बंगाल में अब प्राइवेट स्कूलों की नहीं चलेगी मनमानी, शिक्षा के मंदिर को व्यापार का केंद्र नहीं बनने देगी सरकार
जुलाई 14, 2026
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- सरकारी स्कूलों के परिचालन में अब नेताओं की इंट्री बंद, अभिभावको कि होगी जगह
- जिन विद्यालयों को एनओसी मिला है उसकी भी फिर से होगी जांच
अशोक झा/ कोलकाता: बंगाल सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव का ब्लूप्रिंट तैयार किया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विकास भवन में प्राइमरी, अपर प्राइमरी, सेकेंडरी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की संरचना को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की।बैठक में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार और केंद्र सरकार के आठ वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।पश्चिम बंगाल में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी और अत्यधिक फीस वसूली को रोकने के लिए राज्य सरकार ने कड़े कदम उठाने शुरू किए हैं, जिसके तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बंगाल में निजी स्कूलों की मनमानी मुख्य रूप से अत्यधिक फीस वृद्धि, नियमों की अनदेखी और कुछ हालिया विवादित मामलों से जुड़ी हुई है। सरकार के सख्त नियम और हालिया एक्शन: UDISE+ पोर्टल पर डेटा सबमिशन: पश्चिम बंगाल समग्र शिक्षा मिशन ने सभी निजी स्कूलों के लिए यूडाइस प्लस पोर्टल पर छात्रों और स्कूल से जुड़ी सही जानकारी अपलोड करना अनिवार्य कर दिया है। शो-कॉज और जुर्माना: जानकारी न देने या नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों को पहले शो-कॉज नोटिस दिया जाएगा और फिर वित्तीय जुर्माना सहित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नियामक आयोग : निजी स्कूलों के खिलाफ मिलने वाली शिकायतों (जैसे अत्यधिक फीस या री-एडमिशन चार्ज) की जांच के लिए एक नियामक आयोग के गठन की प्रक्रिया पर काम चल रहा है, जिसकी अध्यक्षता एक पूर्व जज करेंगे।
फीस नियंत्रण बिल: राज्य सरकार निजी स्कूलों की फीस को रेगुलेट और सीमित करने के लिए विधानसभा में एक नया फीस कंट्रोल बिल लाने की तैयारी में है।मनमाने तरीके से फीस वसूलने के धंधे पर रोक लगाने की बात कहते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इन संस्थानों से यह भी कहा कि उन्हें ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए, जिससे सरकार को शर्मिंदगी उठानी पड़े।' सरकार के नियंत्रण में होना चाहिए स्कूलों की फीस'अभिभावकों और टीचरों की मौजूदगी में आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे सीए सुवेंदु ने कहा- 'फीस या अन्य शुल्कों को विनियमित करने के मामले में सरकार का नियंत्रण होना चाहिए।
अगले सप्ताह तक केंद्रांश मिलने की उम्मीद: बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से कहा कि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है। इसलिए केंद्र और राज्य सरकार की इसमें समान जिम्मेदारी है. पिछली सरकार की गलत नीतियों के कारण केंद्र का जो पैसा रुका हुआ था, वह जल्द ही राज्य के खजाने में आ जायेगा. इस वित्तीय वर्ष की केंद्रीय ग्रांट की राशि अगले सप्ताह मिलने की उम्मीद है।
81 हजार स्कूलों का होगा कायाकल्प: एक अगस्त से राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में नये अध्याय की शुरुआत होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय ग्रांट की राशि से राज्य के 81 हजार स्कूलों का कायाकल्प किया जायेगा। सभी स्कूलों में स्वच्छ शौचालय और आर्सेनिक मुक्त पेयजल की व्यवस्था की जायेगी। छात्राओं की सुविधा के लिए सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें भी लगायी जायेंगी। बेलगाम फीस वृद्धि पर भी कड़ी नजर:
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक अगस्त से राज्य के छात्रों को मिलने वाले मिड डे मील की पोषण गुणवत्ता में भी सुधार किया जायेगा। इसके साथ ही सरकार निजी स्कूलों और विश्वविद्यालयों की बेलगाम फीस वृद्धि पर भी कड़ी नजर रखेगी। जिन संस्थानों को एनओसी दी गयी है, उनकी सख्ती से जांच होगी. यदि वे नियमों का पालन नहीं करते हैं तो उनकी मंजूरी के नवीनीकरण पर पुनर्विचार किया जायेगा।
परिचालन कमेटियों में नेता को को जगह नहीं: उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षा को किसी भी कीमत पर उत्पाद नहीं बनने दिया जायेगा. मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि स्कूलों की परिचालन कमेटियों में किसी भी नेता को शामिल नहीं किया जायेगा। इन कमेटियों में छात्रों के अभिभावकों को स्थान दिया जायेगा, जबकि स्कूल के प्रशासक को ही परिचालन कमेटी का मुख्य अधिकारी बनाया जायेगा। परिचालन कमेटियों में नेता को को जगह नहीं: उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षा को किसी भी कीमत पर उत्पाद नहीं बनने दिया जायेगा. मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि स्कूलों की परिचालन कमेटियों में किसी भी नेता को शामिल नहीं किया जायेगा. इन कमेटियों में छात्रों के अभिभावकों को स्थान दिया जायेगा, जबकि स्कूल के प्रशासक को ही परिचालन कमेटी का मुख्य अधिकारी बनाया जायेगा।
नियुक्तियों की समस्या जल्द होगी खत्म: उन्होंने ओबीसी मामले के कारण नियुक्तियों में हो रही देरी पर कहा कि जल्द ही विधानसभा में कानून लाकर स्थिति को दुरुस्त किया जायेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य सरकार जल्द ही इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया से आगे निकल जायेगी। उन्होंने बताया कि नियुक्ति बोर्ड का चेयरमैन दुष्मंत नरियाल को बनाया गया है और उन्होंने सोमवार से पदभार संभाल लिया है।नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह साफ-सुथरी और पारदर्शी होगी।
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