हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। इस पर्व पर भगवान विष्णु की उपासना का विधान है। वहीं, सावन मास की कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली कामिका एकादशी व्रत का भी बड़ा धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस दिन पूरे नियम से पूजन करने से जाने-अनजाने में हुए पापों का शमन होता है और मोक्ष मिलता है. पूजा के लिए लड्डू गोपाल जी की मूर्ति, पीले वस्त्र, पीले फूल, केला, पेड़ा, रोली, चंदन, कपूर, धूप, दीप, पंचामृत और तांबे का कलश रखें। साथ ही दशमी के दिन तोड़े हुए तुलसी के पत्ते और केवल पूजा के लिए बिना टूटे चावल भी पास रखें।इस पावन अवसर पर सच्चे मन से भक्ति करने पर भगवान प्रसन्न होकर कृपा करते हैं। कामिका एकादशी की संपूर्ण पूजा विधि: एकादशी के पूजा का सबसे शुभ समय सुबह का होता है, इसलिए सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और संभव हो तो पीले वस्त्र धारण करें. हाथ में जल, पुष्प और अक्षत लेकर व्रत तथा भक्ति का संकल्प लें।मंदिर की सफाई करके लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और भगवान की मूर्ति स्थापित करें।प्रभु को पंचामृत तथा गंगाजल से स्नान कराकर वस्त्र पहनाएं और पीले चंदन व रोली से तिलक लगाएं. इसके बाद पीले पुष्प, धूप, दीप और फल अर्पित करें. भोग लगाते समय पंचामृत और मिठाई में तुलसी पत्र अवश्य रखें, क्योंकि इसके बिना भगवान भोग स्वीकार नहीं करते. फिर घी का दीपक जलाकर कामिका एकादशी की व्रत कथा सुनें और आरती करें. अंत में भूल-चूक के लिए भगवान से क्षमा याचना करें।इस साल यह एकादशी व्रत 9 अगस्त 2026, रविवार यानी आज रखा जा रहा है. मान्यतानुसार इस दिन विधि-विधान से विष्णु जी की पूजा कर और व्रत का संकल्प करने से शुभ और पुण्य फलों की प्राप्ति होती है. वहीं, विष्णु जी की पूजा करने के दौरान कामिका एकादशी व्रत कथा का पाठ करने से जीवन की नकारात्मकता का नाश होता है और किसी भी तरह के संकट से बाहर निकलने का रास्ता मिलता है. कामिका एकादशी व्रत की कथा का पाठ करना और सुनना पुण्यकारी माना गया है।इसके बाद धूप-दीप जलाकर भगवान विष्णु का ध्यान करें और विधिपूर्वक पूजा करें। पूजा के दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है। मंत्र का जाप:कामिका एकादशी के दिन भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ है। आप ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप कर सकते हैं।विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी बहुत लाभकारी माना जाता है। इस दिन भगवान की भक्ति में समय बिताना चाहिए।भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के उपाय: कामिका एकादशी के दिन भगवान विष्णु को पीले फूल और तुलसी अर्पित करें। पूजा के बाद जरूरतमंदों को भोजन कराएं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करें।अन्न, वस्त्र और अन्य आवश्यक सामान का दान करना शुभ माना जाता है।
एकादशी पर ध्यान रखने योग्य बातें : एकादशी व्रत में खान-पान के विशेष नियम होते हैं। व्रत रखने वाले लोगों को चावल और अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए। कुछ लोग फलाहार करते हैं, जबकि कुछ भक्त निर्जला व्रत रखते हैं।एकादशी के दिन किसी का अपमान करने, झूठ बोलने या विवाद करने से बचना चाहिए। कामिका एकादशी व्रत कथाकथा है कि एक गांव में एक क्षत्रिय रहा करता था जो शक्तिशाली था लेकिन स्वभाव क्रोधी था. एक दिन किसी बात पर एक ब्राह्मण के साथ उसका विवाद शुरू हो गया और बात इतनी बढ़ गई कि दोनों के बीच संघर्ष भी होने लगा. जिससे ब्राह्मण की मृत्यु हो गई. ब्राह्मण की मृत्यु के बाद क्षत्रिय को अपने किए पर बहुत पछतावा हुआ, उसे ब्रह्महत्या का दोष भी सताने लगा. बहुत विचारे के बाद उसने सोचा कि क्यों न ब्राह्मण के अंतिम संस्कार में शामिल हुआ जाए ताकि कुछ प्रायश्चित हो सके. लेकिन वहां मौजूद ब्राह्मणों ने क्षत्रिय को रोक दिया. उन्होंने उससे कहा कि उसे अपने पहले अपने किए पाप का प्रायश्चित करना होगा. इस पर क्षत्रिय ने प्रायश्चित और पाप से मुक्ति का उपाय पूछा. तब ब्राह्मणों ने बताया कि सावन माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर विष्णु जी की श्रद्धापूर्वक पूजा करों और व्रत रखो. जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को दान दो. भगवान विष्णु की शरण में जाकर मन से प्रायश्चित करो. क्षत्रिय ने ऐसा ही क्या और विधि-विधान से कामिका एकादशी का व्रत रखा. भगवान विष्णु को तुलसी दल चढ़ाया और सच्चे मन से पश्चाताप किया. क्षत्रिय की भक्ति और प्रायश्चित करने की भावना से भगवान विष्णु अति प्रसन्न हुए और उसके पापों से उसे मुक्त कर दिया. इसके बाद विष्णु जी की कृपा से क्षत्रिय के जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगे और वह धार्मिक व सदाचारी जीवन जीने लगा. इस तरह जो भी भक्त कामिका एकादशी व्रत का संकल्प कर विष्णु जी की पूजा करता है उसके जीवन के पापों का नाश होता है और विष्णु जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ( पंडित अशोक झा की कलम से )
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