- आयोग की रिपोर्ट के आधार पर मृतक को 25 लाख घायलों को दो- दो लाख
- 33 साल बाद भाजपा सरकार रिपोर्ट को करेंगी सार्वजनिक
अशोक झा/ कोलकाता: बंगाल में भाजपा सरकार ऐसा कदम उठाया है कि अब शहीद दिवस के नाम पर राजनीति करने वालों की जुबान बंद हो गई है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को विधानसभा में घोषणा की कि वर्ष 1993 के 21 जुलाई पुलिस गोलीकांड में मारे गए युवक कांग्रेस कार्यकर्ताओं के परिजनों और घायलों को न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सुशांत चटर्जी आयोग की सिफारिशों के अनुरूप वित्तीय सहायता दी जाएगी।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये और प्रत्येक घायल को पांच लाख रुपये का मुआवजा प्रदान करेगी।
विधानसभा में आयोग की रिपोर्ट पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आयोग ने मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये और घायलों को पांच लाख रुपये देने की सिफारिश की थी, लेकिन तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार ने इन सिफारिशों को लागू नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि उस समय मृतकों के परिवारों को केवल दो-दो लाख रुपये और घायलों को मात्र 15-15 हजार रुपये दिए गए।मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है और सभी पात्र परिवारों को निर्धारित वित्तीय सहायता मुख्यमंत्री राहत कोष से उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि यदि पीड़ित परिवार चाहें तो इस मामले में नई प्राथमिकी दर्ज कराने का अवसर भी राज्य सरकार उपलब्ध कराएगी। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सुशांत चटर्जी आयोग की रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया है कि 21 जुलाई 1993 को पुलिस द्वारा की गई गोलीबारी आवश्यक नहीं थी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की दिशा में भी आवश्यक कदम उठाना है।
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