- यह एनएचपीसी की तीस्ता स्टेज -6 जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन है सुरंग
- राहत बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी, जहरीले गैस के कारण हो रही है दिक्कतें
अशोक झा/ गंगटोक: सिक्किम के नामची जिले में एनएचपीसी की तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में बड़ा हादसा हो गया। सुरंग के अंदर मीथेन गैस में विस्फोट होने के बाद भूस्खलन हुआ, जिससे सुरंग का एक हिस्सा बंद हो गया और 27 से ज्यादा मजदूर अंदर फंस गए। जिला प्रशासन के मुताबिक अब तक 7 मजदूरों की मौत हो चुकी है। फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। जानकारी के मुताबिक, सुरंग के अंदर करीब 1.5 किलोमीटर तक मीथेन गैस जमा हो गई थी। गैस को बाहर निकालने की कोशिश के दौरान विस्फोट हुआ, जिसके बाद सुरंग का रास्ता मलबे से बंद हो गया। हादसे के बाद कुछ मजदूर बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन कई मजदूर अब भी सुरंग के अंदर फंसे हुए हैं।
कई जवानों को सांस लेने में आ रही है दिक्कत:
घटना की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जिला पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं। हालांकि, सुरंग के अंदर जहरीली गैस, ऑक्सीजन की कमी और बेहद कम दृश्यता के कारण बचाव अभियान में भारी मुश्किलें आ रही हैं। शुरुआती रेस्क्यू के दौरान फायर ब्रिगेड के कई जवानों को सांस लेने में दिक्कत हुई, जिसके बाद अभियान रोकना पड़ा. हालांकि फायर ब्रिगेड और एनडीआरएफ की टीम का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य: बचाव अभियान को तेज करने के लिए पश्चिम बंगाल से विशेष गैस-प्रोटेक्शन उपकरणों से लैस टीम भी बुलाई गई है. एंबुलेंस मौके पर तैनात हैं और गैस मास्क व सुरक्षा उपकरणों के साथ रेस्क्यू टीमें लगातार मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। जिला प्रशासन के मुताबिक, सुरंग में जहरीली मीथेन गैस, संकरा रास्ता और कम दृश्यता बचाव अभियान को बेहद चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं. फिलहाल सभी एजेंसियां युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। सुरंग के भीतर संदिग्ध मीथेन गैस के रिसाव ने बचाव अभियान को और जटिल बना दिया है। जिला प्रशासन ने सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया है।
पटेल इंजीनियरिंग और एनएचपीसी के कर्मचारी फंसे
नामची की जिला कलेक्टर अनुपा तामलिंग ने बताया कि फिलहाल सुरंग में फंसे मजदूरों की संख्या का पता किया जा रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार पटेल इंजीनियरिंग के 21 और एनएचपीसी के 6 कर्मचारी, यानी कुल 27 लोग सुरंग के भीतर फंसे हुए हैं। प्रशासन को करीब 3:40 बजे इस घटना की सूचना मिली, जिसके तुरंत बाद बचाव दल मौके पर पहुंचा और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
मीथेन गैस और संकरी सुरंग से बढ़ी मुश्किल: अधिकारियों के मुताबिक लैंडस्लाइड के बाद भूमिगत चट्टानों और परतों में हलचल होने से सुरंग के भीतर प्राकृतिक रूप से मीथेन गैस निकलने की आशंका है। मीथेन गैस की मौजूदगी, सुरंग का संकरा रास्ता और बेहद कम विजिबिलिटी के कारण बचाव अभियान लगातार कठिन होता जा रहा है। टनल में फंसे मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश के दौरान बचावकर्मियों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बचावकर्मियों को टनल में दाखिल होते ही चक्कर आने लगे और कुछ बेहोश भी हो गए।NDRF-SDRF समेत कई एजेंसियां जुटीं
बचाव अभियान में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जिला पुलिस और अग्निशमन एवं इमरजेंसी सर्विसेज की टीमें लगी हुई हैं। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल से गैस-रोधी उपकरणों से लैस एक विशेष बचाव दल भी मौके पर पहुंच गया है। एंबुलेंस को अलर्ट मोड पर रखा गया है, जबकि गैस मास्क और अन्य सुरक्षा उपकरणों के साथ बचावकर्मी सुरंग के भीतर पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसी ही एक घटना में वर्ष 2023 में उत्तरकाशी के सिलक्यारा टनल में 41 मजदूर फंस गए थे जिन्हें करीब दो हफ्ते बाद एक कठिन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बाहर निकाला गया था।।तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना का हिस्सा है सुरंग: अधिकारियों ने बताया कि यह सुरंग एनएचपीसी की तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना के लिए बनाई जा रही एडीआईटी (ADIT) सुरंग का हिस्सा है, जिसका निर्माण पटेल इंजीनियरिंग कर रही है। जिला प्रशासन का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता सभी फंसे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना है। इसके बाद हादसे के कारणों की विस्तृत जांच कराई जाएगी।सिक्किम जैसे पर्वतीय राज्यों में सुरंग निर्माण तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। समरडुंग टनल परियोजना की शुरुआत 2020 में हुई थी और इसे 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि, निर्माण कार्य के दौरान आई इस दुर्घटना ने परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए बेहतर वेंटिलेशन सिस्टम, रियल-टाइम गैस मॉनिटरिंग और सुरक्षा मानकों का और सख्ती से पालन करना आवश्यक होगा।एनडीआरएफ समेत कई एजेंसियां मौके पर: रेस्क्यू ऑपरेशन में स्थानीय प्रशासन, एनडीआरएफ और अन्य संबंधित एजेंसियां शामिल हैं। श्रमिकों के परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक स्रोतों से जारी जानकारी पर ही भरोसा करें।
दुनियाभर के घुमक्कड़ पत्रकारों का एक मंच है,आप विश्व की तमाम घटनाओं को कवरेज करने वाले खबरनवीसों के अनुभव को पढ़ सकेंगे
https://www.roamingjournalist.com/