आईएसआई की साजिश नाकाम,बंगाल समेत तीन राज्यों से गिरफ्त में आए 12 संदिग्ध
अशोक झा/ कोलकाता: सुरक्षा एजेंसियों ने स्वतंत्रता दिवस से पहले आईएसआई की बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया है। तीन राज्यों में बड़ा ऑपरेशन चलाकर 12 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है।एक हफ्ते के अंदर पंजाब के अमृतसर, तरनतारन, पश्चिम बंगाल के वर्धमान और दिल्ली को निशाना बनाने की साजिश का खुलासा हुआ है। शहजाद भट्टी ने ये साजिश रची थी. पाकिस्तान से जुड़े हैंडलर्स के इशारे पर अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग टास्क दिए गए थे। पश्चिम बंगाल का मॉड्यूल
31 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल के वर्धमान थाने में दर्ज एफआईआर में कई गंभीर दावे किए गए हैं. जांच के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद हमीम मंडल पाकिस्तान से चलाए जा रहे कई सोशल मीडिया अकाउंट और विदेशी व्हाट्सएप नंबरों के लगातार संपर्क में था. उसके मोबाइल की जांच में पाकिस्तान के +92 नंबरों के अलावा अमेरिका और ब्रिटेन के नंबर भी मिले हैं. एफआईआर में जिन लोगों का जिक्र है उनमें "राणा", "C9Uzhair" और "Abid Jutt" जैसे नाम शामिल हैं. इसके अलावा एक सोशल मीडिया अकाउंट भी जांच एजेंसियों के रडार पर है, जिसे पाकिस्तान से ऑपरेट किया जाना बताया गया है। उसके बाद बंगाल में कांवर यात्रा और स्वतंत्रता दिवस को लेकर सुरक्षा की पहली परत स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार व सर्कुलेटिंग एरिया में तैनाती रहेगी. यहां यात्रियों व उनके सामान की डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर, हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर व स्कैनर मशीनों से गहन जांच की जा रही है. सीसीटीवी कैमरों के जरिए हर आने-जाने वाले संदिग्ध व्यक्ति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्लेटफॉर्मों पर रेलवे सुरक्षा बल, जीआरपी के जवान के साथ वालेंटियर्स लगाए गए हैं. प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों, वेंडरों व संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त व्यक्तियों पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है. इसके साथ ही स्निफर डॉग स्क्वॉड द्वारा समय-समय पर पूरे प्लेटफॉर्म और प्रतीक्षालयों की बारीकी से चेकिंग हो रही है।ट्रेन के प्रस्थान के समय व ट्रेन के भीतर का है. ट्रेन के रवाना होने से पहले सभी कोचों की सुरक्षा जांच की जा रही है. संवेदनशील और महत्वपूर्ण ट्रेनों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात हैं, जिससे यात्रा के दौरान यात्रियों को पूरा सुरक्षा कवच मिल सके। इसी प्रकार राज्य और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े क्षेत्रों में सुरक्षा चाक चौबंद की गई है। आखिर ऐसा क्यों? पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों से संपर्क में थे
जांच एजेंसियों का दावा है कि हमीम मंडल पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े लोगों के लगातार संपर्क में था. उसके मोबाइल से कथित तौर पर कई चैट, निर्देश और बातचीत मिली है, जिन्हें जांच का अहम सबूत माना जा रहा है. जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क सिर्फ जानकारी जुटाने तक सीमित नहीं था. एजेंसियों के मुताबिक, इस मॉड्यूल को कई जिम्मेदारियां दी गई थीं. स्थानीय युवाओं की भर्ती करना, हथियारों का इंतजाम करना, वीआईपी और महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की जानकारी जुटाना, राजनीतिक नेताओं तक पहुंच बनाना, हनी ट्रैप के जरिए प्रभावशाली लोगों को फंसाना, जरूरत पड़ने पर हत्या, अपहरण और अन्य हिंसक वारदातों की तैयारी करना।एफआईआर में कहा गया है कि इन गतिविधियों का उद्देश्य देश की आंतरिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचाना और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ना था. जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस मॉड्यूल में झारखंड की रहने वाली अर्पिता की भी भूमिका सामने आई है. पूछताछ में दावा किया गया है कि उसे हनी ट्रैप के जरिए पश्चिम बंगाल के राजनीतिक हलकों तक पहुंच बनाने का टास्क दिया गया था. उसका पहला टास्क था पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री की हत्या करना. इन्हें पुलिस की वर्दी पहनकर जंतर-मंतर पहुंचकर माहौल खराब करने का भी टास्क दिया गया था.
अमृतसर मॉड्यूल
पंजाब पुलिस ने अमृतसर में ISI समर्थित दो अलग-अलग मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया. कार्रवाई के दौरान चार नाबालिगों समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया.इनके कब्जे से तीन अवैध पिस्तौल, नौ कारतूस, चार पेट्रोल बम और चोरी की मोटरसाइकिल बरामद हुई. अमृतसर पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने खुलासा किया कि जांच में पता चला है कि यह समूह पहले दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंच चुका था.
वहां उन्हें स्थानीय स्तर पर मदद और कुछ हथियार भी उपलब्ध कराए गए थे. हालांकि, किसी वजह से वे अपनी योजना को अंजाम नहीं दे सके और वापस पंजाब लौट गए. पूछताछ में पुलिस को पता चला कि आरोपी पुलिस प्रतिष्ठानों की रेकी कर रहे थे।सुरक्षा बलों की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे।रेलवे ट्रैक के पास कैमरे लगा रहे थे।कैमरों की लाइव फुटेज विदेश में बैठे हैंडलरों को भेज रहे थे. पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की तैयारी कर रहे थे।जांच में यह भी सामने आया कि रेलवे ट्रैक के पास लगाए गए कैमरों की पेमेंट ऑनलाइन की गई थी. इस मामले में जेल में बंद दो आरोपियों की भूमिका भी सामने आई है, जिन्हें प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया गया. सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल और अमृतसर मॉड्यूल का सरगना पाकिस्तान का आतंकी शहजाद भट्टी है।
तरनतारन मॉड्यूल: तरणतारन पुलिस और बीएसएफ ने संयुक्त ऑपरेशन में मनजीत सिंह को गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक, वह पाकिस्तान में बैठे हथियार तस्करों के सीधे संपर्क में था. उसके घर से भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए. इनमें 7 विदेशी पिस्तौल, MP-9 गन, बड़ी संख्या में कारतूस और मोबाइल फोन शामिल हैं।पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि ये हथियार पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए भेजे गए थे। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन हथियारों का इस्तेमाल पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (PIO) और गैंगस्टरों के जरिए टारगेट किलिंग में किया जाना था। आरोपी के मोबाइल फोन से पाकिस्तान के 12 नंबर मिले हैं। इनमें दो नंबर चाचा और रहमान के नाम से सेव थे. पुलिस का मानना है कि ये असली नाम नहीं बल्कि कोड नेम हो सकते हैं. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर चाचा और रहमान कौन हैं? साथ ही आरोपी के बैंक खातों, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और मनी ट्रेल की भी जांच की जा रही है. क्या 15 अगस्त से पहले किसी बड़ी आतंकी या टारगेट किलिंग की योजना थी. फिलहाल, सभी मामलों की जांच जारी है।
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