- तलाशी अभियान के दौरान बरामद हुए 2.92 करोड़ रुपये नकद
- बिक्री विलेख, बैंक खाता विवरण, चेक, ऋण समझौते, निवेश विवरण और डिजिटल साक्ष्य
अशोक झा/ पटना: मैने पहले ही एक रिपोर्ट दी थी कैसे राजस्थान से पीला सोना यानि रेत का खेल चल रहा है। कल तक अर्श पर रहने वाले कैसे नदियों का अवैध खनन कर करोड़ों में खेल में कैसे हवा में उड़ रहा है। इसका खुलासा हुआ है। बिहार में अवैध बालू खनन का खेल कितना गहरा और शातिराना हो चुका है, इसका एक ऐसा चौंकाने वाला सच सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिलाकर रख दिया है। जिसे सूबे का खनन विभाग अपनी आंखों से नहीं देख पाया, उसे आईआईटी पटना की 'तीसरी आंख' यानी जियोस्पेशियल तकनीक ने पकड़ लिया है। नदियों से सैकड़ों करोड़ के पीला सोना यानि बालू निकाल लिया गया। प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से जानकारी दी गई है कि ईडी, पटना जोनल ऑफिस ने 17 जुलाई को गंगानगर, जयपुर, दिल्ली, गुरुग्राम, पटना और बांका सहित देश भर में 12 स्थानों पर पीएमएलए, 2002 के तहत तलाशी अभियान चलाया था। यह अभियान बिहार के बांका स्थित महादेव एनक्लेव प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किए जा रहे अवैध रेत खनन को लेकर चलाया गया था।ईडी ने बताया है कि महादेवा एनक्लेव प्राईवेट लिमिटेड कंपनी गंगानगर (राजस्थान) के चंदक परिवार द्वारा नियंत्रित है.कंपनी के मुखिया अशोक चंदक और उनके बेटे राघव चंदक हैं। तलाशी अभियान के दौरान 2.92 करोड़ रुपये नकद, बिक्री विलेख, बैंक खाता विवरण, चेक, ऋण समझौते, निवेश विवरण और डिजिटल साक्ष्य आदि से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद और जब्त किए गए।बता दें, महादेवा एनक्लेव प्राईवेट लिमिटेड कंपनी ने बिहार के खनन विभाग की जानकारी के बिना बांका जिले में कथित तौर पर अवैध रूप से बालू खनन किया। ईडी के पटना क्षेत्रीय कार्यालय ने अक्तूबर 2024 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), पटना से बांका जिले के नदी घाटों का भू-स्थानिक विश्लेषण करने का अनुरोध किया था।
आईआईटी की रिपोर्ट में पाया गया कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2015-16 से 2022-23 के दौरान कथित तौर पर 131 करोड़ रुपये मूल्य की बालू का अवैध खनन किया। ईडी ने पीएमएलए के प्रावधानों के तहत यह जानकारी पटना स्थित बिहार राज्य खनन निगम लिमिटेड के साथ साझा की, जिसके बाद राज्य के खान एवं भूविज्ञान विभाग ने अगस्त 2025 में पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई। धनशोधन का यह मामला इसी पुलिस प्राथमिकी के आधार पर दर्ज किया गया।अब किशनगंज जिले की जल्द ही बारी है।
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