- आस्था, राष्ट्रभाव और सामाजिक समरसता की सशक्त स्वर है साध्वी ऋतंभरा
- भाई ताराचंद की जीवनी चिकन नेक के संरक्षक का किया विमोचन
पद्म भूषण से सम्मानित साध्वी ऋतंभरा जी ने सदैव हिंदू समाज को संगठित करने, सनातन मूल्यों को सुदृढ़ करने और समाज को विभाजनकारी व भ्रामक कथाओं से सावधान रहने का संदेश दिया है। उनका प्रेरक नेतृत्व आज भी राष्ट्र और समाज को एकता, जागरूकता और सांस्कृतिक चेतना की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। अपने तीन दिवसीय प्रवास के दौरान चिकन नेक के ठाकुरगंज में उन्होंने धर्म की ऐसी गंगा प्रवाह की ऐसी गंगा बहाई जिसमें सनातन विरोधी भी डुबकी लगाने से बच नहीं पाए। गांधी मैदान में धर्मसभा की ऐसी भव्यता और दिव्यता दिख रही थी जिसमें सभी स्वयं को सबसे बड़े सनातनी ध्वजवाहक बनने की कोशिश कर रहे थे। साध्वी ऋतम्भरा ने कहा कि भारत केवल एक भूमि का टुकड़ा नहीं है। भारत को सीमाओं में भी नहीं बांधा जा सकता। सैकड़ों वर्षों तक हुए आक्रमण भी भारत की मूल आत्मा को समाप्त नहीं कर पाए, क्योंकि भारत की संस्कृति सनातन है। आज इस चिकन नेक में घुसपैठ, धर्मांतरण और कई प्रकार के पाखण्ड पनप रहे है। सेकुलरिज्म ढोंग व पाखंड है। इससे बड़ा झूठ हो ही नहीं सकता, क्योंकि भारत की आत्मा में ही विश्व कल्याण निहित है। उन्होंने कहा आज हमें बाहरी खतरों के मुकाबले आंतरिक परिस्थतियों से ज्यादा बड़ी चुनौती मिल रही है, इसलिए समस्त हिन्दू समाज को एकजुट होना होगा। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि हिन्दू विरोधी गतिविधियों को मुंहतोड़ जवाब भी देना होगा। साध्वी ऋतंभरा ने राम मंदिर आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि वर्षों के संघर्ष, तपस्या एवं बलिदान के बाद 22 जनवरी 2024 को रामलला साक्षात रूप में अयोध्या में विराजमान हुए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सौ वर्षों की यात्रा हिन्दू संगठन के लिए पावन प्रयास सराहनीय है। कहा कि किसी भी राष्ट्र के लिए पांच मुख्य बातें आधारभूत तत्व जैसी हैं और प्रत्येक नागरिक को इसका गहराई से पालन करना चाहिए। उन्होंने पंच परिवर्तन पर बोलते हुए कहा कि पर्यावरण केवल भाषणों का विषय नहीं है, हमें पर्यावरण संरक्षण के लिए हर आवश्यक कदम उठाने चाहिए। उन्होंने स्व का बोध, सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन तथा नागरिक कर्तव्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह सभी पंथी भारतीय हैं और हजारों वर्ष पुरानी हैं। इसलिए हमें भारतीय जीवन शैली के साथ-साथ इसे अपनाना होगा। इस अवसर पर स्थानीय लेखक भाई ताराचंद धानुका द्वारा लिखित पुस्तक "चिकन नेक के संरक्षक"
का विमोचन भी किया गया। पुस्तक के विमोचन को लेकर लोगों में उत्साह देखा गया। कार्यक्रम में ठाकुरगंज के अलावा चिकननेक से जुड़े क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग आए हुए थे। भव्य तोरण द्वार बनाए गए थे और प्रमुख मार्गों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए थे। दीदी मां साध्वी ऋतंभरा के आगमन से ठाकुरगंज भक्तिमय और उत्सव माहौल में नजर आया। ऐसा माहौल इसके पहले चुनावों के समय ही देखा जाता रहा है।
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