- सिलीगुड़ी में कल मनाया जाएगा उनका जन्मशताब्दी समारोह
- सिक्किम के राज्यपाल और विहिप के केंद्रीय सचिव अशोक तिवारी करेंगे संबोधित
- सिंघल उस दौर के इंजीनियर थे जब देश साक्षरता के लिए संघर्ष कर रहा था
- छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में 16 वीं सदी की विवादित बाबरी मस्जिद ढहाई
- 1950 में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के ‘इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी’ से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री किया प्राप्त
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: हिन्दू हृदय सम्राट अशोक सिंघल, हिंदुत्व का वह फायरब्रांड नाम जिसने रामजन्मभूमि आंदोलन को जन्म दिया। जिसने 1964 में कुछ हिंदू नेताओं को साथ लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) नाम का संगठन खड़ा किया। जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर उनके जीवन, कार्यों और सांस्कृतिक योगदान को स्मरण करने के लिए सिलीगुड़ी में विहिप की ओर से जन्मशताब्दी समारोह 27 सितंबर यानि कल मनाया जाएगा। इसमें मुख्य अतिथि सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर और मुख्यवक्ता विहिप के राष्ट्रीय सचिव अशोक तिवारी मौजूद रहेंगे। इसकी जानकारी देते हुए विश्व हिन्दू परिषद के प्रवक्ता सुशील रामपुरिया,प्रांत सचिव लक्ष्मण वंशल और जिला संयोजक अधिवक्ता सुदीप्त मजूमदार ने कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा की जानकारी दी। बताया कि यह कार्यक्रम सेवक रोड स्थित टूरिस्ट इन होटल के सभागार में संपन्न होगा। कार्यक्रम में उनकी जीवनी पर बने स्मृति से जुड़ी फिल्मों को प्रदर्शित किया जाएगा। कार्यक्रम में उत्तर बंगाल प्रांत के सिक्किम, दार्जिलिंग कलिम्पोंग हिल्स के साथ सभी जिलों से विहिप और बजरंग दल के प्रतिनिधि भाग लेंगे। इसके साथ ही सनातन संस्कृति से जुड़े विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम ठीक 2 बजे से प्रारंभ होकर शाम 5बजे समाप्त होगा। प्रवक्ता सुशील रामपुरिया ने बताया कि अशोक सिंघल, हिंदुत्व का वह फायरब्रांड नाम जिसने रामजन्मभूमि आंदोलन को जन्म दिया. जिसने 1964 में कुछ हिंदू नेताओं को साथ लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) नाम का संगठन खड़ा किया। वह अपने अंतिम समय में अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्य कर रहे थे। उन्होंने विहिप को सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी ख्याति दिलवाने का काम किया है। सिंघल उस दौर के इंजीनियर थे जब देश साक्षरता के लिए संघर्ष कर रहा था। लेकिन जब पेशा चुनने की बात आई तो उन्होंने हिंदुत्व का एजेंडा चुना। वीएचपी का अंतरराष्ट्रीयकरण उन्होंने ही किया और विदेश में दफ्तर बनाए। 20 साल तक इसके अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे। जब तक जिये अपने संगठन के संरक्षक बनकर जिये। लंबी बीमारी के बाद मंगलवार को गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में उनका निधन हो गया। वह 89 साल के थे। 1984 में नई दिल्ली के विज्ञान भवन में पहली धर्म संसद का आयोजन सिंघल ने ही किया था। इसमें सैकड़ों साधुओं और हिंदू नेताओं ने हिस्सा लिया था। रामजन्मभूमि आंदोलन का जन्म इसी धर्म संसद के दौरान हुआ था। इसके बाद जब-जब बीजेपी की सरकार रही हिंदुत्व का एजेंडा आगे आता रहा। दक्षिणपंथी तेजतर्रार नेता सिंघल ने अपना जीवन हिंदुत्व के मुद्दे पर समर्पित किया। सिंघल का 'कार सेवक' अभियान में भी महत्वपूर्ण योगदान था। इसी अभियान के चलते छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में 16 वीं सदी की बाबरी मस्जिद ढहाई गई। आगरा में 1926 को जन्मे सिंघल ने वर्ष 1950 में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के ‘इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी’ से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की थी।वह वर्ष 1942 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गये थे लेकिन स्नातक की पढाई पूरी करने के बाद वह पूर्णकालिक प्रचारक बने. उन्होंने उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर काम किया और दिल्ली तथा हरियाणा के प्रांत प्रचारक बने। वर्ष 1980 में उन्हें विहिप में जिम्मेदारी देते हुए इसका संयुक्त महासचिव बनाया गया. वर्ष 1984 में वह इसके महासचिव बने और बाद में इसके कार्यकारी अध्यक्ष का पद सौंपा गया. इस पद पर वह दिसंबर 2011 तक रहे। वह जीवनभर आरएसएस की विचारधारा से प्रेरित रहे और संघ परिवार के प्रमुख सदस्य रहे। मौका और दस्तूर दोनों है कि आप सभी आकर उन्हें उनके कार्यों के लिए उनके प्रेरक बने। इस कार्यक्रम को सफल बनाएं।
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