- 21 जुलाई शहीद दिवस को लेकर टीएमसी के दोनों गुट में संग्राम,आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू
अशोक झा/ कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक शुक्रवार को पश्चिम बंगाल से भाजपा उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुन लिए गए।इन तीनों सांसदों के पाला बदलने के कुछ ही दिन के बाद यह राजनीतिक उलट-फेर हुआ है।15 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच के बाद मैदान में कोई और उम्मीदवार नहीं बचा था, इसलिए शुक्रवार को नामांकन वापस लेने की समयसीमा खत्म होने के बाद इन तीनों प्रत्याशियों को निर्वाचित घोषित कर दिया गया। निर्वाचन अधिकारी ने इन तीनों के निर्विरोध चुने जाने की औपचारिक घोषणा के बाद उन्हें निर्वाचन प्रमाण-पत्र सौंपे।
टीएमसी छोड़ भाजपा में हुए थे शामिल
रॉय, देव और बड़ाईक 9 जुलाई को कोलकाता में भाजपा में शामिल हुए थे तथा पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने 24 जुलाई को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के लिए उन्हें उम्मीदवार घोषित किया था। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के बाद इन तीनों नेताओं ने पिछले महीने राज्यसभा और तृणमूल, दोनों से इस्तीफा दे दिया था। इसके साथ ही, उच्च सदन की तीन सीट रिक्त हो गई थीं। इन सीटों पर हुए उपचुनावों के नतीजे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल के लिए एक और झटका हैं, क्योंकि पार्टी छोड़ने के कुछ ही हफ्तों के भीतर ये तीनों नेता भाजपा के टिकट पर राज्यसभा लौट आए हैं।
(TMC) की पारंपरिक 'शहीद दिवस' रैली से ठीक पहले राज्य की राजनीति में भूचाल: पश्चिम बंगाल में 21 जुलाई को होने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पारंपरिक 'शहीद दिवस' रैली से ठीक पहले राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। पार्टी के भीतर मचे आंतरिक घमासान को लेकर विधानसभा में विपक्ष के नेता ने टीएमसी को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया है।ऋतब्रत बनर्जी आगामी 21 जुलाई को होने वाली 'शहीद दिवस' रैली की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने टीएमसी में जारी राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर ममता बनर्जी पर निशाना साधा। ऋतब्रत ने कहा कि अगर स्थिति ऐसी हो गई कि ममता बनर्जी के साथ कोई भी नेता नहीं बचा, तो क्या होगा? उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पार्टी के नेता लगातार अलग होते गए तो टीएमसी का भविष्य क्या होगा। उन्होंने ममता बनर्जी के उन बयानों पर प्रतिक्रिया दी, जिनमें उन्होंने पार्टी के अंदर अनुशासन और एकजुटता बनाए रखने की बात कही थी। ऋतब्रत ने कहा कि राजनीतिक दलों में नेताओं और कार्यकर्ताओं का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण होता है, लेकिन टीएमसी में वर्तमान स्थिति अलग दिखाई दे रही है।पश्चिम बंगाल की राजनीति में हाल के दिनों में टीएमसी के अंदर मतभेदों की खबरें सामने आती रही हैं। कुछ नेताओं के पार्टी छोड़ने और भाजपा में शामिल होने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ गई है।
ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और आने वाले समय में इसका जवाब देगी। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी के कई नेता और कार्यकर्ता पार्टी नेतृत्व से नाराज हैं।
वहीं, टीएमसी की ओर से आरोपों को लगातार खारिज किया जाता रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि संगठन पूरी तरह मजबूत है और ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी जनता के मुद्दों पर काम कर रही है।
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