- बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीनको खुले मंच से दिलाया भरोसा
कहा, अब बदला हुआ बंगाल , यहां चमकाने और धमकाने के दिन अतीत की बात
अशोक झा/ कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन को भरोसा दिलाया कि जब भी वह राज्य का दौरा करेंगी, उन्हें पूरी सुरक्षा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि नयी भाजपा सरकार के तहत हर कोई अपनी अभिव्यक्ति की आजादी का इस्तेमाल करने के लिए स्वतंत्र है। यहां रवींद्र सदन में नसरीन के सम्मान में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जब भी वह पश्चिम बंगाल आएं, तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना (पश्चिम बंगाल) सरकार का कर्तव्य है। अधिकारी ने कहा, "राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर यह मेरी ज़िम्मेदारी है कि जब भी आप आएं, तो आपको सुरक्षा दी जाए।" उन्होंने निर्वासित लेखिका को उनकी इच्छा अनुसार जितनी बार चाहें राज्य का दौरा करने का निमंत्रण भी दिया।
उन्होंने कहा, "जब भी आप चाहें, जितनी बार चाहें, यहां आ सकती हैं।"राज्य में बदले हुए राजनीतिक माहौल का जिक्र करते हुए अधिकारी ने कहा कि नयी सरकार अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, "नयी सरकार के तहत पश्चिम बंगाल में हर किसी को अपनी अभिव्यक्ति की आज़ादी का इस्तेमाल करने का अधिकार है।"मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि "धमकी और डराने-धमकाने के दिन अब बीत चुके हैं"। उनका यह बयान साफ तौर पर उन हालात की ओर इशारा था, जिनमें नसरीन को 2007 में अपने लेखन को लेकर हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद कोलकाता छोड़ना पड़ा था। बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका 2004 से 2007 के बीच कोलकाता में रही थीं। उस समय की वाम मोर्चा सरकार ने उन्हें शहर छोड़ने के लिए कहा था, क्योंकि उनकी आत्मकथा 'द्विखंडितो' के कुछ हिस्सों को लेकर हिंसक विरोध-प्रदर्शन हुए थे। नसरीन लगभग 19 साल बाद शुक्रवार को कोलकाता लौटीं और कट्टरपंथ-विरोधी साहित्यिक कार्यक्रम में शहर में पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखाई दीं।धार्मिक कट्टरवाद के विरोध में आयोजित इस कार्यक्रम में उनकी वापसी राज्य में नयी सरकार के गठन के बाद पश्चिम बंगाल के राजनीतिक बदलाव का एक सांस्कृतिक प्रतीक मानी जा रही है। वह इस कार्यक्रम में कविता पाठ भी करेंगी।
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