटा सा मौका था, वह भी खत्म हो गया है."
IE की रिपोर्ट के मुताबिक, फिश इम्पोर्टर्स एसोसिएशन ने अगस्त में बांग्लादेश के वाणिज्य सचिव अताउर रहमान खान से ढाका में मुलाकात कर निर्यात पर लगी रोक हटाने की अपील भी की थी. वहीं, पेट्रापोल क्लियरिंग एजेंट्स स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव कार्तिक चक्रवर्ती ने बताया, "पेट्रापोल के जरिए भारत से बांग्लादेश को हिल्सा का जाना बंद हो गया है और वहां से आयात की अनुमति मिलने की संभावना भी कम है. हमें नहीं पता कि यह फैसला क्यों लिया गया, लेकिन ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है।भारत ने बांग्लादेश को हिल्सा मछली का निर्यात क्यों किया?
इस साल बांग्लादेश में मछली का उत्पादन कम हुआ है. नतीजतन, वहां के मछली व्यापारी लोकप्रिय हिल्सा की घरेलू मांग को पूरा करने के लिए भारत का रुख कर रहे थे. मकसूद ने बताया कि ज़्यादातर मछली गुजरात से मंगाकर भरूच बंदरगाह के ज़रिए भेजी गई थी, जबकि कुछ सप्लाई पश्चिम बंगाल की हावड़ा थोक मछली मंडी से हुई थी.
गुजरात की हिल्सा में अंडे (रो) ज़्यादा होते हैं, इसलिए भारतीय बाज़ार में इसकी मांग कम है. लेकिन बांग्लादेशी खरीदारों, खासकर चट्टोग्राम और सिलहट जैसे शहरों में, अंडों वाली इस हिल्सा की बहुत मांग है. बांग्लादेश में इन अंडों को अलग से बेचा जाता है या प्रोसेस करके दूसरे देशों में फिर से निर्यात किया जाता है.
आंकड़ों में हिल्सा का व्यापार
सितंबर 2019: भारत ने बांग्लादेश से 500 मीट्रिक टन हिल्सा मंगाई थी.
सितंबर 2020: यह आंकड़ा बढ़कर 1,850 मीट्रिक टन हो गया.
सितंबर 2021: आयात 1,200 मीट्रिक टन रहा.
2022: यह आंकड़ा 1,300 मीट्रिक टन था.
2023 - 2024: पिछले साल आयात 587 मीट्रिक टन था। रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2024 में 577 मीट्रिक टन हिल्सा भारत पहुंची, जबकि पिछले साल (कुछ समय के लिए) यह गिरकर 150 मीट्रिक टन रह गया था। वर्तमान स्थिति: भारत ने पिछले दो महीनों में पेट्रापोल लैंड पोर्ट के जरिए बांग्लादेश को 500 मीट्रिक टन हिल्सा भेजी है।
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