- एक का नाम चैतन्य और दूसरे का नाम सुलक्षणा रखा
- 100 करोड़ के वन्यजीवों के अंगों को मंत्रोच्चारण के साथ किया आग के हवाले
अशोक झा/ कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अलीपुरद्वार में विश्व गैंडा दिवस कार्यक्रम में भाग लेने के बाद जलदापारा में दो हाथियों का नामकरण किया। दोनों शावक का नाम चैतन्य और सुलक्षणा रखा गया है। पत्रकारों से बात करते हुए अधिकारी ने बताया कि वन अधिकारियों के साथ कई विकल्पों पर चर्चा करने और उनके माता-पिता के नामों को ध्यान में रखते हुए ये नाम चुने गए हैं।उन्होंने कहा, "परंपरा का पालन करते हुए, एक हाथी के बच्चे का नाम चैतन्य और दूसरे का नाम सुलक्षण रखा गया है।"मुख्यमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में पत्रकारों से पूछा, "क्या आप इसके पीछे कोई और अर्थ निकाल रहे हैं?
बंगाल में वन विभाग की ओर से जलपाईगुड़ी के जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में लंबे समय से जब्त किए गए वन्यजीवों के अंगों को नष्ट किया गया। करीब 142 किलोग्राम वजन वाले गैंडे के सींग, हाथी दांत और अन्य वन्यजीव अंग को जलाकर नष्ट कर दिया गया।वन विभाग के अनुसार जब्त सामग्री की अनुमानित कीमत करीब 100 करोड़ रुपये थी। संस्कृत मंत्रोच्चार के बीच इन जब्त वन्यजीव अंगों का दहन किया गया। वन विभाग ने बताया कि जब्त सामग्री को नष्ट करने का उद्देश्य अवैध वन्यजीव व्यापार के खिलाफ सख्त संदेश देना है। साथ ही समाज में फैली उस धारणा को खत्म करना है कि गैंडे के सींग या हाथी दांत जैसी वस्तुओं की कोई आर्थिक अथवा औषधीय उपयोगिता होती है। वन्यजीवों के अंगों की मांग ही शिकार और तस्करी को बढ़ावा देती है।इस मौके पर बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने वन्यजीवों के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि जंगल और वन्यजीव प्राकृतिक संपदा हैं। उन्होंने अधिकारियों को शिकारियों और तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों की हत्या कर उनके अंगों को ऊंची कीमत पर बेचने की गतिविधियों को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
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