पत्नी देती थी ऑर्डर, लड़कियों से हथियारों की सप्लाई; एनकाउंटर में ढेर गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की क्राइम कुंडली
अशोक झा/ जामताड़ा: कानपुर का चर्चित विकास दुबे कांड तो आपको याद ही होगा, जब यूपी पुलिस की गाड़ी पलटी, गैंगस्टर ने हथियार छीना, भागने की कोशिश की और जवाबी मुठभेड़ में मारा गया।
ठीक वैसा ही फिल्मी और सनसनीखेज घटनाक्रम रविवार देर रात झारखंड के जामताड़ा में दोहराया गया. झारखंड के सबसे खूंखार गैंगस्टरों में शुमार और रंगदारी व हत्या के 75 से अधिक मामलों के आरोपी सुजीत सिन्हा का पुलिस एनकाउंटर में अंत हो गया। झारखंड के अपराध जगत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। पलामू समेत राज्य के आधा दर्जन से अधिक जिलों में आतंक का पर्याय बन चुका कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा रविवार देर रात पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।
साहेबगंज जेल से धनबाद शिफ्ट किए जाने के दौरान सुरक्षा काफिले की गाड़ी का टायर पंचर हुआ, जिसके बाद सुजीत ने पुलिस जवान का हथियार छीनकर भागने और फायरिंग करने की कोशिश की। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में वह मौके पर ही ढेर हो गया। गैंगस्टर सुजीत ने गैंग की कमान रिया सिन्हा को थमा दिया था। रिया गैंगस्टर के निर्देश पर न सिर्फ कारोबारियों से गुर्गों के जरिए रंगदारी की वसूली करवाती थी, बल्कि गोलीबारी की भी घटना को अंजाम दिलवाती थी। रांची पुलिस की जांच में इस बात का खुलासा हो चुका है। पुलिस की जांच में यह भी बात सामने आयी थी कि एक करोड़ की रंगदारी नहीं मिलने पर गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के कहने पर रिया सिन्हा ने ओरमांझी में दो युवकों पर गोली चलवायी थी। पुलिस के मुताबिक, रिया सिन्हा ने सुजीत के निर्देश पर शूटरों की व्यवस्था की और पूरी वारदात का समन्वय किया। प्रिंस और सुजीत गिरोह का पाक कनेक्शन: झारखंड का कुख्यात अपराधी प्रिंस खान और सुजीत सिन्हा समेत उसके गुर्गों का सीधा कनेक्शन पाकिस्तान के हथियार तस्करों से है। दोनों कुख्यात अपराधी पाकिस्तान के हथियार तस्करों को पैसे भेजकर हथियार खरीदते हैं और उसे पंजाब के रास्ते झारखंड में मंगवाते हैं। इसका खुलासा रांची पुलिस की जांच में हुआ है।
11 विदेशी हथियार अब तक बरामद नहीं: पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि पाकिस्तान से गैंगस्टर सुजीत सिन्हा और उसके गुर्गों ने 21 हथियार झारखंड मंगवाए थे, जिसमें से 10 हथियार पुलिस ने बरामद कर लिया है, लेकिन 11 विदेशी हथियार को पुलिस अब तक बरामद नहीं कर सकी है।
कौन था सुजीत सिन्हा?: मूल रूप से मेदिनीनगर (पलामू) का रहने वाला सुजीत सिन्हा कोई आम अपराधी नहीं था। उसने अपराध की दुनिया में अपना कदम हजारीबाग के कुख्यात डॉन सुशील श्रीवास्तव के मुख्य शूटर के रूप में रखा था। अपनी आक्रामक कार्यशैली और बेखौफ अंदाज के कारण जल्द ही उसने अपराध की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली। सुशील श्रीवास्तव के बाद सुजीत ने अपना खुद का गिरोह खड़ा किया और देखते ही देखते पलामू, धनबाद, बोकारो, रामगढ़, रांची, लातेहार और चतरा जैसे जिलों में अपना दबदबा कायम कर लिया। सुजीत सिन्हा का क्रिमिनल नेटवर्क : 75 से अधिक केस दर्ज: सुजीत के खिलाफ हत्या, रंगदारी, अपहरण, आर्म्स एक्ट और गैंग ऑपरेशन के 75 से ज्यादा गंभीर मामले दर्ज थे। अकेले पलामू जिले में ही उस पर 20 से अधिक आपराधिक मामले थे। जेल से चलाता था गैंग: पलामू के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में वह आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा काट रहा था। लेकिन उसकी दहशत ऐसी थी कि जेल की सलाखों के पीछे रहकर भी वह मोबाइल और अपने गुर्गों के माध्यम से पूरा आपराधिक नेटवर्क संचालित कर रहा था।
कोयलांचल में लेवी और रंगदारी: उसका गिरोह मुख्य रूप से कोयला कारोबारियों, रेलवे ठेकेदारों, बिल्डरों और बड़े व्यवसायियों से करोड़ों की लेवी और रंगदारी वसूलने के लिए कुख्यात था।
साहेबगंज-धनबाद के बीच क्या हुआ?: रविवार शाम कुख्यात सुजीत सिन्हा को सुरक्षा कारणों से साहेबगंज मंडल कारा से धनबाद मंडल कारा स्थानांतरित (शिफ्ट) किया जा रहा था. रात करीब 10 बजे जब पुलिस का कैदी वाहन जामताड़ा जिले के साहिबगंज-गोविंदपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुपाईडीह और केंदबोना के पास पहुंचा, तभी अचानक सुरक्षा काफिले की एक गाड़ी का अगला टायर पंचर हो गया।
पंचर, हथियार छीना और मुठभेड़ : वाहन पंचर होने के बाद पुलिस टीम जब सुजीत सिन्हा को दूसरे सुरक्षित वाहन में बैठाने की प्रक्रिया कर रही थी, तभी सुजीत ने मौके का फायदा उठाया। उसने एक पुलिस जवान का हथियार (पिस्तौल/राइफल) छीन लिया और अंधेरे का फायदा उठाकर भागने लगा. भागते समय उसने पुलिस टीम पर सीधी फायरिंग शुरू कर दी. पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला और जवाबी फायरिंग की। मुठभेड़ में सुजीत सिन्हा को गोलियां लगीं और वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ा। पुलिस उसे तुरंत अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जामताड़ा एसपी शंभू कुमार सिंह और एसडीओ अनंत कुमार ने दल-बल के साथ पहुंचकर मुठभेड़ की पुष्टि की।
2009 एनकाउंटर की भी यादें हुई ताजा
जामताड़ा में सुजीत सिन्हा के एनकाउंटर ने साल 2009 की उस पुरानी घटना की भी याद ताजा कर दी है, जब दुमका सेंट्रल जेल से धनबाद ले जाने के दौरान जामताड़ा के मिहिजाम (खालसा होटल के पास) में पुलिस ने कुख्यात डॉन भोला पांडेय को एनकाउंटर में मार गिराया था।
मजिस्ट्रेट जांच और FSL की टीम मुस्तैद
घटना के बाद सोमवार सुबह से ही पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशा-निर्देशों के तहत आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है. फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं. डॉक्टरों के विशेष मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी हो रही है. पूरी मुठभेड़ की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
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