अशोक झा/ कोलकाता: कोलकाता के सुरेंद्र नाथ कॉलेज में सामने आए एक मामले ने शिक्षा जगत के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा छेड़ दी है। जानकारी के अनुसार, कॉलेज परिसर में स्थित टीएमसी छात्र परिषद के कार्यालय से बड़ी मात्रा में जली हुई नकदी मिलने का दावा किया जा रहा है। शुरुआती रिपोर्टों में इस रकम के करोड़ों रुपये तक होने की बात कही जा रही है, हालांकि संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
सूत्रों के मुताबिक, छात्र संगठन के दफ्तर में कई सूटकेस रखे हुए थे।जांच के दौरान जब इन सूटकेसों को खोला गया तो उनमें भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई।हैरानी की बात यह रही कि कई नोट जले हुए या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हालत में मिले।घटना की खबर फैलते ही कॉलेज परिसर और आसपास के क्षेत्रों में लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई। इस पूरे घटनाक्रम के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं. सबसे अहम सवाल यह है कि छात्र यूनियन के कार्यालय में इतनी बड़ी रकम आखिर क्यों रखी गई थी। साथ ही यह भी जानना जरूरी है कि यह पैसा किसका था और वहां तक कैसे पहुंचा।
नोटों को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की अटकलें
फिलहाल इन सवालों के स्पष्ट जवाब सामने नहीं आए हैं। मामले के सार्वजनिक होने के बाद सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। कई लोग पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग कर रहे हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके। स्थानीय निवासियों और छात्रों के बीच भी इस घटना को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ लोग इसे सामान्य नकदी बरामदगी से कहीं बड़ा मामला मान रहे हैं और इसके पीछे किसी व्यापक वित्तीय अनियमितता या संगठित नेटवर्क की आशंका जता रहे है।
नोटों के मिलने से कॉलेज प्रशासन सवालों के घेरे में
हालांकि जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा.। फिलहाल जले हुए नोटों से भरे सूटकेसों की बरामदगी ने कॉलेज प्रशासन और संबंधित संगठनों को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।अब सभी की निगाहें जांच एजेंसियों पर टिकी हैं, जिनकी रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस रहस्यमय नकदी का स्रोत क्या था और इसके पीछे कौन लोग शामिल थे।
पढ़ने के लिए नहीं थी क्लासरूम, बना दिए बेडरूम
कैंपस से नकदी मिलने के बाद मामला और गंभीर हो गया।दिन और शाम दोनों पालियों के प्राचार्यों की मौजूदगी में कर्मचारियों ने नई इमारत की पांचवीं मंजिल पर स्थित दो बंद कमरों के ताले खुलवाए। जांच के दौरान सामने आया कि इन कमरों में संलग्न शौचालय बने हुए थे और अंदर बिस्तर, अलमारियां, मेज तथा कुर्सियां रखी थी। इस व्यवस्था को देखकर कई तरह के सवाल उठने लगे कि आखिर इन कमरों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था।
दिन की पारी के शिक्षक ने बताई वजह: दिन की पाली के शिक्षक-प्रभारी पूर्णेंदु प्रकाश पाल ने कहा कि कॉलेज में कक्षाओं के लिए पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण इस नई इमारत का निर्माण कराया गया था, ताकि विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त शिक्षण कक्ष उपलब्ध हो सकें। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि जहां इन कमरों का उपयोग पढ़ाई-लिखाई से जुड़े कार्यों के लिए होना चाहिए था, वहीं वहां रहने जैसी सुविधाएं मौजूद मिलीं. उनके अनुसार, कमरों में रखे गए बिस्तर और अन्य फर्नीचर इस बात की ओर संकेत करते हैं कि उनका उपयोग मूल उद्देश्य से अलग तरीके से किया जा रहा था।
दुनियाभर के घुमक्कड़ पत्रकारों का एक मंच है,आप विश्व की तमाम घटनाओं को कवरेज करने वाले खबरनवीसों के अनुभव को पढ़ सकेंगे
https://www.roamingjournalist.com/