- बंगाल के मंत्री उमेश राय को लगातार मिल रही धमकियाँ के बाद चल रही थी जांच
- उमेश राय ने कहा कि आतंकियों को पता नहीं कि यह शुभेंदु अधिकारी का बंगाल है
- भाजपा नेताओं को डराने की भूल कर बैठा आतंकी गिरोह
- राज्य के लोगों की सुरक्षा देने वाले भाजपा नेता कार्यकर्ता को सुरक्षा की चिंता नहीं
अशोक झा/ कोलकाता: STF द्वारा जैश-ए-मोहम्मद के एक ऑपरेटिव आतंकी हामिम को गिरफ्तार कर 14 दिनों के रिमांड पर गहन पूछताछ कर रही है। यह गिरफ्तारी ऐसे नहीं हुई। बताया गया कि बंगाल सरकार में शहरी विकास एवं नगर पालिका मामलों के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) उमेश राय को जैश ए मोहम्मद के आतंकी लगातार धमकियां दे रहे थे। इसी धमकियों की जांच पुलिस और एसटीएफ कर रही थी। इसी जांच में संदिग्ध आतंकी की गिरफ्तारी हुई।मंत्री उमेश राय ने आपराधिक तत्वों को वॉर्निंग दी: बर्दवान में पश्चिम बंगाल STF द्वारा जैश-ए-मोहम्मद के एक ऑपरेटिव की गिरफ्तारी पर मंत्री उमेश राय ने कहा कि यह नया पश्चिम बंगाल है। और यहां अलगाववादी और देश विरोधी गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। बंगाल में अब उनका कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा देश के बाहर कई दूसरे देशों को सुरक्षित रखने का काम करती है। आतंकियों और उनके संगठन के लोगों को पता नहीं कि बंगाल का मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी है। जो पूरे राज्य के लोगों की सुरक्षा अपने कंधे पर उठाया है। ममता बनर्जी के कार्यकाल में भले ही आतंकियों घुसपैठियों को संरक्षण मिलता रहा होगा इससे इनकार नहीं है। लेकिन अब बंगाल की भूमि पर उनके पांव टिक नहीं सकते। राय ने बताया कि
पिछले कई दिनों से ऐसी घटनाएं हो रही थी। एक पाकिस्तानी नागरिक पूरे भारत में कई आपराधिक गतिविधियों में शामिल था। अलग-अलग समय पर, वह अलग-अलग तरीकों से लोगों को धमकाता था। मंत्री ने कहा कि मुझे कई इंटरनेशनल कॉल भी आए जिनमें मुझे जान से मारने और मेरे बेटे को किडनैप करने की धमकियां दी गईं। चुकी मै सरकार का हिस्सा था इसलिए प्रेस की बताना ठीक नहीं समझा।हमने इस मामले पर मुख्यमंत्री से बात की थी। पुलिस ने जांच के लिए STF को सौंप दिया। उसी सिलसिले में, इन लोगों को अब गिरफ्तार किया गया है।प्रारंभिक जांच के अनुसार, पश्चिम बंगाल के मंत्री उमेश रॉय को फोन पर मिली कथित धमकी के बाद स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने जांच शुरू की थी। इसी जांच के दौरान बर्दवान से जैश-ए-मोहम्मद से कथित संबंध रखने के आरोप में हामिम नामक एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, हामिद हावड़ा के पिलखाना इलाके में दर्जी का काम करता था और लंबे समय से वहीं रह रहा था। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच में अब तक मिले इनपुट के आधार पर चार अन्य लोगों की संभावित संलिप्तता की भी जांच की जा रही है। हालांकि, उनके खिलाफ अभी आधिकारिक रूप से कोई आरोप तय नहीं किए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियां डिजिटल और अन्य साक्ष्यों की जांच कर पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्ष और आधिकारिक पुष्टि के आधार पर की जाएगी। इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने झारखंड के साहिबगंज जिले से अर्पिता सरकार को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े संदिग्ध हमीम मंडल की करीबी सहयोगी है। सूत्रों के मुताबिक, एसटीएफ ने हमीम मंडल से पूछताछ के दौरान अर्पिता सरकार के उससे कथित संबंधों का पता लगाया, जिसके बाद शुक्रवार रात उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इन सुरागों के आधार पर एसटीएफ की एक टीम साहिबगंज गई और स्थानीय पुलिस की मदद से उसे गिरफ्तार किया। इससे पहले शुक्रवार को हामीम मंडल को पूर्वी बर्दवान जिले के बर्दवान शहर में एक हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के फ्लैट से गिरफ्तार किया गया था। तलाशी के दौरान, एसटीएफ को कथित तौर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के शेड्यूल और गतिविधियों से जुड़े आपत्तिजनक दस्तावेज मिले, जिससे यह शक पैदा हुआ कि वह संभावित टारगेट हो सकते थे। सूत्रों ने बताया कि अर्पिता सरकार की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ इस कथित नेटवर्क के कामकाज में 'हनी-ट्रैपिंग' के एंगल की भी जांच कर रहे हैं। उसे शनिवार को कोलकाता की अदालत में पेश किया जा सकता है, जहां अभियोजन पक्ष आगे की पूछताछ के लिए उसकी पुलिस कस्टडी की मांग करेगा। शुक्रवार को एक निचली अदालत ने हमीम मंडल को 14 दिन की एसटीएफ कस्टडी में भेजा। एसटीएफ ने बताया कि पूछताछ के दौरान अर्पिता सरकार का नाम सामने आया, जिसके बाद साहिबगंज में छापेमारी की गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। एसटीएफ सूत्रों ने यह भी दावा किया कि हमीम मंडल के कश्मीर में सज्जाद भट समूह से सीधे संबंध थे। सज्जाद भट की पहचान 2019 के पुलवामा आतंकी हमले के मुख्य आरोपी के तौर पर हुई थी। जांच टीम को शक है कि हमीम मंडल इस समूह से करीबी तौर पर जुड़ा हुआ था।अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय खुफिया इनपुट के आधार पर केंद्र सरकार समय-समय पर सुवेंदु अधिकारी की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करती रही है और उसे बढ़ाती रही है, क्योंकि इनपुट में चरमपंथी संगठनों से संभावित खतरों का संकेत मिला था।
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