-13 घंटे की मैराथन पूछताछ में टूटा रमाशंकर, उगले कई राज; सील हुआ कमरा, DVR भी जब्त
अशोक झा/अयोध्या: श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच में 14 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान पुलिस को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। पुलिस ने रिमांड पर लिए गए दोनो आरोपियों सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर मिश्रा से पूरे घटनाक्रम का सीन रिक्रिएट कराया। इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात इन आरोपियों की मंदिर में भूमिका को लेकर है। आरोपी सुभाष श्रीवास्तव एक रिटायर्ड बैंक कर्मचारी है, जिसे उसकी विशेषज्ञता के कारण राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा दान में आने वाली नगदी की गिनती की देखरेख (सुपरविजन) करने के काम पर लगाया गया था। वहीं, दूसरा आरोपी रमाशंकर मिश्रा पिछले 5 सालों से राम मंदिर में कार्यरत था। शुरुआत में वह मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं की तस्वीरें खींचकर अपनी आजीविका चलाता था, लेकिन बाद में उसका भरोसा जीतकर उसे दानपात्र से चढ़ावे की रकम को निकालकर सुरक्षित काउंटिंग रूम (गिनती कक्ष) तक पहुंचाने की बेहद संवेदनशील जिम्मेदारी सौंप दी गई थी। इसी भरोसे का फायदा उठाकर इन दोनों ने मिलकर आस्था के सबसे बड़े केंद्र में चोरी की इस शर्मनाक वारदात को अंजाम दिया।पूछताछ के दौरान पुलिस ने सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर मिश्रा से अलग-अलग तथा आमने-सामने बैठाकर भी सवाल किए, ताकि उनके बयानों का मिलान किया जा सके। इस दौरान रमाशंकर ने चढ़ावा चोरी से जुड़े कई अहम और चौंकाने वाले तथ्यों का खुलासा किया।
उसने पुलिस को बताया कि चोरी की बड़ी रकम को कैसे छिपाया जाता था और बाद में संदेह से बचते हुए किस तरीके से उसे बाहर निकाला जाता था। अब दोनों आरोपियों से मिली जानकारियों के आधार पर चोरी के पूरे नेटवर्क और उसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकती है। पुलिस अब पूछताछ और बरामद साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई में जुटी है।
रमाशंकर मिश्रा के पिता से पुलिस ने की पांच घंटे पूछताछ
पुलिस ने राममंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपी रमाशंकर मिश्रा के पिता छ्ड्डू लाल मिश्रा से बुधवार को पांच घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान पुलिस उनके बैंक खाते तथा अन्य सम्पत्तियों के बारे में जानकारी जुटाती रही। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह रिपोर्ट शनिवार तक शासन को सौंपी जा सकती है। बताया जा रहा है कि अंतिम रिपोर्ट में कोई नया तथ्य सामने आने की उम्मीद नहीं है, लेकिन चढ़ावा चोरी रोकने में नाकाम रहे लोगों की जवाबदेही साफ तौर पर तय की गई है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर कई बड़े लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। इसमें अनिल मिश्रा, चंपत राय और गोविंद देव गिरी की भूमिका स्पष्ट होने की प्रबल संभावनाएं जताई जा रहीं हैं।
साफ हो सकती है चंपत राय की भूमिका: रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंतिम रिपोर्ट में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की भूमिका भी स्पष्ट हो सकती है।
शुरुआती जांच रिपोर्ट में एसआईटी ने सीधे तौर पर किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की थी, लेकिन अब विस्तृत रिपोर्ट में कई अहम पहलुओं को शामिल किया गया है।इसके साथ ही ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि की भूमिकाओं की भी जांच की गई है।
CCTV फुटेज में साफ हुआ था चोरी का तरीका
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) के आधार पर यह साफ किया गया था कि अविनाश शुक्ला और मनीष यादव गणना कक्ष (Counting Room) में नोटों की गड्डियां चोरी करते थे, जबकि बाकी लोग उनकी मदद करते थे।जांच में यह भी सामने आया था कि दानपात्रों की चाबियां रमाशंकर यादव टिन्नू के कब्जे में रहती थीं। हैरानी की बात यह रही कि उन्हें न तो ट्रस्ट की ओर से अधिकृत किया गया था और न ही बैंक की तरफ से, फिर भी वे सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे थे।वहीं, रिटायर बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव गणना के प्रभारी जरूर थे, लेकिन उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया।ड्राइवर से राम मंदिर पहुंचने और प्रॉपर्टी बनाने की हकीकत बताएगा टिन्नू
पुलिस को उम्मीद है कि राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू और सुभाष श्रीवास्तव कई राज बताएंगे। सबसे अहम पूछताछ टिन्नू से होगी। वह पुलिस को ड्राइवर से राम मंदिर पहुंचने के साथ इतनी बड़ी प्रॉपर्टी कैसे खड़ी की इसकी सटीक जानकारी देगा। सुभाष श्रीवास्तव बताएगा कि उसने कर्मचारियों को किसके कहने पर रखा था और उन्हें चोरी की जानकारी कैसे नहीं हुई। चढ़ावा चोरी गैंग का लीडर अविनाश शुक्ला बताया जा रहा है। क्योंकि इसके पास से सबसे ज्यादा 20 लाख 39 हजार 220 रुपये और 1121 अमेरिकी डॉलर जिसका भारतीय मूल्य करीब 106657 रुपए के साथ 11 ग्राम सोना और 375 ग्राम चांदी बरामद की गई थी। सूत्र बताते हैं कि विवेचक को इस आरोपी ने बहुत से राज बताए हैं। वह अपने साथ जीजा-साले अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश को रखता था। इसलिए पुलिस ने दूसरी बार इन तीनों लोगों को कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। यह सभी पुलिस को उन स्थानों पर ले गए जहां पर रकम का बंटवारा होता था। अब सबसे मजबूत कड़ी टिन्नू यादव का नम्बर आया है
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