-मुख्यमंत्री का आह्वान अगले एक साल में पश्चिम बंगाल में विद्या भारती के स्कूलों की संख्या एक हजार के हो पार
- बंगाल में विद्या भारती के अंतर्गत वर्तमान में तीन सौ से अधिक विद्यालय हो रहे संचालित
अशोक झा/ कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत अखिल भारतीय संस्था विद्या भारती के स्कूलों की संख्या बढ़ने पर जोर दिया है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि राज्य में सही समय पर बदलाव हुआ, वरना कुछ और समय तक पिछली शिक्षा व्यवस्था जारी रहती तो बंगाल की संस्कृति, परंपरा, विरासत और देशभक्ति खत्म हो जाती। आज गुरुवार को गोलपार्क स्थित रामकृष्ण मिशन इंस्टिट्यूट ऑफ़ कल्चर सभागार में आयोजित विद्या भारती की स्थानीय शाखा विवेकानंद विद्या विकास परिषद के वार्षिकोत्सव को मुख्यमंत्री ने संबोधित किया। इस कार्यक्रम में बंगाल भर से जुड़े पदाधिकारियों ने कोलकोता पहुंचे। सिलीगुड़ी से सीताराम डालमिया, गौरी शंकर गोयल और सुशील रामपुरिया ने भी भाग लिया। कार्यक्रम में
मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि अगले एक साल में पश्चिम बंगाल में विद्या भारती के स्कूलों की संख्या एक हजार के पार होने पहुंच जानी चाहिए। उन्होंने संस्थान के पदाधिकारियों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार उन्हें हर तरह से सहयोग करेगी। उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में विद्या भारती के अंतर्गत वर्तमान में तीन सौ से अधिक विद्यालय संचालित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व की सरकारों ने अपने राजनीतिक हितों के लिये राज्य के शिक्षांगन को प्रदूषित किया था। वाम शासन काल में अंग्रेजी और कंप्यूटर शिक्षा को बाधित किया गया तो तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने जालसाजी, भ्रष्टाचार और पाठ्यक्रमों से छेड़छाड़ कर राज्य की शिक्षा व्यवस्था को बदहाली के कगार पर पहुंचा दिया। उन्होंने कहा कि राज्य की पूर्ववर्ती सरकारों ने के कार्यकाल में जिस प्रकार की शिक्षा दी जा रही थी उसकी बदौलत नई पीढ़ी में संस्कार राष्ट्रवाद जैसी भावनाएं बलवती करना संभव नहीं था। उस दौरान पाठ्यक्रम में मुगल शासको की गाथाएं तो उपलब्ध थी लेकिन डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जिक्र नहीं था। पाठ्यक्रम में सिंगूर और टाटा नैनो के प्रसंग तो मिल जाते थे लेकिन स्वामी विवेकानंद और स्वामी प्रणवानंद जैसे महापुरुषों के संदेश पढ़ने नहीं मिलते थे। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने पाठ्यक्रमों में अनावश्यक और मानवीय बदलाव और पैसों के एवज में अयोग्य शिक्षकों की नियुक्ति कर शिक्षांगन को कलंकित किया। उन्होंने यह बात गोलपार्क में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठन विद्या भारती के एक कार्यक्रम में कही। कम्युनिस्टों पर बंगाली भाषा के प्रचार-प्रसार में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके शासन के दौरान अंग्रेजी की पढ़ाई पर भी रोक जैसी स्थिति थी और बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा से वंचित रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के अंतिम 10 वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को इस तरह चलाया गया कि उससे राज्य की संस्कृति और परंपरा पर प्रतिकूल असर पड़ा। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पिछली शिक्षा व्यवस्था में बच्चों के मन में विभाजन पैदा करने की कोशिश की गई। उन्होंने दावा किया कि पाठ्यक्रम में शब्दों और भाषा के साथ बदलाव किए गए। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कक्षा 5 से 8 तक मुस्लिम विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जाती थी, जबकि हिंदू, बौद्ध, सिख और ईसाई विद्यार्थियों को इस सुविधा से वंचित रखा गया।उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ने सही समय पर बदलाव किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, अगर ऐसा नहीं होता तो राज्य की शिक्षा व्यवस्था और बांग्लादेश की इस्लामी शिक्षा व्यवस्था के बीच कोई अंतर नहीं रह जाता। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद राज्य को राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जोड़ा गया और प्रार्थना में पूर्ण वंदे मातरम को अनिवार्य किया गया। मुख्यमंत्री ने विद्या भारती द्वारा संचालित विद्यामंदिरों की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि अगले एक वर्ष में राज्य में विद्यामंदिरों की संख्या बढ़ाकर एक हजार करने का लक्ष्य रखा जाना चाहिए। इसके लिए जिलों, प्रखंडों और पंचायत स्तर तक विद्यामंदिरों का ढांचा तैयार करने की जरूरत है।
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