- पीएम मोदी का दिया संदेश, दुःख की इस घड़ी में केंद्र सरकार राज्य व राज्यवासियों के साथ
-अबतक 89 लोगों की मौत, लगभ 1.28 लाख लोग प्रभावित
अशोक झा/ कोलकाता: पड़ोसी राज्य असम के शिवसागर और गोलाघाट जिलों में दो लोगों की मौत दर्ज की गई, जिसके बाद इस साल बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों की कुल संख्या 89 हो गई है। असम में प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है. यूं तो हर साल असम में बाढ़ आती है, लेकिन इस बार की बाढ़ ने बहुत ज्यादा तबाही मचाई. सोमवार को जारी सरकारी बुलेटिन के मुताबिक, असम में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 87 हो गई है।अब तक सात जिलों में बाढ़ से लगभग 1.28 लाख लोग प्रभावित हैं।नदियां उफान पर हैं. बाढ़ में कहीं लोगों के घर जलमग्न हो गए, कहीं सड़कें टूट गई तो कहीं फसलें खराब हो गई. असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि हाल ही में बाढ़ के कारण जो दो मौते हुई वह बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिले शिवसागर में हुई है।केंद्रीय स्वास्थ्यमंत्री और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा आज असम के शिवसागर जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों संतक और नेपाली खूंटी का दौरा किया।उनके साथ मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा भी साथ थे। बाढ़ से ऊपरी असम के मुख्य रूप से चार जिलों शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट एवं गोलाघाट बाढ़ से बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। हालांकि नदियों का जलस्तर घट गया है। मगर पानी और कीचड़ घरों और रास्तों में अभी भी भरा हुआ है। सरकार के साथ ही स्वयंसेवी संगठन एवं अपने स्तर पर लोग प्रभावित इलाकों में पहुंचकर राहत कार्य में अपनी मदद कर रहे हैं।नड्डा बाढ़ प्रभावित परिवारों से मिले और घरों, खेती की जमीन, मवेशियों और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को हुए भारी नुकसान के बारे में उनकी चिंताएं सुनीं। उन्होंने प्रभावित गांवों में चलाए जा रहे राहत और पुनर्वास कार्यों की भी समीक्षा की।
भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नड्डा ने जरूरी राहत सामग्री की उपलब्धता और विस्थापित परिवारों को दी जा रही मदद के बारे में जानकारी ली। उन्होंने निवासियों को भरोसा दिलाया कि उनकी चिंताओं पर ध्यान दिया गया है और सरकार आपदा से प्रभावित लोगों की मदद के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है औऱ हर संभव मदद की जाएगी।संतक और नेपाली खूंटी शिवसागर के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से हैं, जहां हाल की बाढ़ से भारी विनाश हुआ और हजारों लोगों के जीवन और आजीविका को प्रभावित किया। कई परिवारों के घर और सामान बर्बाद हो गए, जबकि बाढ़ के पानी ने सड़कों, तटबंधों और खेती की बड़ी ज़मीन को भी नुकसान पहुंचाया।नड्डा का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब असम सरकार और जिला प्रशासन बाढ़ प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन करने, तुरंत मदद पहुंचाने और पुनर्वास का काम शुरू करने के लिए तेज़ी से प्रयास कर रहे हैं। केंद्रीयमंत्री का यह दौरा ऊपरी असम, खासकर शिवसागर और आसपास के जिलों में बाढ़ की स्थिति की सरकार द्वारा की जा रही समीक्षा का हिस्सा है, जो इस विनाशकारी बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे।
शिवसागर के बाद जेपी नड्डा पड़ोसी राज्य नगालैंड के मोन जिले में बाढ़ से हुए भ नुकसान का जायजा लेने के लिए रवाना हो गए। नगालैंड से लौटने के बाद आज शाम को असम के चराईदेव जिला के बाढ़ प्रभावित इलाके का भी दौरा करेंगे। गुरुवार को नड्डा पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश का दौरा करेंगे, जहां बादल फटने से भारी तबाही हुई है। केंद्रीय मंत्री नड्डा तीन दिवसीय असम, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश के दौरे पर मंगलवार को ऊपरी असम के डिब्रूगढ़ पहुंचे थे। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के 4 अगस्त को जारी आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ धनसिरि नदी (नुमलीगढ़) इलाके में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। मंगलवार को शिवसागर में एक एवं गोलाघाट जिले में एक शव बरामद हुआ। बाढ़ से राज्य में मृतकों की कुल संख्या 89 पहुंच गई है। बाढ़ से अभी भी 10 जिले बुरी तरह से प्रभावित हैं।। प्रभावित जिलों में शिवसागर, धेमाजी, गोलाघाट, डिब्रूगढ़, चराईदेव, कामरूप (मेट्रो), बिश्वनाथ, लखीमपुर, जोरहाट एवं नगांव जिला शामिल हैं। बाढ़ से इन जिलों के 28 राजस्व मंडलों के कुल 365 गांव प्रभावित हैं। राज्य की कुल 122137 आबादी अभी भी प्रभावित हैं एवं 15342.92 हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूबी हुई है।राज्य सरकार ने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए अभी भी 39 राहत शिविर एवं 16 राहत वितरण केंद्र समेत कुल 55 शिविर क्रियान्वित रखे हैं। राहत शिविरों में 12382 लोग आश्रय लिए हुए हैं। जबकि राहत वितरण केंद्रों पर 5475 गैर-शिविर निवासी राहत प्राप्त कर रहे हैं। राहत एवं बचाय अभियान में एसडीआरएफ, सेना/अर्धसैनिक बल, एनडीआरएफ, डीडीआरएफ, एयर फोर्स, पुलिस, अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएं (एफ एंड ईएस), सर्कल कार्यालय/स्थानीय प्रशासन, नागरिक सुरक्षा/प्रशिक्षित स्वयंसेवक और अग्निशमन विभाग जुटा हुआ है। बाढ़ से बड़े पैमाने पर सड़क, पुल एवं अन्य आधारभूत ढांचे को नुकसान पहुंचा है।
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