-'आप सांसद सदस्य हैं? राजनीति में उतरने के बाद आपको अंडों से डर लगता है?
- अदालत ने पूछा, 'वर्चुअली क्यों? क्योंकि आप सांसद हैं?'
अशोक झा/ कोलकाता: सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने पुलिस के सामने वर्चुअली (ऑनलाइन) पेश होने की अनुमति देने का निर्देश देने की मांग की थी। मोइत्रा ने अपनी याचिका में आशंका जताई थी कि अगर वह पुलिस थाने जाती हैं तो उन पर अंडे फेंके जा सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने सांसद की चिंताओं को खारिज कर दिया। जस्टिस दत्ता ने कहा, 'आप सांसद सदस्य हैं? राजनीति में उतरने के बाद आपको अंडों से डर लगता है? जबकि हमारे आज़ादी की लड़ाई लड़ने वालों ने सीने पर गोलियां खाई थीं? ऐसी अर्जियां इस कोर्ट के सामने बिल्कुल नहीं आनी चाहिए।' कृष्णानगर से सांसद मोइत्रा के खिलाफ पश्चिम बंगाल पुलिस ने एक भाजपा नेता की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है।यह शिकायत सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए दो वीडियो में उनकी टिप्पणियों को लेकर की गई थी, जिसके बाद कथित तौर पर भाजपा समर्थक कृष्णानगर में एक कोर्ट के बाहर उन पर अंडे और टमाटर फेंकने के लिए जमा हुए थे। इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने मोइत्रा की एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका पर उन्हें अंतरिम संरक्षण दिया था और उन्हें 14 अगस्त को जांच अधिकारी (आईओ) के सामने पेश होने का निर्देश दिया था। मोइत्रा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि सांसद को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जांच अधिकारी के सामने पेश होने की अनुमति दी जानी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग पर सवाल उठाया। अदालत ने पूछा, 'वर्चुअली क्यों? क्योंकि आप सांसद हैं?' इस पर शंकरनारायणन ने कहा, 'कानून के तहत मुझे इसका अधिकार है. पुलिस के नोटिस के अनुसार मुझे अपने ही निर्वाचन क्षेत्र के पुलिस थाने में उपस्थित होना है. पिछली बार जब मैं वहां गई थी, तब दो चीजें हुई थीं. पहली, धमकी दी गई थी कि अंडे फेंके जाएंगे आदि, और दूसरी बार वास्तव में अंडे फेंके गए थे.'उन्होंने कहा कि मोइत्रा को आशंका है कि अगर वह व्यक्तिगत रूप से पुलिस के सामने पेश होती हैं तो भीड़ उन पर हमला कर सकती है.हालांकि, अदालत इस दलील से संतुष्ट नहीं हुई और कहा कि हाईकोर्ट पहले ही मोइत्रा को जांच एजेंसी के साथ सहयोग करने का निर्देश दे चुका है। अदालत ने कहा, 'चुनौती दिए गए आदेश के पैराग्राफ 19 को पढ़िए। आप पेश नहीं होते हैं और फिर हाईकोर्ट के सामने इसके परिणाम भुगतिए अगर आपको कोई शिकायत है, तो आएं।
इसके बाद शंकरनारायणन ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी।इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को वापस ली गई मानकर खारिज कर दिया। ज्ञात हो कि पिछले महीने मोइत्रा ने कुछ तस्वीरें और वीडियो साझा किए थे, जिनमें उन्होंने कहा था कि अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक पार्टी बैठक करने के दौरान उन्हें बाहर मौजूद भाजपा के झंडे लिए लोगों की ओर से पत्थरों और अंडों से हमले का सामना करना पड़ा।इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी और कुणाल घोष पर भी अंडे फेंके जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
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