- जानिए टीएमसी के बागी दोनों गुट का प्लान
अशोक झा/कोलकाता: बंगाल विधानसभा में पेश होने जा रहे यूसीसी विधेयक का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों के लिए सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होने वाला एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है।पश्चिम बंगाल की शुभेंदु सरकार सोमवार को यूसीसी विधेयक विधानसभा में पेश करने जा रही है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में इसे शामिल किया था। जिसमें वादा किया गया था कि सरकार बनने के 6 महीने के अंदर ही राज्य में यूसीसी बिल आएगा। ऐसे में अब सरकार इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। जिसे आज विधानसभा में पेश किया जाएगा। गुजरात, उत्तराखंड और असम के बाद अब पश्चिम बंगाल में यह बिल आ रहा है।
क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड: यूनिफॉर्म सिविल कोड एक ऐसा कानून है। जिसमें समान नागरिक संहिता लागू होती है। यानि सभी धर्मों के लिए एक ही कानून। इसके तहत शादी, तलाक, बच्चे गोद लेना, संपत्ति का अधिकार, पारिवारिक अधिकार जैसे सभी नागरिक मामलों में समान अधिकार लागू होता है। भारत के अलग-अलग राज्यों में में अलग-अलग धर्मों के हिसाब से व्यक्तिगत कानून लागू हैं। लेकिन यूसीसी बिल लागू होने के बाद सभी व्यवस्थाओं में एक ही कानून लागू होता है।
क्या है यूसीसी बिल का उद्देश्य: पश्चिम बंगाल में यूसीसी बिल का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग धर्मों के आधार पर चल रहे कानूनों की जगह पर एक कानूनी व्यवस्था लागू होगी। इस प्रस्तावित कानून का मकसद शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों के लिए धर्म से अलग एक समान सिविल ढांचा बनाना है। ऐसे में आज पेश होने वाला यह विधेयक पश्चिम बंगाल विधानसभा के बजट सत्र में चर्चा मुख्य विषय रहेगा। क्योंकि यह विधेयक पहचान, समानता, धर्मनिरपेक्षता, संवैधानिक अधिकारों और पर्सनल लॉ व राज्य के अधिकार के बीच संबंधों पर व्यापक बहस का आधार बनेगा।मुख्यमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि उनकी सरकार धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून बनाएगी। साथ ही राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करेगी। इससे राज्य का सियासी पारा चढ़ गया है।अब सबकी नजरें तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों पर हैं। दरअसल, यूसीसी विधेयक पेश करने के साथ यह मुकाबला केवल सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नहीं होगा, बल्कि टीएमसी के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच भी है। दोनों गुट इस विधेयक के खिलाफ सबसे मुखर आवाज बनने की कोशिश करेंगे। यह बहस टीएमसी के दो गुटों- पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के लिए पहली बड़ी सियासी परीक्षा है। पार्टी पर नियंत्रण को लेकर संघर्ष अब विधानसभा के भीतर भी दिखाई देने की संभावना है।
दोनों गुटों ने बनाई अलग-अलग रणनीति: दोनों गुटों ने यूसीसी विधेयक का विरोध करने का संकेत दिया है और अलग-अलग रणनीति बनाई है। दोनों गुट अलग-अलग वक्ताओं और राजनीतिक तर्कों के जरिए इस बिल विरोध करेंगे। साथ ही राजनीतिक विरासत के असली प्रतिनिधि होने का दावा भी पेश करेंगे। शुभेंदु की सरकार की ओर से प्रस्तावित यूसीसी का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों के लिए सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होने वाला एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है।विधानसभा सूत्रों के अनुसार, सोमवार की कार्यवाही के दूसरे हिस्से में विधेयक पर चर्चा होगी।इसमें मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, विपक्ष के नेता और कई वरिष्ठ विधायक भाग लेंगे।
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