अभिषेक बनर्जी पर ईडी का शिकंजा , मेयर फिरहाद हाकिम ने दिया इस्तीफा
अशोक झा/ कोलकाता: आज ममता बनर्जी जो खुद को टीएमसी सुप्रीमो कहती है उनके लिए बड़ा बुरा दिन है। एक ही दिन में तीन बड़ी खबर उन्हें तोड़ कर रख देगी। बंगाल की राजनीतिक स्थिति में ममता बनर्जी को हाल ही में तीन महत्वपूर्ण झटके लगे हैं। एक ओर, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अभिषेक बनर्जी के निवास पर पहुंची है, दूसरी ओर विधानसभा के स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष (LoP) के रूप में मान्यता दी है वही सबसे भरोसेमंद मेयर फिरहाद हाकिम ने अपना त्यागपत्र दे दिया है। बंगाल में TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है। बंगाल के सोनारपुर में हुए हमले के बाद ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी सांसद अभिषेक को बनर्जी पर एक और संकट आ गया है। ईडी की टीम मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बुधवार को उनके घर पहुंची है।एक ओर टीएमसी लगभग 2 हिस्सों में बंट गई. ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा अध्यक्ष से विपक्ष के नेता के तौर पर मान्यता मिल गई तो दूसरी ओर टीचर भर्ती घोटाले में ईडी की टीम अभिषेक बनर्जी के घर जांच करने पहुंची. उन्हें 15 जून को तलब किया है. वहीं तीसरा झटका फिरहाद हकीम ने दिया. उन्होंने कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया है.
जानकारी के अनुसार, नगर निगम अधिनियम के तहत फिरहाद हकीम को कोलकाता नगर निगम के अध्यक्ष या आयुक्त के समक्ष आधिकारिक तौर पर इस्तीफा देना होगा. अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वो ऐसा कब करते हैं. दिलचस्प बात ये है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद कोलकाता नगर निगम का पहला सत्र काफी हंगामे के साथ आयोजित हुआ. एक समय तो इसे रद्द भी करना पड़ा था.
तृणमूल विधायक कुणाल घोष ने क्या कहा?
पता चला है कि ममता बनर्जी ने फिरहाद का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. तृणमूल विधायक कुणाल घोष ने कहा कि फिरहाद हकीम ने बार-बार हमारी पार्टी नेता से इस्तीफा देने की इच्छा जताई थी. मैं भी आखिरी दिन वहां मौजूद था. हमने बात की. उन्होंने कहा कि हालात ठीक नहीं चल रहे हैं. वहीं,नबन्ना की प्रशासनिक बैठक का जिक्र करते हुए कुणाल ने कहा, प्रशासनिक बैठक में हुई चर्चा में भी यही बात सामने आई कि यह प्रभावी नहीं है.
इधर ममता के हाथ से निकल रही TMC, उधर अभिषेक बनर्जी के घर पहुंची ED, टीचर भर्ती घोटाले में जांच
फिरहाद को इस्तीफा देने की परमिशन दी
उन्होंने कहा कि दूसरी ओर फिरहाद हकीम ने भी ममता बनर्जी को पिछले कुछ दिनों की स्थिति के बारे में बताया है. हमारी पार्टी के नेता ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद फिरहाद हकीम को महापौर पद से इस्तीफा देने की अनुमति दी है. ताकि उनकी प्रतिष्ठा को कोई ठेस न पहुंचे. हालांकि, कुणाल घोष के इस दावे पर अभी तक फिरहाद की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। बंगाल विधानसभा स्पीकर रथींद्रनाथ बोस ने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के तौर पर मान्यता दे दी है। इसके बाद मीडिया कॉन्फ्रेंस में ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि TMC विधायक दल में 58 विधायकों की एक टीम है, जिन्होंने पार्टी के चुनाव चिह्न पर जीत हासिल की है; दो अन्य विधायकों भी हमारे साथ जुड़ रहे हैं।ऋतब्रता बंदोपाध्याय ने कहा कि हम ममता बनर्जी से अनुरोध करते हैं कि वे हमारे इस विपक्षी मोर्चे की मुख्य सलाहकार बनें।
निष्कासित टीएमसी नेता ऋतब्रता बनर्जी ने कहा कि हमने अभी-अभी पत्र जमा किया है. विपक्ष के नेता (एलओपी) के लिए निर्धारित कमरा आधिकारिक तौर पर आवंटित कर दिया गया है. एलओपी फिलहाल वहीं बैठे हैं. हमारी इच्छा है कि ममता दीदी हमारी सलाहकार बनी रहें और हमें अपना मार्गदर्शन देती रहें ताकि हम, एलओपी और मुख्य सचेतक के साथ मिलकर विधानसभा में पार्टी का प्रभावी नेतृत्व कर सकें. पार्टी की जो दयनीय स्थिति है, उसमें कुछ हद तक अभिषेक बनर्जी की विफलता है. आखिरकार, अगर आप सफलता का श्रेय लेते हैं, तो असफलता की जिम्मेदारी भी स्वीकार करनी चाहिए.
हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हार के एक महीने बाद तृणमूल कांग्रेस में विभाजन की खबर अब आधिकारिक हो गई है. विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 80 विधायकों में से 58 विधायकों ने पार्टी से निष्कासित विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा के नेतृत्व में बगावत कर दी है.
बुधवार को विधानसभा में एक नया प्रस्ताव पेश किया गया, जिस पर इन 58 विधायकों के हस्ताक्षर थे. इसमें दावा किया गया कि वे ही तृणमूल कांग्रेस के असली प्रतिनिधि हैं. इस प्रस्ताव में हावड़ा जिले की उलुबेरिया (पूर्व) विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) नामित किया गया है.
इसी प्रस्ताव में तृणमूल कांग्रेस के विधायकों को विपक्ष का उप नेता नामित किया गया है. इनमें उत्तरी कोलकाता की एंटाली विधानसभा सीट से संदीपान साहा, पश्चिम मेदिनीपुर जिले के केशपुर से शिउली साहा और दक्षिण 24 परगना जिले के कस्बा से जावेद अहमद खान शामिल हैं.
जिन 58 विधायकों के हस्ताक्षर इस प्रस्ताव पर थे, वे सभी सुबह से एक-एक करके विधानसभा परिसर में पहुंचने लगे. इसके बाद बागी विधायकों की एक आपात बैठक हुई, जिसमें विधानसभा में विपक्ष के लिए आरक्षित पांच सीटों के लिए पांच नामों का अनुमोदन किया गया. इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 58 विधायक स्पीकर के कक्ष में गए और प्रस्ताव प्रस्तुत किया. स्पीकर ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया.
पिछले महीने तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर के कार्यालय को एक पत्र भेजा था. इसमें शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष (एलओपी), नैना बंदोपाध्याय और असीमा पात्रा को विपक्ष की दो उप नेता और फिरहाद हकीम को विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के विधायी दल का मुख्य सचेतक नामित किया गया था।
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