- 2.20 करोड़ का था इनाम, शीर्ष माओवादी कामांडर असीम मंडल उर्फ आकाश, उर्फ तिमिर, उर्फ मनोज की कुछ ऐसे हुई गिरफ्तारी
- जिसे जब चाहे मौत का फरमान सुनाने वाला असीम हुआ बेबस, उम्र ढलते ही दस्ता और हथियार छूटे
अशोक झा/कोलकाता: दशकों तक माओवादी संगठन में सक्रिय रहे और सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बने नक्सली असीम मंडल उर्फ आकाश को बंगाल एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया गया है। असीम मंडल पर 2.20 करोड़ का इनाम था। असीम मंडल ने वर्ष 2000 के बाद झारखंड-बंगाल सीमा के दलमा क्षेत्र, पटमदा, बोड़ाम, एमजीएम, गालूडीह, घाटशिला, धालभूमगढ़, चाकुलिया और दक्षिण क्षेत्र के गुड़ाबांदा-डुमरिया तक अपनी पैठ बनायी थी। वर्ष 2003-2004 आते-आते संगठन में उसका प्रभाव तेजी से बढ़ा। पहले वह जोनल सचिव बना और बाद में बंगाल स्टेट कमेटी का कमान संभाला। पूर्वी सिंहभूम के इन बीहड़ इलाकों में उसने लाल आतंक बरपाया। वह खुद हमेशा अपने पास एके-47 राइफल रखता था। सटीक निशाना लगाने में माहिर माना जाता था। दो दशकों से अधिक समय तक इस क्षेत्र को दहलाने के बाद वर्ष 2018 में एमजीएम के डालापानी में सीआरपीएफ के साथ हुई मुठभेड़ के बाद इलाके को छोड़कर सारंडा भाग गया था। उस समय उसकी टीम में 15 सक्रिय नक्सली सदस्य थे।
2011 में माओवादी नेता किशन की मौत के बाद बंगाल में संगठन की जिम्मेदारी संभालने के बाद से ही असीम मंडल सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था। कोलकाता एसटीएफ ने असीम मंडल को पूर्वी मेदनीपुर के ललाट गांव से गुरुवार को गिरफ्तार किया।असीम मंडल सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सदस्य और पश्चिम बंगाल राज्य समिति-I का सचिव बताया जाता है। वो करीब चार दशक से अधिक समय से पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा के जंगल क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियों से बचता रहा था। माओवादी साहित्य और इलेक्ट्रॉनिक संचार उपकरण
पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद असीम मंडल के पास से दो बैग बरामद किए गए हैं। इनमें माओवादी साहित्य, किताबें, पुस्तिकाएं और इलेक्ट्रॉनिक संचार उपकरण मिले हैं।
पत्नी को 2010 में किया गया था गिरफ्तार
जांच अधिकारियों ने बताया कि असीम मंडल की पत्नी पटाशपुर क्षेत्र की रहने वाली है और कथित तौर पर सीपीआई (माओवादी) की कार्यकर्ता है। उसे कोलकाता पुलिस एसटीएफ ने वर्ष 2010 में गिरफ्तार किया था। वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा से माओवादियों का सफाया: पुलिस अधिकारियों का मानना है कि ये गिरफ्तारी पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा के आदिवासी एवं जंगल इलाकों में सक्रिय वामपंथी उग्रवादी नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में एक बड़ी सफलता है। असीम मंडल की गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना के लिए पहले 2.20 करोड़ रुपए के इनाम की घोषणा भी की गई थी।छात्र जीवन से वामपंथी उग्रवादी गतिविधियों से जुड़ गया था असीम मंडल: पश्चिम मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोणा थाना क्षेत्र के फुलचक गांव के रहने वाले असीम मंडल के बारे में बताया जाता है कि वो 1980 के दशक में छात्र जीवन के दौरान वामपंथी उग्रवादी गतिविधियों से जुड़ गया था।। पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोना थाना क्षेत्र के उत्तर फुलचुक का रहने वाला असीम 1980 के दशक में कॉलेज का छात्र था। इसी दौरान वह माओवादी गतिविधियों के संपर्क में आयाष। धीरे-धीरे वह संगठन में सक्रिय होता गया और बाद में हथियारबंद दस्ते का हिस्सा बन गया।बाद में वह पीपुल्स वॉर ग्रुप में शामिल हो गया और पश्चिम बंगाल के सारेंगा और गोयालतोर क्षेत्रों के साथ-साथ झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के गुराबांदा क्षेत्र में सक्रिय रहा।असीम मंडल पर दर्जनों आपराधिक मामले दर्ज: सुरक्षा एजेंसियों के रिकॉर्ड के अनुसार, उसके खिलाफ झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में करीब 55 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से कई मामले सुरक्षा बलों पर हमलों और मुठभेड़ों से जुड़े हैं।
वर्ष 2011 में किशनजी के मारे जाने के बाद भूमिगत:
असीम मंडल ने पश्चिम बंगाल के जंगलमहल क्षेत्र में हुए लालगढ़ आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वर्ष 2010 में उसे पार्टी की पश्चिम बंगाल राज्य समिति का सचिव बनाया गया था। साथ ही वह बंगाल-झारखंड-ओडिशा क्षेत्रीय समिति में भी अहम जिम्मेदारियां संभालता था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2011 में वरिष्ठ माओवादी नेता किशनजी के मारे जाने के बाद असीम मंडल ज्यादातर समय भूमिगत रहकर काम कर रहा था।गांव में जारी है सर्च ऑपरेशन
बताया गया है कि असीम आम ग्रामीण बनकर रह रहा था। वहीं, गांव में अभी भी सर्च ऑपरेशन जारी है। पुलिस को सूचना मिली है कि असीम ने हथियार भी गांव में ही छिपाकर रखा था। पुलिस हथियार बरामद करने के लिए सर्च ऑपरेशन चला रही है। किशन की मौत के बाद मिली थी बंगाल की जिम्मेदारी:
वर्ष 2011 में माओवादी नेता किशन की मौत के बाद असीम मंडल को बंगाल में संगठन की जिम्मेदारी मिली थी। इसके बाद उसकी संगठनात्मक सक्रियता और बढ़ गई। सुरक्षा एजेंसियां लगातार उसकी तलाश में जुटी रहीं। बताया जाता है कि असीम मंडल झारखंड में सक्रिय माओवादी संगठन के कई बड़े नेताओं के संपर्क में रहा था। सुरक्षा बलों के खिलाफ हिंसक गतिविधियों और संगठन के लिए लेवी वसूली से जुड़े मामलों में भी उसका नाम सामने आता रहा। झारखंड में एक करोड़ और ओडिशा में 1.20 करोड़ का इनाम: असीम मंडल पर झारखंड सरकार की ओर से एक करोड़ रुपए का इनाम घोषित था। वहीं, ओडिशा सरकार ने भी उसके ऊपर 1.20 करोड़ रुपये का इनाम रखा था। इस तरह असीम मंडल पर कुल 2.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। वह लंबे समय से झारखंड और ओडिशा में सुरक्षा एजेंसियों के लिए वांछित माओवादी नेताओं में शामिल रहा। झारखंड में माओवादी संगठन पर सुरक्षा बलों के लगातार अभियान के बीच संगठन के बचे हुए सदस्यों के दूसरे राज्यों में जाने की बात भी सामने आती रही है।रंजीत और झरना का सरेंडर : उसके पतन की शुरुआत 25 जनवरी 2017 को हुई, जब असीम की टीम से अलग होकर सांसद सुनील महतो हत्याकांड के मुख्य शूटर रंजीत पाल उर्फ राहुल और उसकी नक्सली पत्नी झरना ने हथियारों के साथ कोलकाता पुलिस मुख्यालय में आत्मसमर्पण कर दिया।
दिग्गजों की गिरफ्तारी और सरेंडर : इसके बाद बंगाल में 15 लाख की इनामी बेला की गिरफ्तारी, दलमा तराई में 15 लाख के इनामी मदन महतो, 5 लाख के इनामी सागर उर्फ विरेन सिंह, दो लाख की इनामी मीना और डॉक्टर प्रदीप मंडल का पकड़ा जाना संगठन के लिए बड़े झटके साबित हुए। वहीं, बंगाल में हथियार के साथ पुष्पा उर्फ शकुंतला के सरेंडर के बाद 15 लाख के इनामी राम प्रसाद मार्डी उर्फ सचिन, 5 लाख के इनामी मीता और 2 लाख की इनामी बुलू ने भी आत्मसमर्पण कर दिया. इन सबके बीच हार्डकोर नक्सली श्याम सिंकू की बीमारी से मौत हो गयी, जबकि प्रकाश उर्फ अतुल और समीर सोरेन मुठभेड़ में मारे गये. इन तमाम घटनाओं ने असीम मंडल की कमर तोड़ दी।
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