- सिलीगुड़ी से मिरिक जाने वाला मार्ग हुआ अवरुद्ध , 2025 में यहां भूस्खलन से गई थी 20 लोगों की जान
अशोक झा/कोलकाता: पश्चिम बंगाल के दूधिया में मिरिक को सिलीगुड़ी से जोड़ने वाले पुल पहली बारिश में पानी के तेज बहाव को नहीं झेल पाया। पानी के तेज बहाव में वह पूरी तरह बह गया ।अब आनन फानन में तैयार किए गए 54 करोड़ को लागत से बने ब्रिज पर सवाल उठ रहे है। 468 मीटर का दूधिया हुमे पाइप ब्रिज, जो सिलीगुड़ी और मिरिक को जोड़ता है, बंगाल सरकार-पीडब्ल्यूडी द्वारा 16 दिनों में फिर से बनाया गया था जब यह क्षेत्र में भारी बाढ़ के कारण टूट गया था।पश्चिम बंगाल के दूधिया में मिरिक को सिलीगुड़ी से जोड़ने वाले पुल का निर्माण पीडब्ल्यूडी ने 16 दिनों के रिकार्ड समय में काम पूरा किया था।तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने फेसबुक पर इसकी जानकारी देते हुए बाहबाही लूटी थी। उन्होंने बताया कि इस पुल के निर्माण से स्थानीय निवासियों और यात्रियों को राहत मिली है। ममता बनर्जी ने लिखा, "मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मिरिक को सिलीगुड़ी से जोड़ने वाले दुधिया में वैकल्पिक ह्यूम पाइप ब्रिज (वेंटेड कॉजवे) का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। कल (सोमवार) से इस पर सामान्य यातायात फिर से शुरू हो जाएगा।"10 अक्टूबर को शुरू हुआ था निर्माण
ममता बनर्जी ने बताया कि दूधिया में 8 मीटर चौड़े 72 मीटर लंबे ह्यूम पाइप कॉजवे वाले इस 468 मीटर लंबे पुल का निर्माण 1200 मिमी व्यास वाले 132 ह्यूम पाइपों का उपयोग करके किया गया था। इसका निर्माण 10 अक्टूबर को शुरू हुआ था। यह निर्माण कार्य चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में लगातार प्रयासों के माध्यम से 16 दिनों के भीतर पूरा हो गया है।
54 करोड़ की लागत से बन रहा नया पुल: 1965 में निर्मित पुराना पुल संरचनात्मक रूप से कमजोर हो गया था और इसलिए पश्चिम बंगाल सरकार ने ₹54 करोड़ की लागत से एक नए पुल के निर्माण को पहले ही मंजूरी दे दी थी, जो वर्तमान में पूरे जोरों पर चल रहा है। ममता ने लिखा, "मैं इस चुनौतीपूर्ण कार्य को 16 दिनों के रिकार्ड समय में पूरा करने के लिए पीडब्ल्यूडी, पश्चिम बंगाल के सराहनीय कार्य की सराहना की थी। अब सवाल उठाया जा रहा है कि मात्र एक वर्ष के अंदर ही ब्रिज का बह जाना किसी कार्यप्रणाली में चूक तो नहीं। वर्तमान भाजपा की सरकार अब इस पूरे मामले में क्या करती है इसपर पहाड़ और समतल के लोगों की नजर लगी हुई है।
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