बहाना होगा 21 जुलाई शहीद दिवस, दिल्ली में भी राजघाट पर होगा कार्यक्रम
अशोक झा/ कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सियासत के लिए 21 जुलाई (शहीद दिवस) पर इस बार बंगाल की राजनीति में बिल्कुल नया और अभूतपूर्व नजारा देखने को मिलेगा। राज्य में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस की 15 साल पुरानी सरकार के खत्म होने से न सिर्फ़ राज्य का राजनीतिक माहौल बदला है, बल्कि टीएमसी के 'शहीद दिवस' कार्यक्रम पर भी असर पड़ा है, जिसे पार्टी पारंपरिक रूप से हर साल 21 जुलाई को मनाती रही है.
1 जनवरी 1998 को टीएमसी के गठन के बाद पहली बार पार्टी तीन गुटों में बंट गई है. हर गुट पार्टी की राजनीतिक विरासत पर अपना दावा कर रहा है और 21 जुलाई का कार्यक्रम अलग-अलग मनाने की तैयारी कर रहा है। पिछले सालों के उलट, इस साल 21 जुलाई का कोई भी कार्यक्रम मध्य कोलकाता के सेंट्रल एवेन्यू पर नहीं होगा, जहां ममता लगभग दो दशकों से सालाना रैली आयोजित करती रही थीं।
कोलकाता पुलिस ने 'शहीद दिवस' रैली की पारंपरिक जगह समेत मध्य कोलकाता के कई इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की है। कोलकाता पुलिस कमिश्नर और एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट अजय नंद की ओर से जारी यह आदेश 2 जुलाई से लागू हो गया है और 30 अगस्त तक प्रभावी रहेगा। पुलिस ने खुफिया जानकारी का हवाला देते हुए कहा है कि कई राजनीतिक कार्यक्रमों से हिंसा भड़क सकती है और कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है। विधानसभा चुनाव 2026 के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में विद्रोह के बाद इस साल 21 जुलाई को 3 अलग-अलग राजनीतिक खेमे कोलकाता और दिल्ली की सड़कों पर अपना-अपना शक्ति प्रदर्शन करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। आज होने वाले कार्यक्रम और आने वाली भीड़ को लेकर कोलकोता पुलिस पूरी तरह सतर्क है। सतर्कता इसलिए भी बढ़ाई गई है क्योंकि मदन मित्रा जैसे नेता ने किसी बड़े संघर्ष की आशंका जताई है। प्रत्येक वर्ष से अलग इस बार मुकाबला सिर्फ राजनीतिक भाषणों का ही नहीं है। दूर-दराज से आने वाले कार्यकर्ताओं का दिल जीतने के लिए खाने-पीने (मेन्यू) के इंतजाम में भी तीनों खेमों के बीच दिलचस्प होड़ लगी है।
ममता बनर्जी गुट यानि कालीघाट टीएमसी की ओर से
पार्टी में हुए विद्रोह और हालिया चुनावी झटकों के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले धड़े के लिए यह रैली एक बड़े 'लिटमस टेस्ट' की तरह है। आज के कार्यक्रम में आने वाली भीड़ और समर्थक पार्टी के भविष्य का नीति निर्धारित करेंगे।
कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था के मद्देनजर इस बार वेन्यू में बड़ा बदलाव किया गया है। 15 साल में पहली बार एस्प्लेनेड की बजाय यह रैली बिरला प्लेनेटेरियम के सामने आयोजित हो रही है, जहां कोर्ट ने अधिकतम 2,500 से 3,000 समर्थकों के जुटने की ही अनुमति दी है। मिली जानकारी के अनुसार ममता बनर्जी गुट ने हमेशा की तरह सादगी और बंगाल की पारंपरिक संस्कृति को ध्यान में रखते हुए अपने कार्यकर्ताओं के लिए खिचड़ी, लाबड़ा (मिश्रित सब्जी) और चटनी का खास प्रबंध किया है। कुछ कैंपों में कार्यकर्ताओं के लिए दाल-भात और सब्जी की व्यवस्था भी की गयी है। टीएमसी की बागी गुट यानि ऋतुव्रत बनर्जी गुट की बात करे तो कमरहट्टी के विधायक मदन मित्रा, अरूप रॉय और फिरहाद हकीम जैसे पुराने नेताओं के समर्थन वाला यह बागी धड़ा खुद को 'असली टीएमसी' साबित करने की होड़ में है।
यह गुट कोलकाता के मेयो रोड पर महात्मा गांधी की मूर्ति के सामने अपना अलग शहीद दिवस मना रहा है। इस गुट के नेताओं ने साफ कर दिया है कि उनके कार्यक्रम में कोई नाच-गाना या तड़क-भड़क नहीं होगी। बल्कि शहीदों को बेहद गंभीर और गरिमामयी श्रद्धांजलि दी जायेगी। इस खेमे ने आने वाले लाखों समर्थकों को के लिए मेन्यू को थोड़ा खास बनाया है। इनके कैंपों में कार्यकर्ताओं के लिए सोयाबीन की सब्जी, दाल, भात (चावल) और पापड़ के साथ-साथ कई जगहों पर अंडे की कढ़ी (एग करी) परोसने की भी तैयारी है।
ममता की करीबी और अब सबसे बड़ी राजनीतिक दुश्मन काकोली घोष दस्तीदार का दिल्ली में राजघाट पर करेंगी मार्च: इन दो रैलियों के अलावा, टीएमसी के उन 20 लोकसभा सांसदों का समूह, जो हाल ही में NCPI में शामिल हो चुका है।उसकी अगुवाई कर रहीं सांसद काकोली घोष दस्तीदार इस दिन को नयी दिल्ली के राजघाट पर मना रही हैं। उन्होंने भी 1993 के गोलीकांड में मनीष गुप्ता की भूमिका पर सवाल उठाते हुए टीएमसी नेतृत्व को घेरा है। वही तीन कार्यक्रम के अलावा कांग्रेस शहीद दिवस को मानती है अपना कार्यक्रम : शहीद मीनार के पास कांग्रेस के कार्यक्रम स्थल का सोमवार की शाम ऐसा था नजारा। बंगाल प्रदेश कांग्रेस का कहना है कि मूल रूप से 1993 का यह आंदोलन ममता बनर्जी के नेतृत्व में युवा कांग्रेस के बैनर तले ही हुआ था। इसलिए कांग्रेस इस बार अपनी खोयी हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।कांग्रेस एस्प्लेनेड इलाके में अपनी अलग सभा कर रही है।पार्टी के वरिष्ठ नेता कार्यकर्ताओं को एकजुट कर राज्य में कांग्रेस के पुनरोद्धार की उम्मीद लगाये बैठे हैं। कांग्रेस कैंपों में मुख्य रूप से मुड़ी-गुड़ (मुरमुरा और गुड़), चाय-बिस्कुट के साथ-साथ दोपहर के भोजन के लिए सब्जी-पूरी और खिचड़ी का इंतजाम किया गया है। अब देखना है कि टीएमसी के किस गुट को कार्यकर्ताओं का समर्थन और प्यार मिलता है।
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