चुनाव हार के बाद बंगाल में असली और नकली टीएमसी के बीच तेज हुई जंग
जुलाई 14, 2026
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- एक दूसरे गुट खोल रहे एक दूसरे की पोल पट्टी, ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से गुहार
- ममता के बागी गुट का लागतार हो रहा पकड़ मजबूत, करीबी छोड़ रहे साथ
अशोक झा/ कोलकाता: बंगाल में सियासी संघर्ष का दौर बना हुआ है। विधानसभा चुनाव में शिकस्त के बाद झटकों का सामना कर रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सामने अपने अस्तित्व को बचाने की चुनौती है। ममता बनर्जी के सामने सिर्फ पार्टी नहीं बल्कि उसके खजाने को बचाने की चुनौती है। बागी गुट में ममता के करीबी लगातार ज्वाइन कर रहे है। एक दूसरे गुट के नेता पार्टी की पोल पट्टी खोलने में लगे है। तृणमूल में अंदरूनी मतभेद और गहराते जा रहे हैं। पार्टी पर अपना हक जताने के लिए विरोधी गुटों के बीच खींचतान जारी रही. लोअर कोर्ट की एक टिप्पणी और कलकत्ता हाईकोर्ट की सुनवाई ने इस विवाद को और हवा दे दी।णमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी ने रविवार (12 जुलाई, 2026) को प्रतिद्वंद्वी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी को लेकर चुनाव आयोग को एक पत्र लिखा है। पत्र में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया है कि टीएमसी के प्रतिद्वंद्वी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी को अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और संगठनात्मक चुनावों से जुड़े दावों पर जवाब देने के लिए और समय नहीं दिया जाना चाहिए।पार्टी के भीतर जारी विवाद 2 जुलाई, 2026 को उस समय और गहरा गया था, जब ऋतब्रत के नेतृत्व वाले गुट ने खुद को असली तृणमूल कांग्रेस (AITC) बताते हुए चुनाव आयोग का रुख किया. इस गुट ने कहा था कि उसने 22 जून को आयोजित विशेष अधिवेशन के बाद आयोग को इसकी जानकारी दी थी और संगठन में किए गए कथित बदलावों को मान्यता देने का अनुरोध किया था.
चुनाव आयोग ने दोनों गुटों से दावों पर मांगा जवाब
पीटीआई भाषा के मुताबिक, इस दावे के बाद चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी, दोनों को चिट्ठी भेजकर अपना-अपना जवाब दाखिल करने को कहा था. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने 6 जुलाई, 2026 को अपना जवाब दाखिल कर दिया, जबकि चुनाव आयोग ने ऋतब्रत बनर्जी के गुट को जवाब दाखिल करने के लिए 10 जुलाई, 2026 को शाम साढ़े पांच बजे (5:30 बजे) तक का समय दिया था।पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, '10 जुलाई के बाद 48 घंटे और बीत जाने के बावजूद आपका कार्यालय पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है, जिससे ऋतब्रत बनर्जी को और अवसर मिल रहा है और यह उनके दुर्भावनापूर्ण मकसद के प्रति आपके झुकाव को दर्शाता है. इसलिए, मैं आग्रह करती हूं कि मेरी ओर से दाखिल जवाब पर शीघ्र विचार किया जाए और ऋतब्रत बनर्जी को कोई और समय नहीं दिया जाए।
दोनों गुटों का चुनाव चिह्न की वैधता का दावा
ममता गुट की ओर से आलोचना का जवाब देते हुए, ऋतव्रत बनर्जी गुट के संदीपन साहा ने कहा कि लोअर कोर्ट का आदेश सभी को पता है और तर्क दिया कि अगर कोई और TMC के लोगो का इस्तेमाल करता है तो उस पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि अपर कोर्ट का आदेश पुराने गुट के पक्ष में नहीं था और जोर देकर कहा कि ऋतव्रत गुट ही असली तृणमूल का प्रतिनिधित्व करता है। साहा ने विरोधी गुट के नेतृत्व द्वारा अपनाई गई प्रक्रियाओं पर भी सवाल उठाए और कहा कि इस मुद्दे को सिर्फ राजनीतिक दबाव से हल नहीं किया जा सकता।
कानूनी और राजनीतिक लड़ाई अब पार्टी की पहचान पर नियंत्रण की एक बड़ी परीक्षा बन गई है, जिसमें दोनों पक्ष संगठन के जनादेश और अपने चुनाव चिह्न की वैधता का दावा कर रहे हैं. चूंकि यह मामला अदालत में विचाराधीन है, इसलिए दोनों गुटों के नेताओं ने सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने के साथ-साथ अपनी राजनीतिक दलीलों को मजबूत करने के लिए अदालत की टिप्पणियों का इस्तेमाल किया है।
लोअर कोर्ट की टिप्पणी ऋतव्रत बनर्जी गुट के पक्ष में रही, जिसके बाद उस गुट ने दावा किया कि उन्हें ही तृणमूल की असली अथॉरिटी के तौर पर मान्यता मिली है और अरूप रॉय को पार्टी के कामकाज संभालने के लिए एकमात्र अधिकृत व्यक्ति बनाया गया है. ऋतव्रत ने कल कहा कि तृणमूल कार्यकर्ताओं की ओर से दाखिल एक मामले अलीपुर कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि 22 जून को गठित समिति ही कानूनी रूप से मान्य है. हालांकि, कोर्ट की टिप्पणी पर विरोधी गुट का कहना है कि मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।
असली पार्टी का दावा गलतः सौगत रॉय
TMC के वरिष्ठ नेता सौगत रॉय ने बागी गुट के “असली” पार्टी होने के दावे को खारिज कर दिया और कहा कि ममता बनर्जी की तृणमूल ही असली पार्टी है. रॉय ने कहा, “ममता बनर्जी ने खुद तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी और उन्होंने ही इस पार्टी को विपक्षी समूह से राज्य की सत्ताधारी पार्टी बनाया.” उन्होंने कहा कि विरोधी गुट के दावे का कोई मतलब नहीं है।उन्होंने यह भी कहा कि इस विवाद को तमाशा बनाया जा रहा है. उन्होंने पूरे विवाद को “मजाक” और “सर्कस” करार दिया और बागी गुट पर पार्टी दफ्तरों तथा सार्वजनिक विवाद के जरिए ध्यान खींचने की कोशिश करने का आरोप लगाया.
पार्टी का फंड लौटा देना चाहिएः घोष
पार्टी नेता कुणाल घोष ने बागी नेताओं पर हमला तेज करते हुए आरोप लगाया कि चुनावों के दौरान उन्हें पार्टी के समर्थन का फायदा मिला था और अब वे उसी पार्टी के ढांचे पर सवाल उठा रहे हैं. घोष ने कहा कि बागी विधायक तृणमूल के चुनाव चिह्न और पार्टी से मिली आर्थिक मदद से जीते थे. उन्होंने आरोप लगाया कि संदीपान साहा ने चुनाव प्रचार में 27 लाख रुपये से अधिक खर्च किए, जिसमें पार्टी के खाते से खर्च किए गए 25 लाख रुपये भी शामिल थे।
घोष ने कहा, “वे पहली बार पार्टी के चुनाव चिह्न और उसके फंड से विधायक बने थे और आज वे उसी खाते की जांच की मांग कर रहे हैं.” उन्होंने बागी नेताओं पर “पीठ में छुरा घोंपने” जैसा व्यवहार करने का आरोप भी लगाया और पैसे वापस करने की मांग की।
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