अब सब ठीक है...
तनिक असावधानी और अनिश्चय कितना बड़ा संकट खड़ा कर सकता है, मै आज इसका भुक्तभोगी बना। शाम को 4 बजे के करीब मैं भातखंडे विवि में प्रवेश से जुड़ी एक प्रक्रिया में व्यस्त था। उसी समय एक कॉल आई कि बैंक से जुड़ा एक दस्तावेज स्पीड पोस्ट से आया है, पोस्टमैन घर के आस-पास खड़ा है, पते को लेकर कुछ भ्रम है आप बात कर लीजिए। संयोग से बैंक से जुड़े कुछ संवाद पहले से चल रहे थे।
मैनें उससे कहा कि पोस्टमैन से कहिए फोन मिला ले। थोड़ी देर बाद फोन आया कि आपका नंबर नहीं लग रहा, पोस्टमैन का नंबर भेज रहा हूं आप बात कर लीजिए। मैनें फोन लगा दिया। फोन उठाने वाले ने कहा कि आप *21* फिर मोबाइल नंबर और # लगाकर कॉल करिए जिससे वैरिफकेशन किया जा सके।
आपाधापी और जल्दी में मैनें ध्यान नहीं दिया और उसके कहे में आ गया।
कॉल करते ही मेरा मोबाइल नंबर फॉरवर्ड हो गया। इसके साथ ही मेरा व्हाट्सएप हैक हो गया। आपमें बहुतों के पास मेरे व्हाट्सअप से पैसे की मांग भी पहुंची, मैसेज देख शुभचिंतकों ने फोन मिलाया तो मेरा नंबर स्विच ऑफ बता रहा था, क्योंकि, हैकर ने उसे पहले ही फॉरवर्ड कर दिया था। दफ्तर से साथी कनिष्क जी और क्रांति जी घर तक पहुंच गए यह जानने के लिए कोई अनहोनी तो नहीं हो गई।
आम तौर पर मैं जागरूकता के सभी नियमों, प्रक्रियाओं का पालन करता हूं, लेकिन, जल्दबाजी के चलते शिकार हो गया। आप सभी बधाई के पात्र हैं, आप सबने मेरे नाम पर किए गए फेक मैसेज को पहचाना और धोखाधड़ी का शिकार होने से बच गए। सभी से अनुरोध है कि मेरे अनुभव से सबक लें और किसी भी फोन, ओटोपी, कॉल आदि पर प्रतिक्रिया देने से पहले रूक कर कई बार अवश्य सोचें। ( नवभारत टाइम्स लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार प्रेमशंकर मिश्र के फेसबुक से साभार )
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