- छात्रों की समस्या को लेकर देश में अस्थिरता और अशांति फैलाने की कोशिश
- आज के युवापीढ़ी को शिक्षा के साथ संस्कार राष्ट्र के प्रति समर्पण जरूरी
अशोक झा : आज अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस है।युवा किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत माने जाते हैं, लेकिन क्या सिर्फ बड़ी युवा आबादी होना किसी देश के लिए फायदा पहुंचा सकता है? बड़ी आबादी का फायदा तभी है जब युवाओं को अच्छी शिक्षा, रोजगार, जरूरी हुनर और आगे बढ़ने के बराबर मौके मिले.दुनिया भर से लेकर भारत तक, आंकड़े बताते हैं कि युवाओं के सामने रोजगार का संकट काफी गंभीर है।आज दुनिया गहरे अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष, युद्ध और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने विश्व भर के समाजों को प्रभावित किया है, और भारत भी इससे अछूता नहीं है। ऐसे हालात में युवाओं, विशेषकर मुस्लिम युवाओं का भविष्य को लेकर चिंतित होना स्वाभाविक है। हालांकि, इस्लाम विपत्ति के समय निराशा की शिक्षा नहीं देता। बल्कि, यह अनुयायियों से आशा, धैर्य, ज्ञान और रचनात्मक जुड़ाव बनाए रखने का आह्वान करता है।कोई पत्थर चोट खाके कंकर-कंकर हो गया, और कोई पत्थर चोट सहके शंकर-शंकर हो गया। बंगाल प्रवास के दौरान दीदी मां साध्वी ऋतम्भरा ने कहा कि छोटी-छोटी लपटें अधिक गर्मी नहीं दे सकतीं वैसे ही कमजोर इच्छाशक्ति बड़े नतीजे नहीं दे सकती। जो व्यक्ति प्रतिकूल परिस्थितियों में आगे बढ़ने की चाह रखते हैं, जिन्दगी उन्हीं के आगे सर झुकाती है। इस दुनिया में असंभव कुछ भी नहीं। हम वो सब कर सकते हैं, जो हम सोच सकते हैं और हम वो सब सोच सकते हैं, जो आज तक हमने नहीं सोचा। सबसे पहले अपने अंदर के डर को देखना होगा। उसके प्रभाव को सकारात्मकता से बाहर निकालना होगा और उसके बाद विजन व मिशन तय करके आगे बढ़ना होगा। डर से जीतना बहुत जरूरी है, यह डर नकारात्मकता का है, इसे बाहर निकालना होगा। हमें अपना लक्ष्य निर्धारित कर इच्छाशक्ति अनुसार कार्य करना होगा। कहते हैं, लहरों के डर से नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती। इस मूलमंत्र को हम अपने जीवन में उतार लें तो हर समस्या का समाधान संभव है। मजबूत इच्छा हर उपलब्धि का पहला पायदान है। करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान। रसरी आवत जात तें, सिल पर परत निसान।।जिस प्रकार कुएं से पानी खींचने के लिए बर्तन से बांधी हुई कोमल रस्सी कुएं के किनारे वाले पत्थर से बार-बार रगड़ खाने के बाद पत्थर पर निशान छोड़ देती है, ठीक उसी प्रकार निरंतर परिश्रम, अभ्यास और चेष्टा करते रहने से असाध्य माना जाने वाला कार्य भी सिद्ध हो जाया करता है। बंगाल के हावड़ा में जिस प्रकार युवाओं का ब्रेन वाश किया जा रहा ह राष्ट्र के प्रति जेहाद की बात कर बरगलाया जा रहा है वह ठीक नहीं है। अल्संख्यक मोर्चा के अली हुसैन कहते है कि कुरानकी आयतें हमें याद दिलाती हैं कि कठिनाइयाँ अस्थायी होती हैं, जबकि अल्लाह की दया, सहायता और सफलता उन लोगों को प्राप्त होती है जो दृढ़ और कृतज्ञ बने रहते हैं। इसलिए, धैर्य और कृतज्ञता सफलता की सबसे बड़ी गारंटियों में से हैं।हज़रत अली ने सही कहा:"धैर्य, विश्वास के लिए वैसा ही है जैसा मस्तिष्क शरीर के लिए होता है।"यदि कोई व्यक्ति वास्तव में इस सिद्धांत को अपना लेता है, तो अंततः कोई भी बाधा सफलता और उपलब्धि को रोक नहीं सकती। एक अन्य अवसर पर उन्होंने कहा था: "निराशा सबसे बड़ा अभाव है"।यह शाश्वत मार्गदर्शन हमें सिखाता है कि विश्वासियों को हर परिस्थिति में अल्लाह के प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए और आशा और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ते रहना चाहिए।ये शिक्षाएँ युवाओं को एक सशक्त संदेश देती हैं: परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, निराशा और प्रतिशोध सच्चे विश्वासी का मार्ग नहीं होते। बल्कि, सच्ची सफलता ज्ञान, बुद्धि, धैर्य और अनुकरणीय चरित्र के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में निहित है।अहले बैत (हज़रत अली के वंशज) का जीवन इन्हीं मूल्यों का प्रतीक है। इमाम हसन ने मुस्लिम समुदाय में एकता, शांति और रक्तपात को रोकने को प्राथमिकता दी। इमाम हुसैन ने नैतिकता, न्याय और मानवीय गरिमा के उच्चतम मानकों को कायम रखते हुए अन्याय के विरुद्ध अटूट प्रतिरोध का प्रदर्शन किया। कर्बला का संदेश घृणा का नहीं, बल्कि सत्य, धैर्य, दृढ़ता और मानवीय सम्मान की रक्षा का है। इमाम हुसैन ने प्रसिद्ध रूप से कहा था: "यदि तुम्हारा कोई धर्म नहीं है और तुम परलोक से नहीं डरते, तो कम से कम इस संसार में स्वतंत्र मनुष्य बनो।" दीदी मां साध्वी ऋतम्भरा भी इन दिनों बंगाल प्रवास में है। अपने धार्मिक मंच से देश के युवाओं को स्पष्ट संदेश देतीं आ रही है कि आप गुस्सा, नफरत,आंदोलन करो पर देश के खिलाफ नहीं। राष्ट्र के हित में, राष्ट्र विरोधियों के खिलाफ। उन्होंने कहा कि आज वह युवा ही थे जिन्होंने देश की गुलामी के बंधन से मुक्ति के लिए फांसी के फंदे को चूम लिया था। इसे आज के युवा को समझना होगा। आज का युवा मादकता के वश में अच्छे और बुरे का फर्क करना भूल गई है। इसे समझना होगा।
दुनियाभर के घुमक्कड़ पत्रकारों का एक मंच है,आप विश्व की तमाम घटनाओं को कवरेज करने वाले खबरनवीसों के अनुभव को पढ़ सकेंगे
https://www.roamingjournalist.com/