- भारत हर संभव मदद को तैयार,जारी किया हेल्प लाइन नंबर
नेपाल बोर्डर से अशोक झा: भारत के पड़ोसी देश नेपाल से दिल दहला देने वाली खबर आई है। बुधवार को रसुवा जिले में भोटे कोशी नदी में अचानक आई जबरदस्त बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस भीषण हादसे में 98 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और कई सुरक्षाकर्मी लापता भी बताए जा रहे हैं। हजारों लोग लापता है। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्ट्स में मृतकों की संख्या अलग-अलग बताई जा रही है।मालय की गोद में बसे नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार, 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ ने जमकर तबाही मचाई. इस आपदा में अब तक 95 लोगों की जान जा चुकी है. तिब्बत की तरफ से भोटे कोशी नदी में आए पानी के तेज बहाव ने बस्तियों, पुलों और गाड़ियों को पलक झपकते ही तबाह कर दिया। नेपाल पर्यटन बोर्ड (NTB) के अनुसार, इस इलाके में अचानक आई बाढ़ के बाद लापता लोगों में लगभग 105 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। कुल मिलाकर, करीब 400 लोगों के लापता होने की खबर है।100 से ज्यादा लोग लापता हैं. इनमें कई भारतीय भी शामिल हैं. सड़कें और पुल बह गए हैं. बिजली और फोन ठप हैं. कई जवान और पर्यटक लापता हैं. हेलिकॉप्टर से लोगों को बचाया जा रहा है. टिमुरे से त्रिशूली बाजार और बेत्रावती तक बाढ़ के पानी और मलबे ने घर, सड़कें और पुल तबाह कर दिए, कई इलाकों में बाढ़ का मंजर ऐसा था कि हेलिपैड तक बह गया और रेस्क्यू हेलिकॉप्टर को बिना उतरे लौटना पड़ा.
इस भीषण बाढ़ ने सड़क, पुल, बिजली, बैंक और संचार व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया है. 11 हाइड्रोपावर प्लांट क्षतिग्रस्त हुए हैं और 431 मेगावाट बिजली उत्पादन सिस्टम से बाहर हो गया है. 19 पुल और 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं. 25 से ज्यादा टेलीकॉम साइट प्रभावित हुई हैं, जबकि बैंक और वित्तीय संस्थानों के कई कार्यालय बह गए हैं.
अचानक बाढ़ आने की वजह?
रसुवा में पिछले 24 घंटों के दौरान महज 7 मिमी बारिश हुई है. माना जा रहा है कि इतनी कम बारिश से भोटेकोशी नदी में इतना विकराल सैलाब आना मुमकिन नहीं है, इसलिए इस तबाही की वजह भूकंप और हिमस्खलन बताई जा रही है.
ल्हेंदे नदी में हिमस्खलन (एवलांच): नदी में भारी मात्रा में बर्फ और मलबा गिरने से पानी का बहाव रुक गया था. बड़ा बांध बनने के बाद जब यह अवरोध अचानक टूटा, तो भारी सैलाब भोटेकोशी नदी में आ गया और भीषण बाढ़ आ गई.
तिब्बत में भूकंप के झटके: सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज हुआ था. बाढ़ भी ठीक इसी समय के आसपास आई, जिससे माना जा रहा है कि भूकंप के कारण ही एवलांच या भूस्खलन हुआ होगा।लापता पर्यटकों में 142 भारतीय
नेपाल पर्यटन बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, भीषण बाढ़ के बाद लापता करीब 500 लोगों में 291 विदेशी नागरिक शामिल हैं. इनमें सर्वाधिक 142 भारतीय (105 नागरिक और 37 एनआरआई) बताए जा रहे हैं. इसके अलावा 17 मलेशियाई, 12 ब्रिटिश, 8 दक्षिण कोरियाई, 4 दक्षिण अफ्रीकी के साथ-साथ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड का 1-1 नागरिक भी लापता है, जिनकी तलाश के लिए रेस्क्यू टीमें लगातार जुटी हुई हैं.
रसुवा और नुवाकोट जिलों में सबसे ज्यादा तबाही
बाढ़ के प्रचंड बहाव से रसुवा और नुवाकोट जिलों के तटीय इलाकों में भारी बर्बादी हुई है. नुवाकोट के सहायक मुख्य जिला अधिकारी कृष्ण प्रसाद हुमागैन के अनुसार, कई बस्तियां पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गई हैं, जबकि बाजार, बैंक और दर्जनों कंक्रीट के पक्के पुल पानी में बह गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि इलाके के इतिहास में इतना बड़ा नुकसान पहले कभी नहीं देखा गया.
उधर, प्रोजेक्ट प्रमोटर बिजय मोहन भट्टराई ने जानकारी दी है कि 20 मेगावाट क्षमता वाली लांगटांग खोला जलविद्युत परियोजना से जुड़े 60 कर्मचारियों से संपर्क टूट गया है और उनके बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है.
टेलीकॉम नेटवर्क ध्वस्त
बाढ़ और भूस्खलन ने प्रभावित इलाकों में टेलीकॉम नेटवर्क को बुरी तरह ध्वस्त कर दिया है. टिमुरे, स्याफ्रुबेसी और नुवाकोट में नेपाल टेलीकॉम (NTC) और एनसेल (Ncell) के टावर, ऑप्टिकल फाइबर और 25 से अधिक साइट्स क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे बड़े इलाके में मोबाइल और इंटरनेट संपर्क टूट गया है.
40 किलोमीटर लंबी सड़कें बर्बाद
आपदा के कारण बुनियादी ढांचे को भी भारी चोट पहुंची है. करीब 40 किलोमीटर लंबी सड़कें बर्बाद हो गई हैं और रसुवा से माल्खु के बीच 20 से ज्यादा सस्पेंशन (झूला) व पक्के मोटरेबल पुल तेज बहाव में बह गए हैं, जिससे कई इलाकों का संपर्क पूरी तरह कट गया है. आपदा के बढ़ते खतरे को देखते हुए नेपाल सरकार ने तीन प्रमुख सड़कों पर आवाजाही रोक दी है. पृथ्वी राजमार्ग, गल्छी-स्याफ्रुबेसी और मुग्लिंग-नारायणगढ मार्ग पूरी तरह बंद हैं. प्रशासन ने लोगों को सफर न करने की सलाह दी है
स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, बचाव कार्य तेजी से चल रहा है। नेपाल पुलिस, आर्म्ड पुलिस फोर्स और नेपाली सेना समेत सुरक्षा बलों को बड़े पैमाने पर तैनात किया गया है और खोज व बचाव कार्यों के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हाल ही में, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात की।प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बातचीत की और नेपाल में बाढ़ के कारण हुई जनहानि पर अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं। इस कठिन घड़ी में भारत की जनता नेपाल के अपने भाइयों और बहनों के साथ एकजुटता से खड़ी है। भारत नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है। हमारी टीमें बचाव और राहत कार्यों में निकटता से समन्वय कर रही हैं।"
काठमांडू में भारतीय दूतावास ने बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद के लिए दो आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर (+977 985 131 6807 और +977 970 910 7500) जारी किए हैं। दूतावास नेपाल सरकार के अधिकारियों के साथ संपर्क में है ताकि बाढ़ से प्रभावित भारतीयों का जल्द से जल्द बचाव और राहत सुनिश्चित की जा सके। नेपाल सरकार के साथ मिलकर बचाव और राहत अभियान को और मजबूत किया जा रहा है।भारत में, सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने भी भारत-नेपाल सीमा पर तैनात अपनी यूनिट्स के लिए अलर्ट जारी किया है। अधिकारियों के अनुसार, फोर्स की 11 रेस्क्यू और रिलीफ टीमें (RRTs) तुरंत ऑपरेशन के लिए अलर्ट पर हैं, जबकि सात अतिरिक्त टीमें स्टैंडबाय पर हैं। SSB टीमें बचाव, राहत और इमरजेंसी रिस्पॉन्स के कामों में राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की मदद करने के लिए तैयार हैं।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में घाघरा, करनाली और महाकाली नदी प्रणालियों के किनारे बसे संवेदनशील जिलों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है। भारत-नेपाल सीमा पर तैनात SSB टुकड़ियों को स्थिति पर नजर रखने और स्थानीय प्रशासन के संपर्क में रहने का निर्देश दिया गया है। उत्तर प्रदेश और बिहार की सरकारें भी अलर्ट पर हैं।
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