- आज है सावन का दूसरा सोमवार, ऐसे करें शिव पूजा; बरसेगी भोलेनाथ की कृपा
- सावन में जलाभिषेक: एक लोटा जल... और बदल जाएगा जीवन को देखने का नजरिया!
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।यानी सुबह सावन सोमवार का जलाभिषेक होगा और शाम को प्रदोष काल में शिव-पार्वती की पूजा। यह संयोग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रदोष व्रत स्वयं भगवान शिव को समर्पित है। जब प्रदोष सोमवार को पड़ता है तो इसे सोम प्रदोष कहते हैं।सोमवार को प्रदोष व्रत होने से ये सोम प्रदोष कहलाएगा। इस तरह भगवान शिव के प्रिय सावन मास में सोमवार पर प्रदोष व्रत का होना बहुत ही दुर्लभ संयोग है। इस दिन व्रत करने से सावन सोमवार के साथ-साथ प्रदोष व्रत का फल भी भक्तों को मिलेगा।धार्मिक मान्यता है कि सावन सोमवार और सोम प्रदोष के संयोग में की गई उपासना मन की अशांति दूर करती है. दांपत्य जीवन, विवाह, स्वास्थ्य और रुके कार्यों से जुड़ी प्रार्थना के लिए भी इस दिन को विशेष माना जाता है।10 अगस्त को कब से लगेगी त्रयोदशी? पंचांग के अनुसार 10 अगस्त को श्रावण कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि सुबह 8 बजे तक रहेगी. इसके बाद त्रयोदशी शुरू होगी. यह 11 अगस्त को सुबह 4:54 बजे तक रहेगी। प्रदोष व्रत उसी दिन रखा जाता है, जब त्रयोदशी सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में मौजूद हो। 10 अगस्त को यह स्थिति बन रही है. इसलिए इस दिन सोम प्रदोष व्रत रखा जाएगा.
पंचांग के अनुसार प्रदोष पूजा का समय शाम 7:05 बजे से रात 9:14 बजे तक रहेगा. अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के कारण समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है. इसलिए स्थानीय पंचांग देखना जरूरी है। सुबह शिवलिंग पर कब चढ़ाएं जल? सावन सोमवार की पूजा सुबह स्नान के बाद की जा सकती है. नई दिल्ली के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:22 से 5:05 बजे तक है. सूर्योदय लगभग 5:47 बजे होगा. भक्त ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के बाद मंदिर जाकर जलाभिषेक कर सकते हैं
सुबह का जलाभिषेक दिन की शुरुआत शिव स्मरण से करने का अवसर है. पूजा से पहले भगवान गणेश, माता पार्वती और नंदी को प्रणाम करें. इसके बाद शिवलिंग पर शांत और पतली धार में स्वच्छ जल चढ़ाएं।इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं. विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए रुद्राभिषेक कराया जाता है। सावन सोमवार क्यों महत्वपूर्ण है?
सावन का महीना भगवान शिव को प्रिय है और सोमवार का अर्थ चंद्रमा के दिन से है. चंद्रमा का दूसरा नाम सोम भी है. चंद्र देव को जब क्षय रोग हुआ तो उन्होंने महादेव को प्रसन्न करने लिए कठोर तप किया. शिव कृपा से उनके कष्ट दूर हुए और महादेव ने उनको अपने सिर पर धारण किया, जिससे वे चंद्रशेखर कहलाए. इस वजह से सोमवार को शिव पूजा करते हैं. एक कथा यह भी है कि भगवान शिव को पाने के लिए माता पार्वती ने 16 सावन सोमवार व्रत किए थे।सावन सोमवार पर कौन सी पूजा करनी चाहिए?: सावन सोमवार के दिन आप व्रत की पूजा के अलावा चाहें तो रुद्राभिषेक करा सकते हैं. रुद्राभिषेक कराने से सुख, समृद्धि, धन, संपत्ति, आयु, आरोग्य आदि में बढ़ोत्तरी होती है। असाध्य रोगों और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति के लिए भी रुद्राभिषेक कराते हैं।सावन सोमवार को आप कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए भी पूजा करा सकते हैं।
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