-कल देंगी गुरु दीक्षा करेंगी लोगों को संबोधित
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: पद्म भूषण से सम्मानित, सेवा, संस्कार, स्वाभिमान, राष्ट्र एवं हिंदुत्व जागरण की प्रखर वक्ता दीदी मां साध्वी ऋतंभरा तीन दिवसीय दौरे पर सिलीगुड़ी पहुंचीं। बागडोगरा पहुंचते ही जय श्रीराम के नारे से पूरा एयरपोर्ट गूंजेयमान होता रहा। पूरे मार्ग में उनके एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में लोग पुष्प लेकर इंतजार कर रहे थे। उत्तरबंग मारवाड़ी पैलेस में पहुंचते ही ढोल नगाड़े के साथ मां साध्वी ऋतम्भरा का स्वागत और पूजन किया गया। बड़ी संख्या में मातृशक्ति मौजूद रहीं। चरण पूजन गुरु भक्ति के पूजन के समय पूरे परिसर में जय श्रीराम का जयघोष गूंजते रहे। साध्वी ऋतंभरा ने पूजा-अर्चना कर देश और समाज के लिए सुख-समृद्धि की कामना की। कहा कि यह क्षेत्र देश को मार्ग दिखाने वाला होगा। इस समय देश और समाज गंभीर चारित्रिक संकट से गुजर रहा है, यदि हमने शील और संस्कार को बचाने के लिए तैयारी नहीं की तो हमारी युवा पीढ़ी बर्बाद हो जाएगी। यह काम राजनेताओं और बुद्धिजीवियों को करना है। गिरावट समाज के हर क्षेत्र में है लेकिन यह क्यों है, इस पर विचार करना चाहिए। कहा कि देश के युवाओं का बड़ा वर्ग आज डिप्रेशन और एंगर से पीड़ित है। यह इसलिए कि हमने सकारात्मक ढंग से सोचना ही बंद कर दिया है। कहा कि हमें संस्कारों के गिरते हुए स्तर पर सोचना पड़े फिर हम धर्म के बारे में बात कर सकेंगे। अभी तो शील और संस्कार का संकट है और यह संकट मर्यादा लांघने के कारण और बढ़ रहा है। उन्होंने कहा राजनेताओं के पास संकल्प शक्ति का अभाव है प्रशासन के पास दृष्टिकोण का अभाव है। मीडिया अच्छे से ज्यादा सच्चे को प्राथमिकता देता है। यदि मीडिया अच्छे को प्राथमिकता देना प्रारंभ करे तो तस्वीर बदल सकती है। साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि प्रह्लाद आग में जलाए गए, पर जला नहीं पाए गए। इसी तरह सनातन का सत्य, अग्नि परीक्षाओं से गुजर-गुजर के उस सत्य को, उसके पक्ष को समझते है। वैभव क्या होता है? बिल्डिंगों से नहीं वैभव होता, बिल्डिंगें भी वैभव को व्यक्त करने का एक मार्ग होती हैं, इमारतें। लेकिन इस धरती ने ज्ञान और विज्ञान से, काव्य से, संगीत से और कला से पूरे भारत को शृंगारित किया था। भारतीयों की जो संतानें हैं, वे तुलसी के पौधे हैं, जिनको वासनाओं की शराबों से नहीं, संस्कारों के गंगाजल से सींचा जाना चाहिए। पूर्वोत्तर भटका क्षेत्र पूरे भारत का नेतृत्व करेगी, ऐसा हमें दिखाई देता है। बहुत जल्दी सब कुछ होगा, भगवती आना चाहती हैं।
मीडिया को चर्चा में साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि सबसे बड़ी बात है, हमारी युवा पीढ़ी बहुत बड़ी मात्रा में नहीं, लेकिन बहुत बड़ी संख्या में ऐसे भी बच्चे हैं, जिनके मुंह पर अपशब्द आ गए हैं और लड़कियां तक मां-बहनों को गालियां देती हैं। जिन लड़कियों को संघर्ष करना चाहिए था, कि वो सरकारों को विवश करतीं, कि मां-बहन की गाली देने पे दंड मिलना चाहिए, वो स्वयं मां-बहन की गालियां दे रही हैं। जब हमारा अंतःकरण इतना दूषित होकर अपशब्द और अपसंस्कृति का हम वर्णन कर रहे हैं।
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